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Women Health: मेनोपॉज के बाद क्यों कमजोर होने लगती हैं हड्डियां? ये आसान उपाय बचा सकते हैं गंभीर समस्याओं से

Fri, 21 Aug 2026 08:40 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुबह उठने के बाद जोड़ों में ज्यादा अकड़न रहना, बार-बार सूजन होना, चलते समय दर्द होना जोड़ों की समस्याओं का संकेत हो सकता है। 50 की उम्र के बाद महिलाओं को इसका खतरा ज्यादा रहता है। 
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महिलाओं में गठिया की दिक्कत - फोटो : Freepik.com
हड्डियां और जोड़ हमारे शरीर का वह हिस्सा हैं, जिनकी मदद से हम रोजमर्रा के लगभग हर काम को आसानी से कर पाते हैं। चलने से लेकर सीढ़ियां चढ़ने, उठने-बैठने इन सभी कामों में हमारे जोड़ और हड्डियां लगातार काम करते हैं। लेकिन जब इन्हीं जोड़ों में दर्द, सूजन या अकड़न शुरू हो जाए तो छोटी-छोटी चीजें भी मुश्किल लगने लगती हैं। आर्थराइटिस यानी गठिया ऐसी ही समस्या है, जो जोड़ों को प्रभावित करती है।

आर्थराइटिस को अक्सर उम्र बढ़ने से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि यह केवल बुजुर्गों की बीमारी है। बच्चों और युवाओं से लेकर महिलाओं और पुरुषों तक, अलग-अलग उम्र के लोगों में इसके कई प्रकार देखने को मिलते हैं। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा जरूर बढ़ जाता है। खासकर महिलाओं में 50 की उम्र के बाद जोड़ों और हड्डियों की सेहत को लेकर ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

इसका एक बड़ा कारण मेनोपॉज के आसपास होने वाले हार्मोनल बदलाव भी हो सकते हैं। इस दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिसका असर हड्डियों की सेहत पर पड़ सकता है।
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हड्डियों की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
महिलाओं में आर्थराइटिस का खतरा क्यों बढ़ सकता है?

महिलाओं के शरीर में उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। गर्भावस्था के दौरान शरीर का वजन बढ़ने और शरीर में होने वाले बदलावों के कारण घुटनों, कमर और पैरों के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि हर महिला में इससे आर्थराइटिस होना जरूरी नहीं है।
 
  • मेनोपॉज के बाद स्थिति थोड़ी अलग हो सकती है। इस समय एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है।
  • एस्ट्रोजन हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में भूमिका निभाता है, इसलिए इसके कम होने से हड्डियों की सेहत प्रभावित हो सकती है। इसी उम्र में कई महिलाओं में वजन बढ़ने और शारीरिक गतिविधि कम होने की समस्या भी देखी जाती है।

इसके अलावा अगर खानपान में कैल्शियम, विटामिन डी और प्रोटीन जैसे जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं तो हड्डियों और मांसपेशियों की सेहत पर असर पड़ सकता है। इसलिए महिलाओं को कम उम्र से ही अपनी हड्डियों और जोड़ों का ध्यान रखना शुरू कर देना चाहिए।
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जोड़ों की समस्याओं से बचने के लिए वेट लॉस - फोटो : Freepik.com
आर्थराइटिस से बचाव के लिए क्या करें?

आर्थराइटिस को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर जोड़ों और हड्डियों की सेहत को बेहतर रखा जा सकता है।
 
  • हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम जरूरी पोषक तत्व है। दूध, दही, पनीर, तिल और कुछ हरी सब्जियों से कैल्शियम मिल सकता है। विटामिन डी शरीर को कैल्शियम के इस्तेमाल में मदद करता है। 
  • अगर आपको लगता है कि डाइट से पोषण पर्याप्त नहीं मिल रहा है तो बिना सलाह के सप्लीमेंट शुरू करने के बजाय डॉक्टर या डाइटिशियन से बात करें।
  • जोड़ों की सेहत के लिए हर समय आराम करना सही तरीका नहीं है। लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की सक्रियता कम हो सकती है और मांसपेशियां कमजोर पड़ सकती हैं।
  • अपनी क्षमता के अनुसार रोजाना वॉकिंग, साइकिलिंग, तैराकी, हल्की स्ट्रेचिंग या योग जैसी गतिविधियां की जा सकती हैं। अगर पहले से जोड़ों में दर्द या कोई बीमारी है तो एक्सरसाइज शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
  • अधिक वजन का असर खासकर घुटनों और पैरों के जोड़ों पर पड़ सकता है। शरीर का वजन बढ़ने से रोजाना चलने-फिरने के दौरान जोड़ों पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है।
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हड्डियों की समस्या - फोटो : Freepik.com
मेनोपॉज के बाद हड्डियों की सेहत पर दें खास ध्यान

मेनोपॉज के बाद महिलाओं को हड्डियों की सेहत को लेकर ज्यादा सजग रहने की जरूरत हो सकती है। अगर परिवार में हड्डियों से जुड़ी बीमारी का इतिहास है, बार-बार फ्रैक्चर हुआ है, शरीर का वजन बहुत ज्यादा है तो समय रहते जांच जरूरी है। कुछ उपाय आपको भविष्य की गंभीर समस्याओं से बचाए रखने में मददगार हो सकते हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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