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कहीं होती है लट्ठ मार होली, तो कहीं ऐसे बरसते हैं रंग, देश में अलग-अलग तरह से मनाई जाती है होली

Thu, 21 Mar 2019 06:18 AM IST
मोना नारंग लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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holi - फोटो : Amarujala
भारत को पूरी दुनिया में विविधताओं का देश कहा जाता है। यहां जगह बदलते ही बोली, वेश-भूषा व खान-पान सबकुछ बदल जाता है। यहां एक ही त्योहार को मनाने का अंदाज अलग है। होली भी एक ऐसा त्योहार है जिसे हर राज्य में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। आइए जानते हैं किन राज्यों में किस तरह मनाई जाती है विशेष होली। 
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mp holi
मध्य प्रदेश के मालवा अंचल में मनाया जाने वाला भगोरिया उत्सव भी होली का ही एक रूप है। भगोरिया मध्य प्रदेश के मालवा अंचल के आदिवासी इलाकों में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। भगोरिया के वक्त सभी क्षेत्र को हाट बाजार मेले का रूप दे दिया जाता है। भगोरिया हाट बाजारों में भील समाज के युवक-युवती तैयार होकर अपने जीवनसाथी को खोजने आते हैं। 
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mp holi
इस मेले के दौरान लड़का लड़की को पान खिलाता है अगर लड़की पान खा लेती है तो यानी की लड़की की हां है और लड़का-लड़की दोनों आपस में शादी कर लेते हैं। यदि लड़की के गाल पर लड़का गुलाबी रंग लगाता है और बदले में लड़की भी लड़के को रंग लगा देती है तो रिश्ता तय माना जाता 

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kumawani holi
उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल की सरोवर नगरी नैनीताल और अल्मोड़ा जिले में होली के अवसर पर बैठकी का आयोजन किया जाता है। यहां होली से काफी पहले ही मस्ती और रंग छाने लगता है। यहां बैठकी होली और खड़ी होली गाने की शास्त्रीय परंपरा है। इन गीतों में मीराबाई से लेकर नजीर और बहादुर शाह जफर की रचनाएं सुनने को मिल जाती हैं। 
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bengali holi
बंगाल में होली से एक दिन पहले यहां दोल जात्रा निकाली जाती है। इस खास मौके पर महिलाएं लाल किनारी पारंपरिक सफेद साड़ी पहन कर शंख बजाकर राधा-कृष्ष की पूजा करती हैं। दोल शब्द का अर्थ झूला होता है। इसमें बाजे के साथ-साथ कीर्तन और गीत गाए जाते हैं। 
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goa holi
गोवा के स्थानीय लोग होली को कोंकणी में शिमगो या शिमगोत्सव कहते हैं। वो इस मौके पर वसंत का स्वागत करने के लिए रंग खेलते हैं। इसके बाद खाने में तीखी मुर्ग या मटन की करी खाते हैं जिसे शगोटी कहा जाता है। मिठाई भी खाई जाती है। इस कार्यक्रम में नाटक और संगीत होता है, जिनका विषय साहित्यिक, सांस्कृतिक और पौराणिक होता है। गोवा में शिमगोत्सव की सबसे खास बात यह है कि पंजिम का विशालकाय जलूस, जो होली पर निकाला जाता है। 
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barsana holi
होली के मौके पर बरसाने की लट्ठमार होली पूरे विश्व में प्रचलित है। बरसाने की लट्ठमार होली फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है। इस दिन नंद गांव के ग्वाल-बाल होली खेलने के लिए राधा के गांव बरसाने जाते हैं और बरसाना गांव के लोग नंद गांव में जाते हैं। इन पुरुषों को होरियारे कहा जाता है। जब नाचते हुए लोग गांव में पहुंचते हैं तो औरतें हाथ में ली हुई लाठियों से उन्हें पीटना शुरू कर देती हैं।  
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holi - फोटो : अमर उजाला
छत्तीसगढ़ में होली को होरी के नाम से जाना जाता है। इस पर्व पर लोक गीत गाई जाती है। वसंत ऋतु के आते ही गली-गली में नगाड़े की थाप के साथ राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंग भरे गीत लोग गाने लगेत हैं। किसानों के घरों में होली से पहले ही नियमित रूप से हर दिन पकवान बनने की परंपरा शुरू हो जाती है, जिसे तेलई चढ़ना कहते हैं। छत्तीसगढ में लड़कियां विवाह के बाद पहली होली अपने माता-पिता के गांव में ही मनाती है एवं होली के बाद अपने पति के गांव में जाती हैं। 
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