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Bhimrao Ambedkar Jayanti 2019: जानिए बाबा साहेब की 5 बड़ी रोचक बातें

Sun, 14 Apr 2019 01:37 PM IST
प्रशांत राय लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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14 अप्रैल को डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई जाती है। रविवार को बाबा साहेब की जयंती पर पूरे देश के साथ-साथ अन्य देशों में भी लोग उन्हें याद कर रहे हैं। बाबा साहेब के नाम से मशहूर डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न मिल चुका है। उनका पूरा जीवन संघर्षरत रहा। इसी कारण अंबेडकर जयंती भारत में समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसलिए हम आपको डॉ. भीमराव अंबेडकर की जिंदगी से जुड़ी बातें बताने जा रहे हैं। 
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डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के छोटे से गांव महू में हुआ था। जबि उनका परिवार मूल रूप से रत्नागिरी जिले के आंबडवे गांव से था। उनके पिताजी का नाम रामजी मालोजी सकपाल और मां का नाम भीमाबाई था। महार जाति के होने के कारण भीमराव अंबेडकर के साथ भेदभाव किया जाता था। 
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अंबेडकर बचपन से ही तेज दिमाग के थे। लेकिन छुआछूत के चलते उन्हें अपनी प्रांरभिक पढ़ाई करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। भीमराव अंबेडकर मुंबई की एल्फिंस्टन रोड पर मौजूद गवर्नमेंट स्कूल के पहले अछूत चात्र बने। साल 1913 में अमेरिका के कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए भीमराव अंबेडकर का चयन किया गया। साल 1916 में डॉ. भीमराव अंबेडकर को शोध के लिए सम्मानित भी किया गया। 

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स्कॉलरशिप खत्म होने के चलते अंबेडकर को पढ़ाई छोड़कर लंदन से वापस आना पड़ा। फिर वे मुंबई के सिडनेम कॉलेज में प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त हुए। साल 1923 में उन्होंने The Problem Of The Rupee नाम से अपना शोध पूरा किया और लंदन यूनिवर्सिटी ने उन्हें डॉक्टर्स ऑफ साइंस की उपाधि दी। साल 1927 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें पीएचडी दी। 
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उन्होंने दलित समुदाय के लिए एक ऐसी अलग राजनैतिक पहचान की वाकलत की। साल 1932 में ब्रिटिश सरकार ने अंबेडकर की पृथक निर्वाचिका के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। हालांकि इसके विरोध में महात्मा गांधी ने आमरण अनशन करना शुरू कर दिया। इसके बाद अंबेडकर ने अपनी मांग वापस ले ली। 
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अंबेडकर ने 1936 में लेबर पार्टी का गठन किया। उन्हें संविधान की मसौदा समिति का अध्यक्ष बनाया गया। भारत की आजादी के बाद उन्हें कानून मंत्री बनाया गया।  अंबेडकर ने 1952 में बॉम्बे नॉर्थ सीट से देश का पहला आम चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। वह बार राज्यसभा से दो बार सांसद रहे। 6 दिसंबर, 1956 को अंबेडकर की मृत्यु हो गई। 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिया गया।
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