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Cancer Symptoms: लंबे समय से बना हुआ है पीठ में दर्द, कहीं यह कैंसर का संकेत तो नहीं?

Mon, 03 Oct 2022 06:33 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पीठ में दर्द कैंसर का हो सकता है संकेत - फोटो : iStock
कैंसर, वैश्विक स्तर पर सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है। हर साल लाखों लोगों की इसके कारण मौत हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर से होने वाली मौत के लिए समय पर स्थिति का निदान और इलाज न हो पाने को प्रमुख कारण के तौर पर जाना जाता है। ज्यादातर लोग इसके लक्षणों को समय रहते समझ नहीं पाते हैं जिसके कारण कैंसर का पता ही आखिर के चरणों में चल पाता है, जिससे इलाज और रोगी के बचने की संभावना जटिल और कम हो जाती है।

क्या आप जानते हैं कि अक्सर पीठ में बने रहने वाली दर्द की स्थिति भी कैंसर का संकेत हो सकती है जिसपर समय पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

डॉक्टर्स कहते हैं, वैसे तो मांसपेशियों की समस्याओं, गलत मुद्रा में बैठने और चोट लगने के कारण पीठ में दर्द होना सामान्य है। हालांकि अध्ययनों में पाया गया है कि कुछ प्रकार के कैंसर की स्थिति में इसके लक्षण के तौर पर भी पीठ में दर्द की समस्या बनी रह सकती है। अक्सर हम सभी अपने पीठ दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं,जबकि अगर समय रहते इसके सही कारण का पता चल जाए तो कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं के खतरे से बचा जा सकता है। आइए जानते हैं कि पीठ दर्द और कैंसर का क्या लिंक है और किस स्थिति में लोगों को विशेष सर्तक हो जाने की आवश्यकता होती है?
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कैंसर के जोखिम कारकों के बारे में जानिए - फोटो : istock
कैंसर में पीठ दर्द की समस्या

कैंसर के कारणों को जानने के लिए किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ प्रकार के कैंसर कारक ट्यूमर, रीढ़ की हड्डी या इसके आसपास विकसित हो सकते हैं, इससे कैंसर होने का खतरा रहता है। अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ न्यूरोलॉजिकल सर्जन (एएएनएस) के शोधकर्ता बताते हैं,  कैंसर से पीड़ित 30 से 70 प्रतिशत लोगों का कैंसर रीढ़ तक फैल जाता है, जिसके कारण पीठ में दर्द होने काफी सामान्य संकेत है।

फेफड़े और स्तन कैंसर के मामलों में इस तरह की समस्या होने का खतरा अधिक होता है, ऐसे में यदि आपको भी लंबे समय से पीठ में दर्द की  समस्या बनी हुई है तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें। आइए जानते हैं कि किस प्रकार के कैंसर में पीठ में दर्द की दिक्कत हो सकती है?
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फेफड़ों के कैंसर की समस्या - फोटो : iStock
फेफड़ों के कैंसर का संकेत

एएएनएस की रिपोर्ट से पता चलता है कि फेफड़े का कैंसर सबसे आम कैंसर में से एक है जिसके रीढ़ तक फैलने का खतरा अधिक होता है है। फेफड़े का ट्यूमर रीढ़ की हड्डी पर दबाव डाल सकता है, जिससे पीठ के निचले हिस्से में तंत्रिका संचरण प्रभावित हो जाता है। इस प्रकार की जटिलताओं के कारण पीठ के निचले हिस्से में दर्द के अलावा थकान, सांस लेने में तकलीफ और खांसी के साथ खून जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। पीठ में दर्द के साथ अगर आपको इस तरह की समस्या बनी हुई है तो तुरंत किसी विशेष से सलाह ले लें।

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कैंसर के लक्षणों और इसके खतरे को जानिए - फोटो : istock
गैस्ट्रोइंटस्टाइनल ट्रैक्ट में कैंसर

गैस्ट्रोइंटस्टाइनल ट्रैक्ट जैसे पेट, कोलन और मलाशय के कैंसर में भी रोगियों ने पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या के बारे में शिकायत की है। यह दर्द कैंसर वाली जगह से पीठ के निचले हिस्से तक फैलता है। इस प्रकार के कैंसर वाले रोगियों को अचानक वजन कम होना या मल से खून आने की समस्या भी बनी रहती है। पेट से संबंधित इस प्रकार के कैंसर का खतरा काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है, समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान देकर गंभीर स्थतियों से बचाव किया जा सकता है।
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स्तन कैंसर के जोखिम को जानिए - फोटो : iStock
स्तन कैंसर का खतरा

स्तन कैंसर के कुछ मामलों में भी रोगियों ने पीठ में दर्द की समस्या के बारे में जानकारी दी। फेफड़ों के कैंसर की तरह, कुछ प्रकार के स्तन कैंसर में भी ट्यूमर उन नसों पर दबाव डाल सकते हैं जो रीढ़ तक जाती हैं, इससे दर्द होने का खतरा रहता है।

डॉक्टर्स कहते हैं इस तरह के संकेतों पर अगर प्रारंभ में ही ध्यान देकर स्थिति का सही निदान कर लिया जाए तो कैंसर के बढ़ने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। स्तन कैंसर के अलावा रीढ़ की हड्डी या इसके आसपास ट्यूमर या कैंसर कारक कोशिकाओं में वृद्धि के कारण भी पीठ दर्द हो सकता है, हालांकि यह स्थिति काफी दुर्लभ मानी जाती है। पीठ दर्द पर हमेशा गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है।


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स्रोत और संदर्भ
Loneliness associated with double the risk of developing diabetes

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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