फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhagat Singh Birth Anniversary: चार्ली चैपलिन की फिल्मों के शौकीन थे भगत सिंह, रसगुल्ले के थे दीवाने

Sun, 27 Sep 2020 01:12 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
Bhagat Singh - फोटो : Amar Ujala
भारत की आजादी की लड़ाई में शहीद भगत सिंह का नाम सुनहरे अक्षरों से लिखा गया है। उन्हें राष्ट्रवादी आंदोलन के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों में से एक माना जाता है। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को अविभाजित भारत में लायलपुर जिले के बंगा में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनका पैतृक गांव खट्कड़ कलां है जो पंजाब(भारत) में है। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह अपने क्रांतिकारी साथियों सुखदेव और राजगुरु के साथ हंसते-हंसते फांसी पर झूल गए और महज 23 साल की उम्र में उन्होंने देश के लिए प्राण न्यौछावर कर दिया। उनके जीवन के बारे में आपने किताबों और फिल्मों के जरिए बहुत कुछ जाना होगा। लेकिन आज हम जानेंगे उनके जीवन से जुड़े कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में: 
विज्ञापन

2 of 6
चार्ली चैपलिन की फिल्म का एक दृश्य - फोटो : Youtube Grab
चार्ली चैपलिन की फिल्में थी पसंद
  • युवाओं को फिल्में देखना तो पसंद होता ही है। फिल्मों के जरिए वे प्रेरित भी होते हैं। भगत सिंह को भी फिल्में देखने का बहुत शौक था। चार्ली चैपलिन की फिल्में उन्हें खूब पसंद थी। अपना खर्च निकालने के बाद उनके पास जो पैसे बचते थे, उनसे वे चार्ली चैपलिन की फिल्में देखते थे। 
विज्ञापन

3 of 6
रसगुल्ले - फोटो : सोशल मीडिया
मीठे में रसगुल्ले के थे दीवाने
  • भगत सिंह खाने-पीने के भी शौकीन थे। मीठे में उन्हें सबसे ज्यादा रसगुल्ला पसंद था। जब भी उन्हें रसगुल्ला खाने का मन होता तो वो अपने साथ अपने दोस्तों को भी ले जाया करते थे। 

4 of 6
भगत सिंह
लांग शूज
  • भगत सिंह को लांग शूज(जूते) पहनने का बेहद शौक था। वो एक बेहद खुशदिल युवा थे जिनके शौक दूसरे युवाओं जैसे ही थे। अमृतसर के म्यूजियम में आज भी उनके लांग शूज रखे हुए हैं। 
विज्ञापन

5 of 6
भगत सिंह
परिवार पर भी देते थे जान
  • क्रांतिकारियों के बारे में अक्सर लोगों की धारणा होती है कि उन्हें परिवार से इतर देश से प्यार होता है। लेकिन भगत सिंह देश के साथ परिवार से भी उतना ही प्यार करते थे। उनकी फांसी की खबर सुनते ही उनकी मां ने गुरुद्वारे में पाठ करवाया। इस बारे में जब भगत सिंह को मालूम हुआ तो उन्होंने अपनी मां से इसके बारे में बात की। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
भगत सिंह - फोटो : अमर उजाला
कितनी सच साबित हुई भविष्यवाणी?
  • हर माता- पिता अपने बच्चे के भविष्य के बारे में जानने की ख्वाहिश रखते हैं। भगत सिंह के माता-पिता की भी ऐसी ही इच्छा थी, जिसके चलते उन्होंने अपने बेटे की कुंडली एक पंडित को दिखाई। पंडित ने भगत सिंह के माता पिता को बताया कि इस बच्चे का खूब नाम होगा। यह बच्चा बहुत ऊंचे पद पर जाएगा और इसके गले में एक सम्मानित चीज भी पहनाई जाएगी। 23 मार्च 1931 को जब उन्हें फांसी दी गई तो फांसी का फंदा भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी के लिए फक्र की ही बात थी। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें