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CoronaVirus Vaccine की पूरी अपडेट, किस वैक्सीन की कितनी डोज तैयार होगी, क्या होगी कीमत?

Sun, 23 Aug 2020 10:57 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Vaccine Update: कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : iStock/Amar Ujala
दुनियाभर में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इसकी वैक्सीन को लेकर भी कई देशों से अच्छी खबरें सामने आ रही हैं। पहली वैक्सीन बनाने के रूस के दावे के अलावा भारत, ब्रिटेन, जर्मनी, अमेरिका आदि देश भी वैक्सीन बनाने के काफी करीब हैं। कोरोना की वैक्सीन अभी बाजार में आई नहीं है, लेकिन अलग-अलग देशों की सरकारों ने, फार्मा कंपनियों ने और सहयोगी संस्थाओं के बीच इतने करार, साझेदारियां हो गई हैं, जो दुनिया की साढ़े सात अरब आबादी के टीकाकरण के काफी होंगीं। दुनियाभर में कौन सी वैक्सीन का कितना उत्पादन होगा, उनकी कीमत क्या होगी और लोगों तक यह कैसे पहुंचेगी.... आइए यहां हम इन तमाम बिंदुओं पर चर्चा करते हैं। 
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Corona Vaccine Update - फोटो : Amar Ujala
  • बात शुरू की जाए वैक्सीन की प्रगति को लेकर, तो तमाम सवालों और विवादों के बीच रूस ने दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन बना लेने का दावा किया है, तो वहीं दूसरी ओर चीन का कहना है कि उसने रूस से पहले वैक्सीन का पंजीकरण कराया है। अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना करीब 30 हजार लोगों पर तीसरे फेज का ट्रायल करने जा रही है। फाइजर कंपनी के वैक्सीन की भी यही स्थिति है। वहीं, जॉनसन एंड जॉनसन ने 60 हजार लोगों पर तीसरे फेज के ट्रायल की घोषणा की है। 
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Coronavirus Vaccine - फोटो : Amar Ujala
  • भारत में देसी वैक्सीन COVAXIN का पहले चरण का ह्यूमन ट्रायल पूरा हो गया है और अगले चरण के ट्रायल की तैयारी चल रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, वैक्सीन इसी साल के अंत तक उपलब्ध होगी। एक और भारतीय कंपनी जायडस कैडिला की वैक्सीन भी दूसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल में है। वहीं दूसरी ओर अग्रणी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को कोविशील्ड के नाम से लॉन्च करने की तैयारी में है।

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Corona Vaccine Update - फोटो : अमर उजाला
  • कोरोना की वैक्सीन अभी भले ही लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है, लेकिन देश-दुनिया की दिग्गज कंपनियों ने वैक्सीन के इतने करार कर लिए हैं कि वैक्सीन दुनियाभर के लोगों के टीकाकरण के लिए पर्याप्त साबित होगी। मॉडर्ना, जीएसके, फाइजर, एस्ट्राजेनेका और रूस के गामेलया इंस्टीट्यूट ने बड़े करार किए हैं।
  • वहीं, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च पर वैक्सीन बना रही भारतीय कंपनी सीरम इंडिया को गेट्स फाउंडेशन की संस्था गावी(GAVI) 150 मिलियन डॉलर का फंड उपलब्ध कराएगी। इसके तहत तैयार वैक्सीन भारत और अन्य आर्थिक रूप से पिछड़े देशों के लिए होगी। 
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
ग्लोबल स्टेटहेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार,
  • छह माह से भी कम समय में कई बड़ी कंपनियों के वैक्सीन की कामयाबी के दावे किए हैं। कई कंपनियों के ट्रायल अंतिम चरणों में हैं। वैक्सीन पाने की रेस ऐसी है कि 33 करोड़ की आबादी वाले अमेरिका ने ऑपरेशन वॉर्प स्पीड के तहत करीब पांच कंपनियों से दो अरब खुराक का करार कर लिया है। वहीं दूसरी ओर 6.5 करोड़ आबादी वाला देश ब्रिटेन अपने लिए 25 करोड़ खुराक सुनिश्चित कर चुका है।
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Coronavirus Vaccine Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
  • कुछ दिन पूर्व आई एक रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई थी कि वैक्सीन बनते ही अमीर देश इसका बड़ा हिस्सा हड़प कर जाएंगे और गरीब देशों को वैक्सीन पाने के लिए एक-दो साल और इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैक्सीन तैयार होने से लेकर इसके वितरण तक की निगरानी करने की बात कही है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका ने दुनिया भर में ढाई अरब खुराक के उत्पादन और बिक्री का करार कर लिया है। इसमें एक अरब खुराक का समझौता पुणे स्थित भारतीय कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट से भी हुआ है। सीरम कंपनी 40 करोड़ खुराक इसी साल उपलब्ध कराएगी। 

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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : पिक्सा
  • लैटिन अमेरिका के सर्वाधिक प्रभावित ब्राजील और मेक्सिको के साथ बीते बुधवार को करार हुआ है, जिसके तहत एस्ट्राजेनेका उन्हें वैक्सीन की क्रमश: 15 करोड़ और 25 करोड़ खुराक उपलब्ध कराएगी। वहीं अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना अमेरिका को 60 करोड़ खुराक देगी, जिसमें पहली 10 करोड़ खुराक के लिए अग्रिम डेढ़ अरब डॉलर का करार बुधवार को हुआ है।
आइए, अब बात करते हैं वैक्सीन के बड़े करार और कीमत के बारे में: 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

वैक्सीन के बड़े करार-

कंपनी वैक्सीन खुराक/डोज प्राप्तकर्ता देश
एस्ट्राजेनेका एजेडी-1222 250 करोड़ खुराक अमेरिका, भारत, लैटिन अमेरिका, यूरोप 
मॉडर्ना एमआरएनए 1273 100 करोड़ खुराक अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ
सिनोवैक कोरोनावैक 100 करोड़ खुराक चीन और अफ्रीकी देश
गामेलया(रूस) स्पूतनिक वी 100 करोड़ खुराक रूस व 20 अन्य देश
फाइजर व बायोनटेक बीएनटी162बी2 75 करोड़ खुराक अमेरिका, जापान और ब्रिटेन
जॉनसन एंड जॉनसन एडी26 40 करोड़ खुराक अमेरिका
सनोफी और जीएसके आरवैक्सीन 10 करोड़ खुराक ब्रिटेन

गरीब देशों के लिए सीपी और गावी अलायंस ने भी करार किया है।

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Coronavirus Vaccine - फोटो : Pixabay/Amar Ujala

वैक्सीन की डोज और अनुमानित कीमत 

मॉडर्ना 50 से 60 डॉलर में दो डोज ( 3700 से 4500 रुपये) 
फाइजर (अमेरिका में) 39 डॉलर में दो डोज  (2730 रुपये) 
फाइजर 6 से 8 डॉलर में दो डोज ( 420 से 560 रुपये ) 
जॉनसन एंड जॉनसन 10 डॉलर ( 750 रुपये ) 
गावी एलाएंस (अमीर देशों के लिए) 40 डॉलर ( 2800 रुपये ) 
बदलाव संभव*
 
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीरम कंपनी द्वारा तैयार कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत 225 रुपये के करीब होगी। यह कीमत भारत के अलावा अन्य गरीब देशों के लिए लागू होगी। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
सालों की जगह महीनों में तैयार हो रही वैक्सीन
  • वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी बीमारी के लिए वैक्सीन बनाने में सालों लग जाते हैं। पहले शोध फिर प्री क्लीनिकल ट्रायल, फिर अलग-अलग चरणों के क्लीनिकल ट्रायल... फिर मंजूरी के बाद उत्पादन और वितरण तक की प्रक्रिया में 10-20 साल या ज्यादा भी लग जाते हैं। लेकिन कोरोना वायरस का टीका महज कुछ महीनों में ही कामयाबी के नजदीक पहुंच चुका है। 

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पहला टीका (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
पहला टीका बनाने में लगे 28 साल
  • ब्रिटिश वैज्ञानिक एडवर्ड जेनर ने साल 1796 में चेचक की वैक्सीन बनाई, जो दुनिया का पहला टीका था। 28 साल की मेहनत के बाद यह सफलता मिल पाई। वहीं, साल 1885 में लुई पाश्चर ने रेबीज का टीका बनाया। 20वीं सदी की शुरुआत में टिटनेस, एंथ्रेक्स, कालरा, प्लेग, टायफाइड और टीबी के टीके बने।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
कई बीमारियों की वैक्सीन बनाने में सालों लग गए:
बीमारी वैक्सीन आने में लगा समय
चिकेन पॉक्स या चेचक 28 साल
फ्लूमिस्ट 28 साल
रोटा वायरस 15 साल
कोरोना वायरस 10-18 माह(अनुमानित)

साल 1976 से करीब 24 बार कहर ढा चुके इबोला की वैक्सीन 43 साल बाद 2019 दिसंबर में तैयार हो सकी। वहीं, कोरोना फैमिली के ही वायरस सार्स (2002), मर्स (2012) का टीका अबतक नहीं बन पाया है। 
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कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay
वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को फायदा
  • कोरोना की वैक्सीन में कामयाबी वैश्विक कंपनियों के लिए 50 से 70 अरब डॉलर का लाभ दे सकती है। मॉडर्ना, एस्ट्राजेनेका आदि कंपनियों की वैक्सीन के ट्रायल सफल होने के साथ ही शेयर छह से 26 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। वहीं, दूसरी ओर कोरोना का एंटीबॉडी घोल बना रही अमेरिकी कंपनी रेजेनरॉन के शेयर में तो फरवरी से 80 फीसदी उछाल आ चुका है। अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना का कारोबार भी जनवरी से तीन गुना बढ़कर 30 अरब डॉलर हो गया है। 
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