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फारूक अब्दुल्ला पर पीएसए लगते ही गुपकार रोड़ पर बढ़ी सुरक्षा व्यवस्था, देखिए हाल-ए-कश्मीर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर Updated Mon, 16 Sep 2019 05:39 PM IST
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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
घाटी से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से राज्य की मुख्यधारा के नेता नजरबंद हैं। वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक अब्दुल्ला पर पीएसए लगा दिया गया है। इसके साथ ही श्रीनगर की गुपकार रोड़ पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ी दी गई है। सियासी हलचलों से मसरूफ रहने वाली गुपकार रोड पर सन्नाटा पसरा है। इसी रोड पर राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती का घर है। फारूक और उमर के घर एक दूसरे के पास हैं लेकिन महबूबा मुफ्ती का घर करीब डेढ़ किलोमीटर आगे है। इसे फेयरव्यू के नाम से जाना जाता है।

आगे की स्लाइड में जानिए क्या है सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम(पीएसए) और देखिए तस्वीरें...
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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक अब्दुल्ला उस समय से नजरबंद हैं, जब पांच अगस्त को केंद्र ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्रशासित प्रदेश में बांट दिया था। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अब्दुल्ला पीएसए के तहत हिरासत में हैं। अब्दुल्ला पर रविवार को सख्त कानून लगाया गया।
 

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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को पूर्व मुख्यमंत्री को एक अदालत के सामने पेश करने वाली याचिका पर जवाब देने को कहा। 

 

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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
तमिलनाडु के एमडीएमके नेता वाइको की ओर से दायर याचिका में अब्दुल्ला को रिहा करने की मांग की गयी है ताकि वह चेन्नई में एक कार्यक्रम में हिस्सा ले सकें। चार दशकों से वाइको अब्दुल्ला के करीबी दोस्त माने जाते हैं ।

 

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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
अब्दुल्ला के बेटे व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को भी पांच अगस्त से हिरासत में रखा गया है।

 

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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत सुरक्षा कारणों को देखते हुए सरकार किसी भी व्यक्ति को दो साल तक नजरबंद कर सकती है। यह कानून साल 1978 में फारूक अब्दुल्ला के पिता शेख अब्दुल्ला द्वारा घाटी में लागू किया था। इस दौरान शेख अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री थे।

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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
तत्कालीन सरकार द्वारा इस कानून को लाने का मुख्य मकसद लकड़ी की तस्करी को रोकना बताया गया था।

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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
इसके तहत किसी इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के मद्देनजर वहां नागरिकों के आने-जाने पर पाबंदियां लगा दी जाती हैं।

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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
यह अधिनियम सरकार को अधिकार देता है कि वह ऐसे किसी भी व्यक्ति को, जोकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा हो, उसे हिरासत में ले सकती है।
 
 

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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
बता दें कि एमडीएमके के संस्थापक और राज्यसभा सांसद वाइको ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री व नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को रिहा करने के लिए बुधवार को उच्चतम न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी।
 
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