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एसएचओ अरशद की अंतिम विदाई पर रोया पूरा पुलिस विभाग, बेटे ने खाई कसम, अपनी बंदूक से लूंगा बदला

अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Updated Tue, 18 Jun 2019 12:40 AM IST
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शहीद पिता को श्रद्धांजलि देने अपनी बंदूक(खिलौना) लेकर पहुंचा बेटा - फोटो : बासित जरगर
जम्मू कश्मीर पुलिस के शहीद एसएचओ अरशद अहमद खान को सोमवार को सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर शहीद के पारिवारिक के सदस्यों के अलावा उनके दोस्तों और मौजूद सभी पुलिस अधिकारियों की आंखें छलक पड़ीं। दुर्भाग्यवश शहीद के बच्चों अबुहान और दामीन के सिर से फादर्स डे के दिन ही पिता का साया उठ गया।

 
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शहीद एसएचओ अरशद खान को अंतिम विदाई देते साथी पुलिसवालों के छलक पड़े आंसू - फोटो : बासित जरगर
श्रीनगर के डीपीएल में सोमवार को माहौल एकदम गमगीन रहा। जैसे ही श्रद्धांजलि देने के लिए शहीद एसएचओ अरशद का पार्थिव शरीर रखा गया कि वहां मौजूद लोग फूट-फूट कर रोने लगे। अपने पिता को श्रद्धांजलि देने पहुंचे शहीद का बेटा अबुहान खान (5) वहां पहुंचा तो जरूर था, लेकिन उसके चेहरे की मासूमियत से साफ  छलक रहा था कि वह कुछ नहीं समझ पा रहा कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। 

 

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शहीद एसएचओ अरशद खान को अंतिम विदाई देते अधिकारियों के छलक पड़े आंसू - फोटो : बासित जरगर
शहीद को सशस्त्र सलामी दी गई। फिर ‘वतन की राह पर वतन के नौजवां शहीद हो...’ की धुन बजाई गई। उसके बाद पुष्पांजलि अर्पित करने का सिलसिला हुआ हुआ। एसएसपी श्रीनगर हसीब ने मासूम अबुहान को अपनी गोद में लिया और पिता को सलामी दिलाई। इस दौरान एसएसपी भावुक हो उठे। वह फूट पड़े। केवल वे ही नहीं, बल्कि एसएसपी सेक्यूरिटी इम्तियाज हुसैन और अन्य अधिकारी भी फूट-फूट कर रोए। 

 

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शहीद एसएचओ अरशद खान को अंतिम विदाई देते अधिकारियों के छलक पड़े आंसू - फोटो : ANI
शहीद के मासूम बेटों को पता ही नहीं कि क्या हुआ...
शहीद के घर पर मातम पसरा हुआ था। लेकिन पांच वर्षीय अबुहान घर पर एक खिलौने वाली बंदूक लिए घूम रहा था। इसे देख ऐसा जरूर लग रहा था कि उसके दिल में भी पिता की तरह देश की रक्षा करने का जज्बा है। लेकिन मासूमियत से यह भी साफ था कि उसे कुछ भी पता नहीं किया उसे पिता अब कभी लौट कर नहीं आएगे। शहीद का छोटा बेटा दामीन (2) तो बिल्कुल ही कुछ नहीं जानता था कि हुआ क्या है। वह इधर-उधर जाता और अपने परिचितों को देख कर मुस्कुरा देता। बता दें कि शहीद के परिवार में उसके पिता मुश्ताक अहमद खान, मां महबूबा बेगम, पत्नी और दो बच्चे हैं।

 

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शहीद एसएचओ अरशद खान - फोटो : फाइल, अमर उजाला
2002 में एसआई के रूप में अर्शीद ने शुरू की थी नौकरी
शहीद एसएचओ अरशद 2002 में पुलिस में सब इंस्पेक्टर (एसआई) के तौर पर भर्ती हुए थे। 2013 में उन्हें पदोन्नति मिली। उन्होंने कई जगहों पर अपनी सेवाएं दीं। 2016 में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में पैदा हुए बवाल के चलते एसएचओ बीजबिहाड़ा में थे। जानकारी के अनुसार खान के पूर्वज पेशावर पाकिस्तान से थे। वह गत बुधवार को अनंतनाग में जैश के आतंकियों द्वारा किए गए आत्मघाती हमले में घायल हुए थे, जिसमें सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद हुए थे।

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शहीद एसएचओ अरशद खान को श्रद्धांजलि देते जवान - फोटो : एएनआई
1600 से अधिक पुलिस कर्मी दे चुके प्राणों की आहुति
शहीद एसएचओ अरशद को श्रद्धांजलि देने के लिए राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार, डीजीपी दिलबाग सिंह, एडीजीपी मुनीर खान, गृह सचिव शालीन काबरा, आईजीपी एसपी पाणि के अलावा अन्य कई अधिकारी पहुंचे थे। पत्रकारों से बात करते हुए के विजय कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर पुलिस ने अपार बलिदान दिया है। शांति बहाली के लिए 1600 से अधिक जम्मू कश्मीर पुलिस के एसपीओ और अन्य जवानों ने अपने प्राणों आहुति दी है।

कुमार ने कहा सीआरपीएफ, एसएसबी, आईटीबीपी, सेना, बीएसएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस किसी में भी कोई फर्क नहीं है। हम सब एक ही जिस्म के अंग हैं। समन्वय से काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अरशद हमले के 2-3 मिनट के भीतर ही अपने साथियों के बचाव के लिए पहुंचा। यह आपसी तालमेल का बड़ा उदाहरण है, जिसकी हम प्रशंसा करते हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में डीजी सीआरपीएफ की ओर से एक श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया था, जिसमें सभी सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह स्वयं दर्शाता है कि किस तरह का आपसी स्नेह और तालमेल है हमारे बीच। हमें इन पर गर्व है।
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