फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Brain Fog: कोरोना से ठीक होने के बाद ब्रेन फॉग की समस्या से जूझ रहे हैं लोग, जानें इसके लक्षण और कारण

Sat, 31 Oct 2020 06:56 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना से ठीक होने के बावजूद मरीजों की दिक्कतें पूरी तरह खत्म नहीं हो रही है। मरीजों में पोस्ट कोविड या लॉन्ग कोविड की समस्या दिख रही है। कोरोना संक्रमित और उससे उबरे मरीजों में कोविड कॉम्प्लिकेशन दिख रहे हैं। पोस्ट कोविड की स्थिति में मरीजों में दो महीने बाद तक भी थकान, मांसपेशियों में दर्द, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं बनी रह रही हैं। देश के कई हिस्सों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मरीजों को ब्रेन हैमरेज या पैरालिसिस तक की शिकायतें भी हुई हैं। कोरोना से उबरने के बाद मरीजों को न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें भी हो रही हैं। बहुत सारे ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें मरीजों का दिमाग भी ठीक से काम नहीं कर पा रहा। 
विज्ञापन

2 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने के बाद मरीजों को कई तरह की समस्याएं हो रही हैं। इनमें दिमाग से जुड़ी परेशानियां भी शामिल हैं। दिमाग से जुड़ी दिक्कतों को चिकित्सक ब्रेन फॉग (Brain Fog) यानी दिमाग का धुंधला होना मान रहे हैं। हालांकि यह परेशानी कुछ दिनों तक रहेगी या हमेशा के लिए, इसके बारे में अभी नहीं कहा जा सकता है। 
विज्ञापन

3 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
चिकित्सकों का मानना है कि कोरोना संक्रमण के दौरा ब्लड क्लॉट (Blood Clot) यानी नसों में खून के थक्के जमना इसका कारण हो सकती है। कोरोना संक्रमण होने पर शुरुआत में फेफड़ों और गले में सूजन आती है और संक्रमित होने के कुछ दिनों के अंदर मरीज का ब्लड गाढ़ा होने लगता है। ऐसा वायरस की प्रवृत्ति के कारण होता है, जिसका मरीजों को पता नहीं चल पाता। रक्त वाहिकाओं में खून का थक्का जमने से दिक्कतें शुरू हो जाती है।

4 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. स्मृति मंदाना के मुताबिक, ब्लड क्लॉटिंग यानी खून का थक्का जमने की समस्या दिमाग की नसों में हो सकती है। कोरोना संक्रमण के दौरान ब्रेन की ओर जाने वाली रक्त वाहिकाओं में खून का थक्का जमने से दिमाग के उस हिस्से में ब्लड की सप्लाई नहीं हो पाती। ऐसे में दिमाग का वह हिस्सा काम करना बंद कर सकता है, जिससे मरीज को पैरालिसिस भी हो सकता है। इस स्थिति को ब्रेन इंफार्क्ट भी कहा जाता है। 
विज्ञापन

5 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर
ब्रेन फॉग के लक्षण
  • सिर में दर्द रहना
  • किसी चीज पर फोकस नहीं कर पाना
  • किसी काम में ध्यान केंद्रित नहीं रहना
  • सोचने और समझने की शक्ति कमजोर होना
विज्ञापन

6 of 7
Meditation
ऐसी समस्याओं के लिए कुछ खास तरह के अभ्यास की सलाह दी जाती है
  • ब्रेन एक्सरसाइज और योग
  • मेडिटेशन यानी ध्यान
  • ताजी हवा का सेवन
  • ज्यादा पानी पीना
  • ब्रेन गेम जैसे पजल हल करना, शतरंज खेलना वगैरह 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मालूम हो कि कोविड संक्रमण होने पर कोरोना वायरस केवल फेफड़ाें पर ही अटैक नहीं करता, बल्कि शरीर के दूसरे अंगों को भी संक्रमित करता है। यह किडनी, हार्ट, लिवर संबंधी दिक्कतें भी पैदा करता है। कोरोना संक्रमण के कारण कई मरीजों में को मिर्गी भी आने लगती है, जो कई दिनों बाद ठीक होती है। ऐसे कई मरीज कोरोना से उबरने के बाद भी इलाज करा रहे हैं। आईसीएमआर यानी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने कोविड एडवाइजरी में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, किडनी, हार्ट, ब्रेन डिजीज के मरीजों को उच्च जोखिम वर्ग में रखा है। 

(नोट: कोरोना से उबरने के बाद किसी तरह की दिक्कत महसूस हो रही हो तो विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना ज्यादा श्रेयस्कर है। किसी भी तरह की लापरवाही से दिक्कत बढ़ सकती है।)
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें