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World No Tobacco Day: 46% युवाओं ने छोड़ दिए तंबाकू उत्पाद, 12 घंटे में ही शरीर में दिखने लगते हैं ऐसे बदलाव

Fri, 31 May 2024 07:27 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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धूम्रपान से फेफड़ों को खतरा - फोटो : istock
धूम्रपान को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है, ये फेफड़ों के कैंसर से लेकर हृदय रोग, धमनियों की बीमारी सहित कई प्रकार की गंभीर और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारक प्रमुख कारक है। अध्ययनकर्ता बताते हैं, नियमित रूप से धूम्रपान करने वाले लोगों में कई तरह की क्रोनिक बीमारियों का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। हालांकि अगर आप धूम्रपान छोड़ देते हैं तो इसके कारण होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

तंबाकू उत्पादों और धूम्रपान के कारण होने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लोगों को जागरूक करने और तंबाकू छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हर साल 31 मई को वर्ल्ड नो टोबाको डे मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को इस खतरनाक आदत से बचाव करते रहना चाहिए।

इसी से संबधित एक हालिया रिपोर्ट में बड़ी जानकारी सामने आ रही है। वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट (वीपीसीआई) द्वारा साझा की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 18-24 वर्ष की आयु के लगभग 46.96 प्रतिशत युवा वयस्कों ने तंबाकू छोड़ दिया है।
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धूम्रपान - फोटो : Amar ujala
लाखों लोगों ने छोड़ दिया धूम्रपान

नेशनल टोबाको क्विटलाइन सर्विसेज (एनटीक्यूएलएस) द्वारा प्राप्त कॉल के डेटा सर्वेक्षण के आधार पर ये निष्कर्ष निकाला गया है। एनटीक्यूएलएस डेटा पर आधारित वीपीसीआई सर्वेक्षण के मुताबिक  मई 2016 और अप्रैल 2024 के बीच टोबाको क्विटलाइन ने करीब 4,77,585 रजिस्टर्ड फोन कॉल प्राप्त किए जिनमें से 1.44 लाख लोगों ने बताया कि उन्होंने तंबाकू उत्पादों से दूरी बना ली है। ज्यादातर लोगों की उम्र 18-24 वर्ष के बीच थी और अधिकतर 12वीं कक्षा तक के छात्र थे। 
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धूम्रपान से होने वाली समस्याएं - फोटो : freepik.com
उत्तर प्रदेश शीर्ष पर

आंकड़ों से पता चलता है कि तंबाकू उत्पादों को छोड़ने में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर रहा है। यहां से 1.50 लाख (31.6 प्रतिशत) कॉल आए जिसमें से करीब 29.68 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने धूम्रपान छोड़ दिया है। इसके अलावा, 72.96 प्रतिशत कॉल व्यक्तियों से की गई जो 1-10 वर्षों से तम्बाकू का सेवन कर रहे थे।

वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. राज कुमार कहते हैं, एनटीक्यूएलएस देशभर में तम्बाकू सेवन करने वाले लोग, जो इसे छोड़ने चाहते हैं उन्हें निःशुल्क, गोपनीय परामर्श और मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिससे वह अपनी सेहत को ठीक रखने में मदद प्राप्त कर सकें। 

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धूम्रपान - फोटो : freepik.com
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

डॉ. राज कुमार कहते हैं, तंबाकू छोड़ना सिर्फ इच्छाशक्ति की बात नहीं है। हम उन मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक कारकों पर ध्यान देते हैं जो इस लत के लिए जिम्मेदार हैं और जिनको नियंत्रित करके तंबाकू छोड़ने में मदद मिल सकती है। अध्ययनकर्ता बताते हैं, तंबाकू छोड़ने की शुरुआत आपके बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में काफी मददगार हो सकता है। तंबाकू छोड़ने के 12 घंटे के भीतर ही आपके शरीर में बदलाव महसूस होने शुरू हो जाते हैं। 
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धूम्रपान छोड़ने के फायदे - फोटो : istock
धूम्रपान छोड़ने से शरीर में होने वाला बदलाव

अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान के बिना सिर्फ 12 घंटे बिताने के बाद से ही शरीर अतिरिक्त कार्बन मोनोऑक्साइड को बाहर निकालना शुरू कर देता है। कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर सामान्य होने पर शरीर में ऑक्सीजन का स्तर भी बढ़ने लगता है। लगभग 2 सप्ताह के बाद रक्त संचार में सुधार होने लगता है। हृदय और मांसपेशियों में रक्त का संचार ठीक हो जाता है साथ ही फेफड़ों की कार्यक्षमता में भी सुधार होने लगता है।

एक महीने तक धूम्रपान छोड़ने से खांसी और सांस लेने में तकलीफ कम हो जाती है। वहीं एक साल तक धूम्रपान न करने से दिल का दौरा पड़ने और कोरोनरी हृदय रोग का खतरा धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों की तुलना में आधा हो जाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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