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Air Pollution: प्रदूषण में रहने से क्या कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है? ये रिपोर्ट देखकर हैरान रह जाएंगे आप

Sun, 26 Oct 2025 12:18 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में वायु प्रदूषण अपने चरम पर है, कई जगहों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स लगभग 400 तक पहुंच चुका है। ऐसे में बहुत से लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या ये प्रदूषण कैंसर के खतरों को भी बढ़ाता है, आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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फेफड़े का कैंसर - फोटो : Adobe Stock
Air Pollution Cancer: इन दिनों वायु प्रदूषण अपने चरम पर है। देश के कई बड़े हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार जा चुका है, और दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में यह लगभग 400 तक पहुंच गया है। बहुत से लोगों को लगता है कि यह जहरीली हवा केवल सांस लेने में और हृदय रोगों तक सीमित है, लेकिन ये प्रदूषण कैंसर के जोखिम को भी कई गुना बढ़ा देता है। हम सभी जानते हैं कि धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जिस क्षेत्र का एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 से अधिक हो, वहां सांस लेना रोजाना कई सिगरेट पीने जितना खतरनाक होता है। स्टडी के मुताबिक से पता चलता है कि वायु प्रदूषण में मौजूद अति सूक्ष्म कण PM2.5 फेफड़ों की कोशिकाओं में गहराई तक प्रवेश कर रहे हैं, जिससे उनमें जेनेटिक म्यूटेशन हो रहा है और कैंसर का खतरा उत्पन्न हो रहा है।

कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली जैसे प्रदूषित शहरों में धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी फेफड़ों के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसके लिए सीधे तौर पर वायु प्रदूषण को जिम्मेदार ठहराया गया है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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फेफड़े का कैंसर - फोटो : Adobe Stock
 दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संस्थाओं में से एक इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने साफ कहा है कि बाहर की गंदी हवा और उसमें मौजूद बारीक धूल के कण (PM कण) अब कैंसर पैदा करने वाली चीजें हैं। इसका सीधा मतलब है कि इस दूषित हवा में सांस लेना कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है।

इसके अलावा कनाडियन कैंसर सोसायटी की रिपोर्ट के मुताबिक फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण भले ही धूम्रपान हो, लेकिन अब यह कहना गलत नहीं होगा कि बाहर का वायु प्रदूषण भी इस जानलेवा बीमारी का खतरा बहुत बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आप जितनी देर प्रदूषित हवा के संपर्क में रहेंगे, फेफड़ों का कैंसर होने का जोखिम उतना ही अधिक होगा।

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फेफड़े का कैंसर - फोटो : Adobe Stock
हैरान करने वाली बात यह है कि खतरा सिर्फ बाहर की हवा से नहीं है, बल्कि घर के अंदर का प्रदूषण भी उतना ही खतरनाक है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि घरों के अंदर मौजूद रेडॉन गैस फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कारण बन सकती है। इसलिए हमें बाहर और घर के अंदर, दोनों जगह हवा को शुद्ध रखना जरूरी है।
 
इसी के साथ एक बहुत हैरान करने वाली खबर सामने आई है कि दिल्ली में पुरुषों को कैंसर होने के मामले बाकी बड़े शहरों से सबसे ज्यादा हैं। इन कैंसरों में भी फेफड़ों का कैंसर सबसे आगे है। विशेषज्ञों के मुताबकि इसका सबसे बड़ा कारण यहां की खराब होती हवा ही है।

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फेफड़े का कैंसर - फोटो : Adobe Stock
जब हम PM2.5 जैसे बेहद महीन प्रदूषण कणों में सांस लेते हैं, तो वे हमारे फेफड़ों में पहुंचकर अंदरूनी चोट पहुंचाते हैं। अगर यह सूजन लंबे समय तक बनी रहती है, तो फेफड़ों की कोशिकाएं बिगड़ना शुरू कर देती हैं, जिससे फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। 

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फेफड़े - फोटो : Freepik.com
प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से बचाव बहुत जरूरी है। सबसे पहले जब भी AQI खराब हो, घर के अंदर रहें और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें हवा को साफ रखें। बाहर निकलने पर N95 या N99 मास्क जरूर पहनें, क्योंकि ये PM2.5 जैसे महीन कणों को फिल्टर करते हैं। अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए पौष्टिक आहार लें और खूब पानी पिएं। इसके अलावा जागरूक रहें और समय-समय पर सरकार द्वारा जारी किए नियमों का पालन करें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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