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Big Boss: नाक पर मशीन लगाकर सोते दिखे अमाल मलिक? बिग बॉस में खुला उनकी बीमारी का राज

Thu, 28 Aug 2025 09:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अमाल मलिक को स्लीप एपनिया की शिकायत - फोटो : freepik.com
Amal Malik Health: मशहूर टीवी रियलिटी शो बिग बॉस का सीजन 19 शुरू हो चुका है। इसमें अपने-अपने फील्ड के कई नामी लोगों ने शिरकत की है। शो में गायक अमाल मलिक भी शामिल हुए हैं। एक रात उन्हें सोते समय नाक पर कोई मशीन लगाए हुए कैमरे ने कैद किया। इस क्लिप के बाद खूब चर्चा होने लगी कि आखिर ये क्या चीज थी?

शो के दौरान अन्य प्रतिभागियों से बातचीत के दौरान अमाल ने अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में बताया कि वह डिप्रेशन का शिकार रह चुके हैं और अब भी स्लीप एपनिया नामक बीमारी से पीड़ित हैं। इसी वजह से सोते समय वह सीपीएपी नामक एक उपकरण का इस्तेमाल करते हैं ताकि वह अच्छी नींद ले सकें और स्लीप एपनिया के कारण होने वाली अन्य समस्याओं से बच सकें।

अब आपके मन में भी सवाल होगा कि आखिर ये स्लीप एपनिया कौन सी बीमारी है, इसमें क्या दिक्कतें होती हैं और सीपीएपी मशीन से इसमें कैसे आराम पाया जाता है? आइए इन सबके बारे में विस्तार से समझते हैं।
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स्लीप एप्निया के बारे में जानिए - फोटो : Adobe Stock
पहले जानिए कि स्लीप एपनिया क्या है?

स्लीप एपनिया एक गंभीर स्लीपिंग डिसऑर्डर है जिसमें सोते समय अक्सर कुछ सेकेंड्स के लिए सांस बंद हो जाती है। यदि आप जोर-जोर से खर्राटे लेते हैं या पूरी रात की नींद के बाद भी आपको थकान महसूस होती रहती हैं, तो इसे स्लीप एपनिया का संकेत माना जा सकता है। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की समस्या लोगों में अधिक देखी जाती है।

नींद के दौरान बार-बार सांस रुकना इसका लक्षण है। कई बार ये रुकावट कुछ सेकंड से लेकर 30 सेकंड से ज्यादा भी हो सकती है और ये रात भर में कई बार हो सकता है। इससे नींद टूटती है और शरीर को पूरा आराम नहीं मिलता।  

इसके दो मुख्य प्रकार हैं- ऑब्सट्रक्टिव (गले की मांसपेशियों से संबंधित) और सेंट्रल (दिमाग से सांस नियंत्रित करने में समस्या)। स्लीप एपनिया के गंभीर मामलों में ऑक्सीजन कम हो जाती है और दिल-दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है।
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स्लीप एप्निया में होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
स्लीप एपनिया के लक्षणों के बारे में जानिए

स्लीप एपनिया नींद से संबंधित एक खतरनाक विकार है जिसके बारे में जानकारी रखते हुए सभी लोगों को सावधानी बरतते रहना चाहिए। यदि आपको भी इसके लक्षण महसूस हो रहे हैं तो समय पर डॉक्टर से मिलकर इलाज जरूर प्राप्त करें। इन लक्षणों में से दो से अधिक समस्याओं का अनुभव होते रहना स्लीप एपनिया हो सकता है। 
  • जोर से खर्राटे लेना।
  • नींद के दौरान अचानक सांस बंद होने की समस्या, यह अक्सर दूसरे लोग ही देख पाते हैं। 
  • नींद के दौरान हांफना
  • सुबह उठने के साथ अक्सर मुंह का सूखा रहना। 
  • सुबह अत्यधिक सिरदर्द बना रहना।
  • सोने में कठिनाई (अनिद्रा)
  • दिन में बहुत नींद आना (हाइपरसोमनिया) 

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स्लीप एप्निया में सीपीएपी मशीन का इस्तेमाल - फोटो : Adobe Stock
सीपीएपी मशीन क्या है जिसका इस्तेमाल करते हैं अमाल

कंटीन्युअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर यानी सीपीएपी मशीन एक मास्क और ट्यूब वाली होती है। जब कोई व्यक्ति इसे पहनकर सोता है, तो मशीन धीरे-धीरे हल्का दबाव बनाकर हवा गले तक भेजती है। इस दबाव से गले की नली खुली रहती है और नींद में सांस रुकने की समस्या नहीं होती।

स्लीप एपनिया में सबसे बड़ी परेशानी यही होती है कि सोते समय गले की मांसपेशियां ढीली होकर रास्ता बंद कर देती हैं और सांस रुक जाती है। ये मशीन उस रास्ते को खुला रखती है जिससे सांस लेने में कोई कठिनाई न हो या सांस रुकने न पाए। यह मशीन आपके गले की नली को दबने से बचाती है और आपको पूरी रात आराम से सांस लेने देती है।
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नींद की समस्याओं से कैसे राहत पाएं? - फोटो : Freepik.com
क्यों जरूरी है इसका इस्तेमाल?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, स्लीप एपनिया के मरीजों को डॉक्टर सीपीएपी का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं, इससे कई फायदे होते हैं। सबसे पहले तो नींद गहरी आती है और सुबह उठते ही थकान नहीं रहती। इसके अलावा इसका इस्तेमाल करने पर ब्लड प्रेशर और दिल पर पड़ने वाला बोझ भी घट सकता है, जिसका खतरा इस रोग के शिकार मरीजों में अधिक देखा जाता रहा है। 

हालांकि शुरुआत में कुछ लोगों को मास्क पहनने में अजीब लगता है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी आदत पड़ जाती है। सही साइज का मास्क और सही दबाव डॉक्टर या विशेषज्ञ तय करते हैं। मशीन की साफ-सफाई भी जरूरी है ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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