अस्थमा और सांस की समस्या
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सिर्फ इनहेलर नहीं, जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी
लंदन की एक प्रसिद्ध जनरल प्रैक्टिशनर डॉक्टर डॉ. फिलिपा केय कहती हैं, अस्थमा अटैक को कंट्रोल करने के लिए सही तरह के इनहेलर का इस्तेमाल बेहद जरूरी है, लेकिन अस्थमा को नियंत्रित रखने के लिए सिर्फ दवा पर निर्भर रहना ठीक नहीं है। मौसम बदलने के दौरान कुछ छोटी-छोटी सावधानियां भी काफी मददगार हो सकती हैं।
- बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ से ढकें
ठंड के मौसम में बाहर निकलते समय नाक और मुंह पर हल्के से स्कार्फ लपेटना एक आसान और उपयोगी उपाय है। यह सुनने में बहुत मामूली लग सकता है, लेकिन इससे फायदा हो सकता है।
स्कार्फ सांस के साथ अंदर जाने वाली ठंडी हवा को कुछ हद तक गर्म और नम करने में मदद करता है। इससे फेफड़ों तक पहुंचने से पहले हवा का तापमान बदलता है और सांस की नलियों को ठंड से लगने वाला झटका कम हो सकता है।
- रोजाना व्यायाम करें, लेकिन सावधानी के साथ
अस्थमा के मरीजों के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी है। कई मरीजों को डर रहता है कि व्यायाम करने से सांस फूलने लगेगी या अस्थमा का अटैक पड़ सकता है। इसी वजह से वे शारीरिक गतिविधियों से दूरी बना लेते हैं। लेकिन नियमित व्यायाम दिल और फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे अस्थमा को नियंत्रित रखने में भी मदद मिल सकती है। तेज चलना, हल्की दौड़ लगाना, साइकिलिंग या तैराकी करना भी उपयोगी हो सकता है।