ऑल इंडिया ऑफ्थैल्मोलॉजिकल सोसायटी (एआईओएस) ने अपने 80वें वार्षिक सम्मेलन में 2025 तक भारत में रोकथाम योग्य दृष्टिहीनता को 50% तक कम करने के एक उल्लेखनीय संकल्प की घोषणा की है। रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता के मामले मोतियाबिंद, डायबिटिक आई डिजीज, विटामिन 'ए' की कमी और आघात सम्बंधी दृष्टिहीनता के कारण होते हैं। भारत में दृष्टिहीनों की सबसे बड़ी आबादी है। आकलन के मुताबिक हमारे देश में रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता के 12 मिलियन मामले हैं, जो समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण आंशिक या पूर्ण रूप से दृष्टिहीन हो सकते हैं।
ऑल इंडिया ऑफ्थैल्मोलॉजिकल सोसायटी (एआईओएस) की स्थापना वर्ष 1930 में हुई थी। सोसायटी के उद्देश्य हैं नेत्र-विज्ञान के अध्ययन और अभ्यास का संवर्धन और प्रचार, समाज को सेवा देने के विचार से शोध और मानव-क्षमता का विकास और देश के नेत्र-विशेषज्ञों के बीच सामाजिक संपर्कों को बढ़ावा देना। सोसायटी देश के विभिन्न भागों में वार्षिक सम्मेलनों का आयोजन करती है।
दृष्टिहीनता रोकथाम का लक्ष्य
एआईओएस के प्रेसिडेंट (2022-23) डॉ. ललित वर्मा ने सम्मेलन में कहा, "रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता से निपटने के लिए मजबूत प्रतिबद्धता चाहिए, क्योंकि यह लोगों के जीवन की गुणवत्ता को प्रत्यक्ष और नाटकीय रूप से प्रभावित करती है। यह व्यक्ति की आर्थिक गतिविधि को भी प्रभावित करती है, जिससे पूरे देश की उत्पादकता प्रभावित होती है।
आयु बढ़ने के साथ होने वाले मोतियाबिंद की समस्या को तुलनात्मक सरलता के साथ हल किया जा सकता है। विटामिन 'ए' की कमी के कारण होने वाले नेत्र रोगों को ठीक करना भी बहुत आसान है। रोकथाम के योग्य दृष्टिहीनता को 2025 तक 50% कम करने का हमारा संकल्प एक राष्ट्रीय पहल बनने वाला है, क्योंकि इसमें हमारे सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रहेगी।