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कोरोना अलर्ट: एक दो नहीं 25 हजार साल पहले से ये वायरस इंसानों को बना रहा अपना शिकार, अध्ययन में खुलासा

Tue, 27 Apr 2021 01:09 PM IST
प्रकाश चंद जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना वायरस, जिसकी चर्चा इन दिनों तर तरफ है। ये वायरस लोगों को अपना शिकार बना रहा है, और कई लोगों की तो जान तक ले रहा है। ऐसे में हर कोई परेशान है, लोग डरे हुए हैं और उनका डरना स्वाभाविक भी है। वहीं, अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी से भी लोग काफी परेशान है। हर कोई बस यही दुआ कर रहा है कि ये कठिन समय जल्द से जल्द बीत जाए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये कोरोना वायरस आज से धरती पर नहीं है। ये वायरस लगभग 25 हजार साल पहले से इंसानों को परेशान कर रहा है, लेकिन ऐसा हम नहीं बल्कि ऐसा एक अध्ययन कह रहा है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में।
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दुनिया में कोरोना - फोटो : पिक्साबे
दरअसल, इस अध्ययन को यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के असिस्टेंट प्रोफेसर डेविड एनार्ड ने किया है और उनका ये अध्ययन bioRxiv में प्रकाशित हुआ। हालांकि, इसका अब तक पीयर रिव्यू नहीं हुआ है और साइंस जर्नल में इसके प्रकाशन के लिए रिव्यू किया जा रहा है। प्रोफेसर डेविड ने कहा कि, ये हर समय एक ऐसा वायरस रहा है, जिसने लोगों का बीमार किया और मारा भी है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डेविड ने बताया कि, इंसानों की तरह ही वायरस भी पीढ़ी दर पीढ़ी अपने नए जीनोम के जरिए आगे बढ़ते रहे हैं। महज वायरस ही नहीं बल्कि ये प्रक्रिया हर प्रकार के पैथोजेन यानी रोगजनकों के साथ होती है। इसका मतलब है कि हर प्रकार के रोगाणुं अपनी पीढ़ियों में लगातार बदलाव करते हैं, ताकि वो भी प्रकृति में सर्वाइव कर सकें।

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कोरोना की जांच के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : अमर उजाला
प्रोफेसर डेविड ने बताया कि उनकी टीम ने प्राचीन कोरोना वायरस को खोजने के लिए विश्वभर के 26 अलग-अलग इंसानी आबादी के 2504 लोगों के जीनोम की जांच की। इस जांच में जो सामने आया वो बेहद चौंकाने वाला था। इसमें पता चला कि कोरोना वायरस जैसे पैथोजेन इंसानों के डीएनए में प्राकृतिक चयन करके पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते आए हैं।
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कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों ने जब जांच की तो पता चला कि कोरोना वायरस इंसान के शरीर में 420 प्रकार के प्रोटीन से संपर्क करता है, जिसमें से 332 प्रोटीन सीधे कोरोना खुद इंटरैक्ट करते हैं। वहीं, उनका मानना है कि इस अध्ययन से इस बात में मदद मिलेगी कि भविश्य में किस तरह के वायरस आ सकते हैं और ये किस तरह के लोगों को संक्रमित करेगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
वहीं, पूर्वी एशिया की इंसानी आबादी वाले लोगों में ऐसे जींस मिले हैं, जिनका संपर्क प्राचीन कोरोना वायरस से हुआ था। यही नहीं, इसका प्रमाण उनके शरीर में अब भी मौजूद है। दुनियाभर में कई ऐसे कोरोना वायरस हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी ज्यादा बार बाहर निकले और लोगों को बीमार किया।
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कोरोना का नया स्वरूप - फोटो : pixabay
इसमें होने वाले म्यूटेशन की वजह से पूर्वी एशिया के लोगों की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो गई। ऐसा इसलिए क्योंकि वो ज्यादा बार कोरोना की चपेट में आए और उनके शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनती चली गई।
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corona cases of jammu kashmir - फोटो : अमर उजाला
प्रोफेसर डेविड की टीम ने देखा कि कोरोना वायरस से संपर्क में आने वाले इंसान के शरीर के 420 प्रोटीन के 42 कोड्स होते हैं और ये कोड्स 25 हजार साल पहले से लेकर पांच हजार साल पहले तक लगातार खुद को म्यूटेट और इवॉल्व करते रहे। इसका मतलब आप कह सकते हैं कि कोरोना वायरस काफी पहले से लोगों को अपनी चपेट में लेता आ रहा है।

स्रोत और संदर्भ:
https://www.biorxiv.org/content/10.1101/2020.11.16.385401v2

अस्वीकरण नोट: यह लेख bioRxiv में प्रकाशित लेख के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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