आभूषण हमेशा से श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। एक समय वह भी था जब महिलाएं केवल फूलों या लकड़ी, पत्थर आदि जैसे प्राकृतिक संसाधनों से बने गहने पहना करती थीं। फिर धीरे धीरे इनकी जगह कीमती धातुओं जैसे सोना, चांदी आदि ने लेना शुरु किया। समय के साथ आभूषणों को पहनने का तरीका और पसंद में भी बदलाव आया। नाक-कान छिदवाना या पियर्सिंग करवाना एक सामान्य प्रक्रिया रही है। यह नवजात शिशुओं के एक संस्कार के रूप में भी अपनाया जाता है और शौकिया रूप में स्त्री-पुरुष दोनों वयस्कों द्वारा भी। कई बार कान की पियर्सिंग करवाने के बाद एक छोटा घाव सा बन जाता है जिसके लिए ज्यादातर गर्म तेल और हल्दी लगाने की सलाह दी जाती है, लेकिन पर्याप्त ध्यान न दिए जाने पर यह घाव गंभीर रूप भी ले सकता है।
स्किन का अधिक संवेदनशील होना, शरीर में किसी प्रकार की समस्या का मौजूद होना जिसकी वजह से घाव को ठीक होने में समय लगे या किसी प्रकार के संक्रमण की चपेट में आ जाना, ये वे कुछ कारण हैं जो कान के इस घाव को और खराब कर सकते हैं। इसलिए इन कुछ बातों का रखें ध्यान जब करवाएं इयर पियर्सिंग।