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Coronavirus Research में अनुमान, कोरोना से दिसंबर तक 12 लाख बच्चों और 57 हजार मांओं की जा सकती है जान

Sat, 04 Jul 2020 04:31 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों का आंकड़ा हर दिन बढ़ता जा रहा है। वहीं, इसकी वजह से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। कोरोना महामारी के इस संकट काल में दुनियाभर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिस वजह से सामान्य मरीजों को भी इलाज में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर अमेरिका की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक शोध अध्ययन किया है, जिसके परिणाम चौंकाते भी हैं और डर भी पैदा करते हैं। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इस साल के अंत यानी दिसंबर तक 12 लाख बच्चों और 57 हजार मांओं की मौत हो सकती है। 
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कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मास्क पहनना जरूरी है(File Photo) - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं का दावा है कि कोरोना महामारी के इस संकट काल में जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं न मिलने और खाने के कमी के कारण ढाई लाख शिशुओं की जान जा सकती है। वहीं, गरीब देशों की 10 हजार से अधिक मांओं के लिए जुलाई से दिसंबर तक ये छह महीने चुनौती भरे होंगे। इस दौरान उनकी जान पर संकट रह सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, अगर हालात और अधिक बिगड़े तो साल के अंत तक 118 देशों में 12 लाख बच्चों और 57 हजार मांओं की मौत हो सकती है। 
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • शोधकर्ताओं का यह अध्ययन द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित हुआ है। इस शोध अध्ययन में शोधकर्ताओं ने आंकड़ों के विश्लेषण से यह जानने की कोशिश की है कि आहार और स्वास्थ्य सिस्टम पर कोरोना का कितना असर पड़ा है और इसके दुष्प्रभाव से कितने लोगों की मौत होने की संभावना है। 

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कोरोना वायरस का संक्रमण काल(File Photo) - फोटो : PTI
महिलाओं में मौत के खतरे 
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना महामारी काल में बच्चों को जन्म देने वाली मांओं के लिए सुरक्षित माहौल की कमी तो है ही, कई देशों में तो उन्हें पर्याप्त एंटीबायोटिक भी नहीं मिल पा रहे हैं। इस संकट से उन मांओं की मौत का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा है। 
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कोरोना वायरस का संक्रमण काल(File Photo) - फोटो : PTI
बच्चों में मौत के खतरे 
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस महामारी काल में बच्चों में पोषक तत्वों की कमी पूरी करने और निमोनिया-सेप्सिस से बचाने के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटीबायोटिक्स उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। बच्चों में मौत के खतरे का यह एक बड़ा कारण है। शोधकर्ताओं का कहना है कि डायरिया से पीड़ित बच्चों के लिए रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन की कमी भी इसकी वजह बन सकती है। 
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : social media
  • न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अन्य शोध अध्ययन के मुताबिक, कोरोना से जूझने वाले लगभग सभी बच्चे पेट की समस्या से जूझ रहे थे। अध्ययन में शामिल 171 बच्चों  में से 80 फीसदी को हृदय से जुड़ी समस्याएं थी। उन बच्चों को एक हफ्ते के लिए आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था। इनमें से चार की मौत हो गई थी। 
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बच्चे की थर्मल स्क्रीनिंग करते कर्मचारी(File Photo) - फोटो : अमर उजाला
कोरोना पीड़ित चार में से तीन बच्चे बीमारी से अंजान 
  • कोरोना संक्रमित 75 फीसदी बच्चे बीमारी के बारे में अंजान हैं। यानी हर चार में से तीन बच्चों को उनकी बीमारी के बारे में जानकारी नहीं है। ऐसे मामले इस जोखिम को और भी ज्यादा बढ़ा सकते हैं। शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि नीति निर्धारक इन आंकड़ों पर गंभीरता से ध्यान देंगे ओर जरूरी सुविधाओं के लिए दिशानिर्देश जारी करेंगे। 
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