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अहोई अष्टमी के व्रत में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, नाराज हो सकती हैं मां गौरी

Fri, 25 Oct 2019 05:11 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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अहोई अष्टमी
करवा चौथ के 4 दिन बाद कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत माताएं संतान के सुख और आयु वृद्धि की कामना हेतु रखती हैं। इस व्रत में मां गौरी की पूजा अर्चना करने का विधान है। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार माता पार्वती संतान की रक्षा करने वाली हैं। इस व्रत में तारों को अर्ध्य दिया जाता है और उसके बाद ही व्रत तोड़ा जाता है। लेकिन इस व्रत से जुड़े कुछ नियम भी हैं, जिनका पालन जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि इन नियमों का पालन न करने से मां अहोई नाराज हो सकती हैं। आइए जानते हैं इन नियमों के बारे में...
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अहोई व्रत के दौरान पूजा शुरू करने से पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी की पूजा जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि किसी भी पूजा का विशेष फल तभी मिलता है जब भगवान गणेश जी का नाम लेकर पूजा की शुरुआत की जाए।
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अहोई व्रत का भोजन बनाते समय भोजन में प्याज, लहसुन, तेल आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए। साथ ही कई लोग करवाचौथ की पूजा के दौरान इस्तेमाल हुए करवे को अहोई पूजा में प्रयोग करते हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

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इस व्रत के दौरान पूजा करते समय भूल से भी कांसे के लोटे का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस दिन कांसे के बर्तन को शुभ नहीं माना जाता है।
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अहोई व्रत में व्रती को भूलकर भी गहरे नीले और काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
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अहोई व्रत को कर रही महिला को दिन में नहीं सोना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के दौरान दिन में सोने से संतान की उम्र क्षीण होती है।
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