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डॉक्टर ने बताया: सर्दियों में बढ़ जाते हैं अस्थमा अटैक के मामले, क्या बिना इनहेलर के भी हो सकता है इससे बचाव?

Fri, 30 Oct 2026 02:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Winter Asthma Prevention: सर्दियों में ठंडी हवा, धूल-धुआं, सीलन अस्थमा के लक्षण बढ़ा सकते हैं। सही इनहेलर का इस्तेमाल, नियमित व्यायाम, वजन कंट्रोल करना रखना, धूम्रपान से बचना और वैक्सीनेशन आपके लिए मददगार हो सकता है। रात में खांसी या सांस फूलने पर डॉक्टर से सलाह लें और गंभीर परेशानी में तुरंत अस्पताल जाएं।
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अस्थमा अटैक का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
देश के ज्यादातर हिस्सों में अब सर्दियों ने दस्तक दे दी है, धीरे-धीरे पारा गिरने लगा है। सर्दियों का ये मौसम वैसे तो ज्यादातर लोगों के लिए खुशनुमा होता है पर पहले से ही कुछ प्रकार की बीमारियों जैसे अस्थमा के शिकार लोगों के लिए ये मौसम मुश्किलें बढ़ाने वाला भी हो सकता है।

अस्थमा को दमा के नाम से भी जाना जाता है, इसके मरीजों के लिए ये मौसम परेशानी बढ़ा सकता है। अस्थमा के कारण कभी लगातार खांसी, कभी छाती में जकड़न तो कभी सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आती है। इसमें सांस लेने से संबंधित समस्याओं को कंट्रोल करने के लिए मरीज बार-बार अपने इनहेलर का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर बार इनहेलर से राहत मिलना इस बात की गारंटी नहीं है कि अस्थमा पूरी तरह नियंत्रित है। ब्रिटेन में इलाज से जुड़ी नई सिफारिशों के बाद इनहेलर को लेकर भी कई मरीज उलझन में हैं।

आइए जानते हैं कि इस संबंध में क्या नई सिफारिशें की गई हैं और बिना इनहेलर के किस तरह से अस्थमा के लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है?
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अस्थमा की समस्या - फोटो : Freepik.com
मौसम बदलने पर अस्थमा का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मौसम बदलते ही अस्थमा के लक्षणों से परेशान होकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। सर्दियों के मौसम में खांसी-जुकाम, ठंडी हवा, घरों में सीलन, फफूंद और धुएं जैसी चीजें अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकती हैं। इस मौसम में लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए बहुत से मरीज इनहेलर पर काफी हद तक निर्भर हो जाते हैं। इनहेलर एक ऐसा उपकरण है, जिससे दवा को सांस के रास्ते सीधे फेफड़ों तक पहुंचाया जाता है। यह अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।

लेकिन यहां दो बातें समझना जरूरी है।
  • पहली, ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) ने मरीजों को दिए जाने वाले इनहेलर के विकल्प में बदलाव किया है। इससे कई मरीज उलझन में पड़ गए हैं। 
  • दूसरी बात यह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जीवनशैली में कुछ बदलाव करके भी अस्थमा को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। ये बदलाव इनहेलर के इस्तेमाल जितने ही जरूरी हो सकते हैं, बल्कि कुछ मामलों में इनकी अहमियत और भी ज्यादा होती है।
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अस्थमा का खतरा और इनहेलर - फोटो : Amarujala.com/AI
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, अस्थमा किसी भी उम्र में शुरू हो सकता है। जिन लोगों को एलर्जी, एक्जिमा और सूजन की समस्या उनमें इसका खतरा अधिक हो सकता है। परिवार में किसी को अस्थमा होने पर भी इसका जोखिम बढ़ सकता है। इसे मामूली बीमारी समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। ब्रिटेन में हर दिन लगभग चार लोगों की अस्थमा के गंभीर अटैक से मौत हो जाती है। माना जाता है कि इनमें से कई मौतों को समय पर सही इलाज और सावधानियों से रोका जा सकता है।

अस्थमा के लिए नए तरह के इनहेलर का सुझाव

ब्रिटेन साल 2024 के अंत में अस्थमा के इलाज से जुड़ी सिफारिशों में बदलाव हुआ था। इसके बाद कई मरीजों को नई दवाओं और इनहेलर के इस्तेमाल को लेकर भ्रम होने लगा।

आसान शब्दों में कहें तो अब ज्यादातर मरीजों को पहले की तरह सिर्फ पारंपरिक नीला इनहेलर देने के बजाय दूसरी तरह के इनहेलर की सलाह दी जा रही है। इसकी वजह यह है कि नीला इनहेलर सांस की परेशानी को जल्दी कम कर सकता है, लेकिन यह सांस की नलियों में मौजूद सूजन का इलाज नहीं करता।
 
  • अब एक ही इनहेलर में दो तरह की दवाएं मिलाई जाती हैं। इसमें स्टेरॉयड होता है, जो सांस की नलियों की सूजन को कम करता है। साथ ही फॉर्मोटेरोल होता है, जो जल्दी असर करके सांस की नलियों को खोलने में मदद करता है।

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अस्थमा और सांस की समस्या - फोटो : Freepik.com
सिर्फ इनहेलर नहीं, जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी

लंदन की एक प्रसिद्ध जनरल प्रैक्टिशनर डॉक्टर डॉ. फिलिपा केय कहती हैं, अस्थमा अटैक को कंट्रोल करने के लिए सही तरह के इनहेलर का इस्तेमाल बेहद जरूरी है, लेकिन अस्थमा को नियंत्रित रखने के लिए सिर्फ दवा पर निर्भर रहना ठीक नहीं है। मौसम बदलने के दौरान कुछ छोटी-छोटी सावधानियां भी काफी मददगार हो सकती हैं।
 
  • बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ से ढकें

ठंड के मौसम में बाहर निकलते समय नाक और मुंह पर हल्के से स्कार्फ लपेटना एक आसान और उपयोगी उपाय है। यह सुनने में बहुत मामूली लग सकता है, लेकिन इससे फायदा हो सकता है।

स्कार्फ सांस के साथ अंदर जाने वाली ठंडी हवा को कुछ हद तक गर्म और नम करने में मदद करता है। इससे फेफड़ों तक पहुंचने से पहले हवा का तापमान बदलता है और सांस की नलियों को ठंड से लगने वाला झटका कम हो सकता है।
 
  • रोजाना व्यायाम करें, लेकिन सावधानी के साथ

अस्थमा के मरीजों के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी है। कई मरीजों को डर रहता है कि व्यायाम करने से सांस फूलने लगेगी या अस्थमा का अटैक पड़ सकता है। इसी वजह से वे शारीरिक गतिविधियों से दूरी बना लेते हैं। लेकिन नियमित व्यायाम दिल और फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे अस्थमा को नियंत्रित रखने में भी मदद मिल सकती है। तेज  चलना, हल्की दौड़ लगाना, साइकिलिंग या तैराकी करना भी उपयोगी हो सकता है।
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धूम्रपान से फेफड़ों को होने वाला खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
  • धूम्रपान छोड़ें और धुएं से बचें

अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ना आपकी सेहत के लिए सबसे जरूरी है। इससे सांस से जुड़ी समस्याएं कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही कैंसर जैसी दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा भी घट सकता है।सिर्फ सिगरेट पीने से बचना ही नहीं, बल्कि दूसरे लोगों के धुएं और आसपास मौजूद धुएं से भी दूरी बनाना जरूरी है। धुआं अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकता है।
 
  • फ्लू और दूसरे संक्रमणों से बचाव करें

अस्थमा के मरीजों को सांस से जुड़ी बीमारियों के संक्रमण से बचने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी टीके लगवाना फायदेमंद हो सकता है। फ्लू के टीके कई प्रकार के श्वसन संक्रमण के खतरे को कम करने में मददगार हो सकते हैं। इससे अस्थमा अटैक का कारण बननी वाली समस्याओं को भी कम किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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