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Leadership: सच्चा नेतृत्व पद से नहीं, फैसलों से तय होता है; टीम को सही दिशा देने वाला ही है असली लीडर

Thu, 16 Oct 2025 04:24 PM IST
शाहीन परवीन डैरेन वॉकर, द न्यूयॉर्क टाइम्स

सार

Team Guidance: सच्चा नेतृत्व पद या अधिकार से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में लिए गए फैसलों और टीम को सही दिशा देने की क्षमता से पहचाना जाता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
Leadership: आज नेतृत्व करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई लीडर ऐसे वातावरण में काम करने पर मजबूर हो गए हैं, जहां दबाव, डर और गलत प्रोत्साहन उन्हें कमजोर या हतोत्साहित कर देते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि वे अपने और संगठन के उद्देश्यों को पूरी क्षमता से हासिल नहीं कर पाते। यही कारण है कि नियोक्ता ऐसे पेशेवरों को ही लीडरशिप के लिए योग्य मानते हैं, जो विवादों से दूर रहते हैं, बजाय उनके जो विवादों को संभालने की क्षमता रखते हैं।

इसलिए, यह समझना बेहद जरूरी है कि सशक्त लीडर बनने का मतलब हमेशा बेबाक तरीके से बोलना नहीं, बल्कि सोच-समझकर, रणनीति के साथ बोलना और अपनी प्रतिष्ठा एवं सुरक्षा बनाए रखना भी है। नीचे कुछ प्रभावी तरीके बताए जा रहे हैं, जिनकी मदद से बतौर पेशेवर आप भी अपनी नेतृत्व क्षमता को सुरक्षित और प्रभावशाली तरीके से बढ़ा सकते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

समझदारी से निर्णय लें

कई लीडर्स अक्सर इस डर से परहेज करते हैं कि उन्हें जो सही लगता है अगर उन्होंने वह कह दिया, तो लोग उन्हें गलत समझ सकते हैं। उन्हें आरोप-प्रत्यारोप, बदला या आलोचना करने जैसी चिंताओं की समस्या सताने लगती है। 

इसलिए, आपको सोच-समझकर, रणनीति और समझदारी के साथ निर्णय लेना चाहिए, ताकि आपकी, संगठन की और टीम की भलाई सुनिश्चित हो सके। असली नेतृत्व साहस और समझदारी के बीच संतुलन बनाने में ही निहित है, जो आपके नेतृत्व को टिकाऊ और प्रभावी बनाता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

सार्वजनिक मंचों को सशक्त जरिया बनाएं

पहले लीडर्स सार्वजनिक मंचों का उपयोग लोगों के बीच संवाद और समझ बढ़ाने के लिए करते थे, ताकि मतभेदों के बावजूद समाज में संतुलन बना रहे। आज वही मंच अक्सर केवल विवाद उजागर करने तथा किसी एक पक्ष का समर्थन जताने के लिए इस्तेमाल होता है, जिससे विभाजन और गहरा जाता है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
बतौर लीडर आप इन मंचों का उपयोग लोगों को जोड़ने, सभी पक्षों की बात सुनने, मतभेदों को सुलझाने और संगठन या समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए कर सकते हैं। इन मंचों की मदद से न सिर्फ आप अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से पेश कर सकते हैं, बल्कि दूसरों के नजरिये को समझकर बड़े और छोटे स्तर पर सोच को बदलने तथा सहयोग बढ़ाने की क्षमता भी विकसित कर सकते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

बारीक पहलुओं को समझें

आज के दौर में ऐसे लीडर्स की आवश्यकता है, जो जटिल परिस्थितियों और सूक्ष्म पहलुओं को समझने का साहस तथा नैतिक ताकत रखते हों। नेतृत्व की पहचान केवल पद या शक्ति से नहीं होती, बल्कि उसमें नैतिकता, समझदारी और गहरी संवेदनशीलता होनी चाहिए।

इसलिए, आपको अपने विचारों को व्यापक दृष्टिकोण के साथ साझा करने पर जोर देना चाहिए। इसके अलावा, आपसी समझ के पुल बनाएं और एकजुटता का संदेश फैलाएं, ताकि आगे बढ़ने का रास्ता सबके लिए खुल सके।
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