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Health Tips: एम्स दिल्ली के डॉक्टर ने बताया प्रदूषण में जरूर बरतें ये सावधानियां, कम होगा बीमारियों का खतरा

Tue, 16 Dec 2025 06:24 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

AIIMS Doctor Advice For Pollution: दिल्ली-NCR में इन दिनों प्रदूषण अपने चरम पर है, और इसका असर अब लोगों पर देखने को मिल रहा है। एम्स के डॉक्टर ने बताया है कि अस्पताल में फेफड़े से जुड़ी मरीजों की संख्या बढ़ गई है। उन्होंने प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
Air Pollution Health Precautions: दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई बड़े शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में बना हुआ है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। यह प्रदूषित हवा न केवल फेफड़ों, बल्कि आंखों, त्वचा और हृदय को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। इस खतरनाक स्थिति के मद्देनजर, एम्स दिल्ली के डॉ. सौरभ मित्तल ने लोगों के लिए कुछ अति-आवश्यक सावधानियां बरतने का सुझाव दिया है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।

डॉ. मित्तल ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण के अधिक स्तर के दौरान, श्वसन संबंधी बीमारियों और हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए, हर नागरिक को इन सरल लेकिन प्रभावी उपायों को सख्ती से अपनाना चाहिए ताकि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम किया जा सके और अस्पताल जाने की नौबत न आए। ये उपाय विशेष रूप से बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकते हैं।
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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
घर से बाहर निकलने से बचें
डॉ. मित्तल की पहली और सबसे महत्त्वपूर्ण सलाह है कि अगर बेहद जरूरी न हो तो घर से बाहर निकलने से पूरी तरह बचें। प्रदूषण के चरम स्तर के दौरान घर के अंदर रहना सबसे सुरक्षित है। बाहर की हवा में PM 2.5 और अन्य विषैले कणों की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो फेफड़ों में गहराई तक जाकर गंभीर क्षति पहुंचा सकते हैं।

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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe stock
बाहर निकलें तो N95 मास्क जरूर पहनें
अगर किसी कारणवश घर से बाहर निकलना अनिवार्य हो, तो अच्छी गुणवत्ता वालाN95 मास्क जरूर पहनें। साधारण कपड़े या सर्जिकल मास्क प्रदूषक कणों को नहीं रोक पाते। N95 मास्क, महीन कणों को फिल्टर करके सांस की नली में जाने से रोकता है, जिससे प्रदूषण के सीधे दुष्प्रभाव से काफी हद तक बचाव होता है।

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अस्थमा - फोटो : Freepik.com
अस्थमा COPD मरीज इनहेलर साथ रखें
इस स्तिथि में अस्थमा  या COPD (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के मरीज को सतर्क रहने की जरूरत है। प्रदूषण के कण कभी भी उनके बीमारी को ट्रिगर कर सकते हैं, जिससे सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो सकती है। ऐसे मरीजों को चाहिए कि वे अपना इनहेलर हर समय अपने साथ रखें और डॉक्टर के संपर्क में रहें।
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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें
घर के अंदर की हवा को साफ रखने के लिए, डॉ. मित्तल ने एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने का सुझाव दिया है। यह उपकरण बंद कमरों में भी प्रदूषण के कणों को फिल्टर करके हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है, जिससे घर के अंदर रहने वालों को स्वच्छ हवा मिलती है और बीमारियों का खतरा कम होता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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