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तस्वीरें: जम्मू-कश्मीर के तीन बार सीएम रहे फारूक का घर ही बना अस्थाई जेल, आवास हुआ छावनी में तब्दील

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर Updated Mon, 16 Sep 2019 09:43 PM IST
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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद पिछले 41 दिनों से नजरबंद पूर्व मुख्यमंत्री तथा श्रीनगर से नेकां सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला को जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई रविवार रात को की गई। इसके बाद उनके गुपकार स्थित आवास को ही जेल घोषित कर दिया गया है। आस-पास के इलाकों में कंटीले तार लगा दिए गए हैं। फारूक जम्मू-कश्मीर के तीन बार मुख्यमंत्री रहे हैं। 

 
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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
फारूक को पीएसए के लोक व्यवस्था प्रावधान के तहत गिरफ्तार किया गया है जो अधिकारियों को किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे छह महीने तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है। पीएसए के तहत दो प्रावधान हैं-लोक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा को खतरा। लोक व्यवस्था वाले प्रावधान के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के छह महीने और दूसरे प्रावधान के तहत दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। 

 

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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
पूर्व मुख्यमंत्री को अदालत के समक्ष पेश करने का आग्रह करने वाली याचिका पर उच्चतम न्यायालय द्वारा सोमवार को केंद्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन से जवाब मांगने से एक दिन पहले अब्दुल्ला को पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया।

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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
याचिका एमडीएमके नेता वाइको ने दायर की थी। उन्होंने अब्दुल्ला की रिहाई की मांग की थी जिससे वह चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हो सकें। वाइको और अब्दुल्ला चार दशक से करीबी मित्र रहे हैं। पीएसए केवल जम्मू कश्मीर में लागू है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) है। फारूक अब्दुल्ला के बेटे एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती तथा अन्य कई नेता भी पांच अगस्त से हिरासत में हैं।

 

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गुपकार रोड़ पर तैनात सुरक्षा बल - फोटो : बासित जरगर
पीएसए को चुनौती देगी नेकां
नेशनल कांफ्रेंस पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की पीएसए के तहत गिरफ्तारी को चुनौती देने के लिए कानूनी रास्ता अपनाएगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद मोहम्मद अकबर लोन ने कहा कि केंद्र सरकार के पास पीएसए लगाने का कोई तर्क नहीं है, लेकिन यदि उन्होंने अब्दुल्ला के खिलाफ  पीएसए लगाया है तो हम क्या कर सकते हैं। हम केवल अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। हम संवैधानिक और कानूनी रास्ता अपनाएंगे। कहा कि सरकार का कदम दुर्भाग्यपूर्ण है और यह शर्म की बात है कि अब्दुल्ला के खिलाफ  यह कानून लगाया गया है। यदि यहां कोई ऐसा था जो भारत की बात करता था तो वह अब्दुल्ला थे। यदि किसी पर निशाना साधा गया तो वह अब्दुल्ला थे। आज भारत उनके साथ इस तरह से व्यवहार कर रहा है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
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