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Autism Awareness Day: बच्चों में ऐसे लक्षणों की पहचान जरूरी, यह विकार जीवन की गुणवत्ता को करता है प्रभावित

Sun, 02 Apr 2023 02:27 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे 2023 - फोटो : istock
आज वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे है, बच्चों में मस्तिष्क के विकास से संबंधित एक गंभीर समस्या जिसका असर जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि अगर समय रहते बच्चों में इसके लक्षणों की पहचान और उपचार कर लिया जाए तो उनमें काफी हद तक सुधार आने की संभावना हो सकती है।

एक अनुमान के अनुसार हर 100 में से एक बच्चा ऑटिज्म का शिकार होता है, जिसके लिए दैनिक जीवन के काम करना, जैसे अपना नाम सुनते ही उसका जवाब देने में विफलता या लोगों से अलग-थलग रहने की समस्या हो सकती है।

दुनियाभरमें बढ़ती इस तरह की समस्या के जोखिमों को कम करने के लिए हर साल 2 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय स्तर जागरूकता दिवस मनाया जाता है, जिसमें ऑटिस्टिक विकारों के शिकार व्यक्तियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उपाय करने और बच्चों में इसके जोखिमों को कम करने के बारे में लोगों को शिक्षित करने का प्रयास किया जाता है। सभी लोगों को इस समस्या के बारे में जरूर जानना चाहिए।
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बच्चों में ऑटिज्म की समस्या को पहचानें - फोटो : istock
क्या होता है ऑटिज्म?

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) मस्तिष्क के विकास से संबंधित समस्या है जो इस बात को प्रभावित करती है कि एक व्यक्ति दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करता है। इसके शिकार लोगों में सामाजिक संपर्क और बातचीत के कौशल में समस्याएं होने लगती हैं। इस विकार के कारण व्यवहार और दैनिक जीवन के सामान्य कार्यों  को करने तक में कठिनाई होने लगती है।

एएसडी के लक्षण बचपन में दिखने लगते हैं। अक्सर बच्चों में जन्म के पहले साल में ही ऑटिज्म के लक्षणों की पहचान की जा सकती है। 18-24 महीने की उम्र तक यह बढ़ी हुई समस्याओं के रूप में नजर आने लगती है।
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ऑटिज्म के लक्षण - फोटो : Pixabay
बच्चों में क्या दिक्कतें हो सकती हैं?

कुछ बच्चों में जन्म के पहले वर्ष में ही इसके स्पष्ट लक्षण नजर आने लगता है जैसे बच्चों का आई कॉन्टैक्ट कम होना, नाम सुनने पर प्रतिक्रिया की कमी, बार-बार किसी बात को रटने रहना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना आदि।

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार वाले कुछ बच्चों को सीखने में कठिनाई होती है और कुछ में सामान्य से कम बुद्धि के लक्षण होते हैं। वहीं इस विकार वाले अन्य बच्चों में सामान्य से उच्च बुद्धि भी हो सकती है। वे जल्दी से सीखते हैं, फिर भी रोजमर्रा की जिंदगी में जो जानते हैं उसे संप्रेषित करने और प्रयोग करने में परेशानी हो सकती है। 

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ऑटिज्म की समस्या की करें पहचान - फोटो : istock
व्यवहार की समस्याएं

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चे या वयस्क के व्यवहार, रुचियों या दैनिक जीवन की गतिविधियों में कई प्रकार के पैटर्न देखे जा सकते हैं।
  • ऐसे कार्य करना जो स्वयं को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जैसे काटना या सिर पीटना।
  • दिनचर्या के एक खास रूटीन में रमा होना और थोड़े से बदलाव पर परेशान हो जाना।
  • समन्वय के साथ समस्याएं जैसे पैर की उंगलियों पर चलना शरीर का बैंलेस बनाने में दिक्कत होना।
  • प्रकाश, ध्वनि या स्पर्श के प्रति असामान्य रूप से संवेदनशील होना।
  • भाषा या सामाजिक कौशल में कठिनाई होना।
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ऑटिज्म को कैसे ठीक करें? - फोटो : iStock
समय पर लें डॉक्टरी मदद

जन्म के पहले-दूसरे साल में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार के लक्षण दिखने लग जाते हैं। यदि आप अपने बच्चे के विकास (शारीरिक-मानसिक) के बारे में चिंतित हैं या आपको संदेह है कि आपके बच्चे को ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर हो सकता है, तो शीर्घ डॉक्टर से चर्चा करें। वैसे तो ऑटिज्म के लिए कोई खास उपचार नहीं है पर थेरेपी और अन्य उपायों के माध्यम से लक्षणों में सुधार करके जीवन की गुणवत्ता को सुधारा जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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