Ayurveda Day 2026: आयुर्वेद को लेकर लोगों के बीच कई तरह के दावे तेजी से लोकप्रिय हैं। लेकिन सवाल है कि इन दावों के पीछे कितने मजबूत वैज्ञानिक सबूत हैं? आयुर्वेद दिवस के मौके पर हम ऐसे ही 7 लोकप्रिय दावों की पड़तालों के बारे में बात करेंगे। इंटरनेट पर उपलब्ध शोध बताते हैं कि कुछ आयुर्वेदिक तैयारियों पर शुरुआती या सीमित प्रमाण मौजूद हैं, लेकिन कई बीमारियों में इनके असर को लेकर पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सकीय प्रमाण अभी नहीं हैं।
वहीं, कुछ आयुर्वेदिक उत्पादों में सुरक्षा संबंधी सवाल भी सामने आए हैं। इसलिए हम सभी को ये समझनेकी जरूरत है कि हमेशा प्राकृतिक होने का मतलब हमेशा पूरी तरह सुरक्षित होना नहीं है। बीमारी के इलाज में कोई भी दवा शुरू या बंद करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है। आइए आपको इभी इनकी जानकारी देते हैं।
विज्ञापन
2 of 8
आयुर्वेद दिवस 2026
- फोटो : अमर उजाला
1. दावा: अश्वगंधा तनाव और नींद ठीक करती है
कुछ अध्ययनों में अश्वगंधा से तनाव और नींद में लाभ के संकेत मिले हैं, लेकिन सभी दावों के लिए पर्याप्त मजबूत प्रमाण नहीं हैं। लंबे समय तक इसके इस्तेमाल की सुरक्षा को लेकर भी अभी सवाल हैं।
विज्ञापन
3 of 8
आयुर्वेद दिवस 2026
2. दावा: हल्दी हर तरह की सूजन दूर करती है
हल्दी और उसमें मौजूद करक्यूमिन पर कई अध्ययन हुए हैं, लेकिन इसे हर बीमारी और हर तरह की सूजन का इलाज बताने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। इसका असर बीमारी, मात्रा और इस्तेमाल किए गए उत्पाद के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
4 of 8
आयुर्वेद दिवस 2026
- फोटो : Freepik.com
3. दावा: त्रिफला कब्ज का पक्का इलाज है
त्रिफला आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन हर व्यक्ति और हर तरह की कब्ज का इलाज करने का दावा करने के लिए मजबूत चिकित्सकीय प्रमाण जरूरी हैं। लगातार कब्ज रहने पर उसके मूल कारण की जांच भी जरूरी है।
विज्ञापन
5 of 8
आयुर्वेद दिवस 2026
- फोटो : Freepik.com
4. दावा: करेला मधुमेह की दवा की जगह ले सकता है
करेले और अन्य आयुर्वेदिक उपायों पर मधुमेह को लेकर शोध हुआ है, लेकिन इन्हें सामान्य रूप से चिकित्सक द्वारा दी गई मधुमेह की दवाओं का विकल्प नहीं माना जा सकता। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद करना नुकसानदायक हो सकता है।
विज्ञापन
6 of 8
आयुर्वेद दिवस 2026
- फोटो : Freepik.com
5. दावा: आयुर्वेद से पीएमओएस पूरी तरह ठीक हो सकता है
पीएमओएस में आयुर्वेदिक उपचार को लेकर शोध मौजूद है, लेकिन इलाज और लक्षणों को नियंत्रित करने के बीच अंतर समझना जरूरी है। इस विषय में उपलब्ध शोध की गुणवत्ता और परिणामों को अलग-अलग देखना चाहिए।
विज्ञापन
7 of 8
आयुर्वेद दिवस 2026
- फोटो : AI
6. दावा: आयुर्वेदिक दवा प्राकृतिक है, इसलिए नुकसान नहीं करती
प्राकृतिक होना सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है। कुछ आयुर्वेदिक तैयारियों में सीसा, पारा या आर्सेनिक जैसे हानिकारक तत्व पाए जाने की चिंता सामने आई है। इसलिए दवा की गुणवत्ता, स्रोत और चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण हैं।
7. दावा: आयुर्वेदिक दवा लेने के बाद डॉक्टर की जरूरत नहीं
गंभीर या लगातार लक्षणों में सही बीमारी का पता लगाना जरूरी है। आयुर्वेदिक दवा लेने के कारण चिकित्सकीय जांच या जरूरी उपचार को टालना उचित नहीं है। पहले से चल रही दवा को भी बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद नहीं करना चाहिए।
-----------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।