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Child Health: बच्चों को बार-बार दे रहे हैं एंटीबायोटिक दवाएं? खुद ही तो नहीं दे रहे जानलेवा समस्याओं को न्योता

Thu, 23 Jul 2026 06:19 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दुनियाभर में बच्चों में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बढ़ता प्रतिरोध वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित और गलत इस्तेमाल पर रोक नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में सामान्य संक्रमणों का इलाज भी बेहद कठिन हो सकता है।
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बच्चों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
कई अध्ययन इस बात को लेकर लगातार अलर्ट करते रहे हैं कि कभी भी खुद से या बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए। जिस तरह से दुनियाभर में  एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ती देखी जा रही है, ऐसे में ये सावधानी और भी जरूरी हो जाती है।

एक समय था जब एंटीबायोटिक दवाओं को चिकित्सा जगत का सबसे बड़ा हथियार माना जाता था, लेकिन आज वही चमत्कारी दवा दुनिया के सामने एक नई चुनौती बनकर खड़ी है। बार-बार एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल के कारण एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ गया है। इससे बैक्टीरिया इतने मजबूत हो चुके हैं कि पहले जिन दवाओं से वे आसानी से खत्म हो जाते थे, अब उन पर उनका असर कम या बिल्कुल नहीं होता।

हालिया रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञ बच्चों में बढ़ रहे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या को लेकर अलर्ट कर रहे हैं। 
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एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस बड़ा संकट - फोटो : Freepik.com
बच्चों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का अलर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) लंबे समय से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को वैश्विक स्वास्थ्य संकट बता रहा है। बच्चों में बार-बार संक्रमण होना, हर बुखार में बिना जांच के एंटीबायोटिक शुरू कर देना, डॉक्टर की सलाह के बिना दवा खरीद लेना या दवा का पूरा कोर्स पूरा न करना, ये सभी आदतें बैक्टीरिया को और अधिक ताकतवर बना रही हैं।
 
  • मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनियाभर में बच्चों में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बढ़ता प्रतिरोध वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन रहा है। 
  • विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित और गलत इस्तेमाल पर रोक नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में सामान्य संक्रमणों का इलाज भी बेहद कठिन हो सकता है।
  • इसका सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ने की आशंका है, क्योंकि उनके लिए प्रभावी और सुरक्षित दवाओं के विकल्प पहले से ही सीमित हैं।
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बच्चों में बढ़ता एंटीबायोटिक प्रतिरोध - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

अमेरिकी जर्नल जामा पीडियाट्रिक्स में प्रकाशित एक नए अध्ययन में बताया गया है कि बच्चों में संक्रमण फैलाने वाले दो प्रमुख बैक्टीरिया- ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया एसिनेटोबैक्टर बाउमानी और क्लेबसिएला तेजी से एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर रहे हैं। 
 
  • शोध के अनुसार एसिनेटोबैक्टर बाउमानी सबसे अधिक दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया के रूप में सामने आया है। यह बैक्टीरिया अस्पतालों में भर्ती मरीजों में रक्त संक्रमण, निमोनिया और अन्य गंभीर संक्रमणों का कारण बनता है। 
  • दूसरी ओर क्लेबसिएला बैक्टीरिया मूत्र मार्ग संक्रमण, लिवर एब्सेस और कई अन्य गंभीर बीमारियों से जुड़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी यूरोप और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में क्लेबसिएला में एंटीबायोटिक प्रतिरोध की रफ्तार सबसे तेज देखी जा रही है।
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बच्चों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का जोखिम - फोटो : Freepik.com
क्यों बढ़ता जा रहा है खतरा?

अध्ययन में रॉयल चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न और ब्राउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि इस प्रवृत्ति पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो गंभीर संक्रमणों के उपचार के लिए उपलब्ध प्रभावी दवाएं लगातार कम होती जाएंगी।

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में बढ़ते एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का सबसे बड़ा कारण एंटीबायोटिक का अनावश्यक और गलत इस्तेमाल है। 
 
  • कई बार वायरल संक्रमण जैसे सर्दी, जुकाम या फ्लूमें भी एंटीबायोटिक शुरू कर दी जाती है, जबकि इन बीमारियों पर इनका कोई असर नहीं होता।
  • दूसरा कारण है दवा का कोर्स बीच में छोड़ देना। बच्चा थोड़ा ठीक महसूस करते ही कई अभिभावक दवा बंद कर देते हैं। इससे कुछ बैक्टीरिया जीवित बच जाते हैं और उनमें प्रतिरोध विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • खुद से दवा खरीदना, बची हुई पुरानी एंटीबायोटिक दोबारा देना, गलत खुराक लेना भी इस समस्या को बढ़ाती है।
  •  शोध बताते हैं कि बच्चों में कान, गले और श्वसन संक्रमण के लिए कई बार आवश्यकता से अधिक एंटीबायोटिक लिखी जाती हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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