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Alopecia: बाल झड़ने की बीमारी एलोपेशिया के लक्षण, इलाज के साथ काउंसलिंग भी दे सकती है राहत

Sun, 03 Apr 2022 04:39 PM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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काउंसलिंग से एलोपेशिया में राहत - फोटो : Istock
डॉ. राजन गांधी
फिजिशियन
अनुभव- 25 साल

Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi


किसी भी बीमारी के संदर्भ में शारीरिक इलाज के अलावा जो बाl सबसे ज्यादा मायने रखती है वह है मरीज को मानसिक रूप से मजबूत बनाना। हाल ही में ऑस्कर अवार्ड के समारोह के दौरान हॉलीवुड अभिनेता विल स्मिथ की प्रतिक्रिया बहुत चर्चा में रही। विल स्मिथ की पत्नी एलोपेशिया नामक बीमारी से जूझ रही हैं और कार्यक्रम के होस्ट ने इसी बात पर उनका मजाक बना डाला। उक्त कार्यक्रम में जो हुआ वह नहीं होना चाहिए था। लेकिन बाकी तमाम टिप्पणियों के अलावा इस बारे में विल स्मिथ ने जो बात कही उसपर विचार होना भी जरूरी है। विल ने इसी आयोजन में पुरस्कार पाने के बाद सार्वजनिक रूप से कहा- जोक्स कहना हमारे काम और जीवन का हिस्सा हैं। लेकिन मेरी पत्नी की बीमारी पर किया गया जोक असहनीय था। ऐसा इसलिए कि किसी भी बीमारी के दौरान, उपचार लेते हुए मरीज के साथ-साथ उसका परिवार भी मानसिक विचलन, डर और अस्थिरता के दौर से गुजरता है। ऐसे में अगर बीमारी फिजिकल अपीयरेंस से जुड़ी हो तो चिंता और बढ़ जाती है। सेलिब्रिटीज के मामले में ही नहीं किसी आम व्यक्ति के लिए भी इससे बाहर निकालने बड़ी चुनौती होती है। जानें एलोपेशिया के बारे में, इलाद के साथ काउंसलिंग क्यों हैं जरूरी?
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एलोपेशिया क्या है - फोटो : iStock
क्या है एलोपेशिया ? 

ऑस्कर के इस चर्चे के बाद इस बीमारी का नाम और भी वायरल हो गया। एलोपेशिया अरेटा जो कि इसका पूरा नाम है, असल मे एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर होता है। इसमें मरीज के सिर के बाल ही नहीं, बल्कि शरीर में किसी भी जगह के बाल झड़ सकते हैं। ये बाल गुच्छों के रूप में भी बाहर निकल सकते हैं। ऐसे में बालों के झड़ने वाली जगह पर एक पैच सा बन जाता है। कई लोगों में बाल दोबारा उगते हैं तो फिर झड़ जाते हैं जबकि कुछ लोगों में बाल स्थाई रूप से आ भी सकते हैं। इस बीमारी के कई प्रकार हैं जिनमें सबसे आम है एलोपेशिया अरेटा।
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एलोपेशिया के लक्षण - फोटो : iStock
एलोपेशिया के लक्षण:

हालांकि इस बीमारी के लक्षण हर मरीज में अलग अलग हो सकते हैं। लेकिन आमतौर पर बालो का बिना किसी तकलीफ गुच्छों में झड़ना सामने आता है। इसकी वजह से उस जगह पर पैचेस यानी खाली जगह जैसे धब्बे बन जाते हैं। कम समय में ही तेजी से बाल झड़ते हैं। ठंडे मौसम में बालों के झड़ने की क्रिया और बढ़ जाती है। साथ ही हाथ और पैरों की उंगलियों के नाखून भुरभुरे, लाल और धंसे हुए हो जाते हैं। बालों की जगह बने हुए ये स्किन पैचेज सफेद और मुलायम होते हैं लेकिन कई बार इनमे गुदगुदाहट, खुजली या जलन हो सकती है।

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एलोपेशिया का प्रभाव - फोटो : iStock
मन की सेहत पर असर:

इस बीमारी का असर मन पर इसलिए भी ज्यादा हो सकती है क्योंकि यह बाहरी सौंदर्य या व्यक्तित्व से जुड़ी होती है। खासकर महिलाओं के मामले में यह स्थिति और भी खराब हो सकती है क्योंकि उनपर सामाजिक रूप से भी कई बार दबाव होता है कि वे अच्छी दिखें। ऐसे में बालों का इस तरह झड़ना उनके लिए अवसाद, तनाव, चिड़चिड़ाहट, एंग्जायटी आदि पैदा कर सकता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि मरीज को मानसिक सम्बल मिले।
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एलोपेशिया का इलाज - फोटो : iStock
इलाज और काउंसलिंग:

एलोपेशिया के इलाज के लिए सबसे पहले किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ या डर्मेटोलॉजिस्ट के पास जाकर सलाह लेना जरूरी होती है। डॉक्टर आपके लक्षणों को देखकर, बालों और नाखूनों की जांच करके बीमारी के स्तर का पता लगाते हैं। इसके अलावा खून की जांच व अन्य टेस्ट के लिए भी सलाह दी जा सकती है। रेयर स्थितियों में बायोप्सी की जरूरत भी हो सकती है। इलाज के लिए कई तरीके अपनाए जा सकते हैं जो बीमारी की स्थिति पर निर्भर करते हैं। हालांकि ये बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती लेकिन इलाज हो सकता है और बाल फिर से उग भी सकते हैं।
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एलोपेशिया का इलाज - फोटो : pixabay
एलोपेशिया के इलाज की कुछ प्रक्रियाएं

* कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स

* टॉपिकल इम्यूनोथेरेपी

* मिनोक्सीडिल

* विभिन्न प्रकार की दवाइयां
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काउंसलिंग से एलोपेशिया में राहत - फोटो : istock
एलोपेशिया की घरेलू देखभाल व काउंसलिंग:

-विग, हेयर एक्सटेंशन, हैट और स्कार्फ जैसी चीजों का उपयोग क्रिएटिव तरीके से करके आप अपने लुक को नया बना सकते हैं। साथ ही इससे सूरज की तेज किरणों और धूल- धुएं के हानिकारक कणों से सिर को भी बचाया भी जा सकता है।

-स्ट्रेस को कम करने के लिए किसी सकारात्मक गतिविधि से जुड़ें, मेडिटेशन या ध्यान करें और निरन्तर खुद को कहें आपका लुक अस्थाई है लेकिन आपके गुण स्थाई हैं और यही आपकी असली पहचान हैं।

-शुरुआत में खुद के नए स्वरूप को स्वीकारने में थोड़ी मुश्किल होगी लेकिन अपने आत्मविश्वास को बरकरार रखें। यदि आपको लगता है कि आपको काउंसिलिंग या प्रोफेशनल हेल्प की जरूरत है तो उसकी मदद लें।

-प्रोफेशनल काउंसिलिंग के सेशंस मरीज को सामाजिक भय, निराशा, खुद के प्रति उदासीनता आदि से बाहर लाने में मदद करते हैं।
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काउंसलिंग से एलोपेशिया में राहत - फोटो : istock
-यह याद रखें कि आपकी खराब मानसिक स्थिति और स्ट्रेस इस समस्या को ट्रिगर कर सकती है।

-परिवार की सहायता इस समस्या से उबरने में बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे मरीज को आत्मविश्वास वापस पाने, स्ट्रेस और एंग्जायटी से बाहर आने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा स्पोर्ट ग्रुप्स भी इस मामले बहुत मददगार हो सकते हैं।

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नोट: डॉ. राजन गांधी अत्याधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में  डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह आईसीएचएच से वह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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