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कोविड-19: कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद इतने दिनों तक न कराएं ऑपरेशन, अध्ययन में सामने आई ये बड़ी वजह

Thu, 11 Mar 2021 01:59 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
कोरोना वायरस महामारी लंबे समय से हमारे बीच है, और आए दिन इसकी चपेट में काफी संख्या में लोग आ रहे हैं। हालांकि, देश में टीकाकरण जारी है, लेकिन इस बीच कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या लगातार सामने आ रही है, जो लोगों को काफी डरा रही है। लेकिन इस बीच कोरोना वायरस को लेकर एक अध्ययन में चौंकाने वाली बात सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि अगर कोई कोरोना वायरस से संक्रमित होने के छह सप्ताह के बीच में ऑपरेशन करवाता है, तो उसकी मौत का खतरा लगभग ढाई से तीन गुना तक बढ़ जाता है। तो चलिए जानते हैं इस अध्ययन के बारे में।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दरअसल, एक नए ग्लोबल अध्ययन में ये बात सामने आई है। इसमें कहा गया है कि कोरोना का शिकार हुए व्यक्ति को किसी भी ऑपरेशन करवाने से कम से कम सात सप्ताह तक बचना चाहिए। शोधकर्ताओं के इस निषकर्ष को एनेस्थीसिया में प्रकाशित किया गया है। इसमें शोधकर्ताओं ने अक्टूबर 2020 के दौरान 116 देशों में वैकल्पिक या फिर आपातकालीन सर्जरी से गुजरने वाले एक लाख 40 हजार 231 मरीजों के एक समूह का अध्ययन किया। जिन लोगों को ऑपरेशन से पहले कोरोना नहीं था, और जिन्हें ऑपरेशन से पहले कोरोना था, इन दोनों मरीजों की तुलना की गई है।
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कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay
अध्ययन के शुरुआती नतीजों में मरीज के ऑपरेशन के 30 दिन के अंदर उसकी मृत्यु की संभावना को आंका गया है। इसमें पाया गया कि जिन लोगों को कोरोना वायरस नहीं था और उन्होंने 30 दिन के अंदर ऑपरेशन करवाया, तो उनके मरने की संभावना 1.5 फीसदी थी। जबकि जो लोग कोरोना से संक्रमित थे, और जिसने शून्य से दो सप्ताह के अंदर ऑपरेशन करवाया उनके मरने की संभावना चार फीसदी, तीन से चार सप्ताह के अंदर ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों के मरने की संभावना चार फीसदी, पांच से छह सप्ताह के अंदर ऑपरेशन करने वालों में 3.6 फीसदी और सात से आठ सप्ताह के अंदर ऑपरेशन करने वाले मरीजों की मौत का खतरा 1.5 फीसदी था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस अध्ययन में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के 31 डॉक्टर्स ने भाग लिया। ये अध्ययन के जो निष्कर्ष दिए गए वे सभी आयु, समूह, मरीजों की हालत, सर्जरी की अर्जेंसी और किस तरह की सर्जरी है आदि के अनुसार थे। वहीं, इसमें जिन मरीजों को शामिल किया गया था। उसमें बाल चिकित्सा सर्जरी, आर्थोपेडिक्स, सर्जरी, कार्डियक एनेस्थीसिया, न्यूरोसर्जरी, न्यूरोएनेस्थेसिया और कार्डियोथोरेसिक सर्जरी के मरीज शामिल थे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस अध्ययन में कहा गया कि ज्यादा रिस्क और कम रिस्क वाले उम्र समूह पर जो ये शोध किया गया, उसमें ये बात सामने आई कि अगर कोई व्यक्ति कोरोना वायरस महामारी से संक्रमित होता है, तो कम से कम सात सप्ताह के बाद ही उसकी कोई सर्जरी होनी चाहिए। क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया जाता है और इस समय से पहले कोरोना हुए व्यक्ति की कोई सर्जरी की जाती है, तो इससे उसकी मौत का खतरा काफी बढ़ जाता है।
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