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Air Pollution: प्रदूषण के कारण आंखों में हो रही है जलन और खुजली? इन उपायों से पा सकते हैं आराम

Sun, 10 Nov 2024 06:56 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • आंखें हमारे शरीर की सबसे नाजुक अंग हैं।
  • आंखें बाहरी वातावरण के संपर्क में सबसे ज्यादा रहती हैं इसलिए इन्हें वायु प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील भी माना जाता है।
  • प्रदूषित हवा में रहने के कारण आंखों में लालिमा, जलन और खुजली की दिक्कत हो सकती है।
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आंखों की समस्या - फोटो : freepik.com
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर सहित कई राज्य इन दिनों वायु प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। हवा में बढ़ते प्रदूषक सांस के माध्यम से शरीर में पहुंचकर कई प्रकार की बीमारियों को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने के कारण सांस से संबंधित समस्याओं का जोखिम तो बढ़ता ही है साथ ही ये हृदय रोग, फेफड़ों में संक्रमण सहित कई अन्य प्रकार की समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। प्रदूषण के कारण प्रारंभिक स्थिति में आंखों में जलन, लालिमा और खुजली होने की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती रही है। 

आंखें हमारे शरीर की सबसे नाजुक अंग हैं। चूंकि ये बाहरी वातावरण के संपर्क में सबसे ज्यादा रहती हैं इसलिए इन्हें वायु प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील भी माना जाता है। यही कारण है कि कुछ लोगों को थोड़े समय भी प्रदूषित हवा में रहने के कारण लालिमा या जलन की एहसास हो सकता है।

अगर आप भी प्रदूषित वातावरण में रहते हैं और आंखों की समस्याओं का अनुभव कर रहे हैं तो आइए जानते हैं कि इसमें कैसे आराम पाया जा सकता है?
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वायु प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe stock
प्रदूषण का आंखों पर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दिल्ली और आस-पास के इलाकों में जहरीले वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याओं को लेकर किए गए कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि एनसीआर में हवा की गुणवत्ता सेहत के लिए एक दिन में चालीस सिगरेट पीने जितनी खराब है।

हमारी आंखें पर्यावरण में मौजूद हानिकारक रसायनों के सबसे अधिक सीधे संपर्क में आती हैं। प्रदूषण और स्मॉग के कारण आंखों में एलर्जी और आंखों को क्षति होने का भी खतरा रहता है।
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आंखों में जलन और लालिमा - फोटो : Freepik.com
आंखों में होने वाली समस्याएं

वायु प्रदूषण/धुंध के कारण आंखों में कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। इसमें आंखों से पानी आना, जलन होना, दर्द और लालिमा, सूजन की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती हैं। प्रदूषण के कारण ड्राई आइज होने का खतरा भी काफी बढ़ सकता है जिसमें आंखों में सूखापन, किरकिरापन या ऐसा महसूस हो सकता है जैसे आंख में कोई कण पड़ा हो। इसी तरह आंखों में एलर्जी के कारण खुजली, लालिमा, आंखों से पानी आने, पलकों में सूजन, धुंधला दिखने और संक्रमण का जोखिम भी बढ़ जाता है।

अगर आपको भी ये दिक्कतें हो रही हैं तो कुछ आसान से उपाय करके लाभ पा सकते हैं।

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आंखों की देखभाल - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टर कहते हैं, सबसे जरूरी है कि आंखों को हानिकारक प्रदूषकों के संपर्क में आने से बचाना होगा। जिन दिनों प्रदूषण का स्तर अधिक होता है उसमें विशेष सावधानी बरतें। घर के अंदर रहें, खासकर सुबह के समय जब प्रदूषण का स्तर अपने चरम पर होता है। यदि आपको बाहर निकलना पड़ता है, तो सुरक्षात्मक चश्मा पहनें जिससे आंखों को प्रदूषकों के सीधे संपर्क में आने से बचाया जा सके। जिन लोगों को पहले से ही आंखों से संबंधित कोई दिक्कत है उन्हें और भी अलर्ट रहना चाहिए।
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आंखों को कैसे स्वस्थ रखें? - फोटो : Freepik.com
आंखों में हो रही हों दिक्कतें तो क्या करें?

आंखों में किसी भी तरह की दिक्कत होने की स्थिति में कुछ उपाय कर सकते हैं।
  • अपने हाथों को बार-बार धोएं और आंखों को छूने से बचें।
  • शरीर को हाइड्रेटेड रखें, यह पर्याप्त आंसू बनाने में मदद करेगा। ऐसा करके ड्राई आइज की समस्या से बचा जा सकता है। 
  • आंखों में जलन या खुजली होने पर इसे रगड़ें नहीं। साफ पानी से आंखों को धोएं। 
  • ज्यादा दिक्कत होने पर किसी डॉक्टर की सलाह पर आई ड्रॉप का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • मोबाइल फोन और लैपटॉप या किसी स्क्रीन वाली डिवाइस के अत्यधिक उपयोग से बचें, इससे भी ड्राई आइज का खतरा बढ़ सकता है। 
  • बाहर जाते समय धूप का चश्मा पहनें जो आंखों को कवर करती हों।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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