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उरी हमले की 19 शहादतों से याद आई अमावस की रात, 2 घंटे और 50 दुश्मनों की कहानी, पाक था घुटनों पर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Wed, 18 Sep 2019 04:13 PM IST
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सर्जिकल स्ट्राइक - फोटो : फाइल, अमर उजाला
अमावस की रात, दो घंटे का समय, 125 कमांडो और 50 आतंकी ढेर। भारत मां के वीर सपूतों ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। साल 2016 में 28-29 सितंबर की रात को हिंदुस्तान ने इस सर्जिकल स्ट्राइक से दुनिया को बता दिया था कि वो दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारने की कूवत रखता है।
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भारतीय सेना - फोटो : फाइल, अमर उजाला
ये ऑपरेशन इतना सीक्रेट था कि इसकी जानकारी सिर्फ सात लोगों को थी। पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल ऑपरेशन के लिए कमांडो को मात्र दो घंटे का समय दिया गया था। आसमान में करीब 35 हजार फुट की ऊंचाई से भारतीय वायु सेना के हेलीकाप्टर इस ऑपरेशन की निगरानी कर थे।

 

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भारतीय सेना - फोटो : फाइल, अमर उजाला
125 कमांडो डोगरा और बिहार रेजिमेंट के थे। दोनों रेजिमेंट से तैयार विशेष संयुक्त पैरा कमांडो ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। कमांडो का चयन पंजाब, जम्मू, हिमाचल प्रदेश से हुआ और विशेष टीम का गठन किया गया। सुबह साढ़े चार बजे सभी कमांडो पैदल मार्ग से ही पीओके में घुसे और सफल होकर वापस आए।

 

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भारतीय सेना - फोटो : फाइल, अमर उजाला
28 सितंबर रात दो बजकर दस मिनट पर पुंछ से एलओसी पार कर कमांडो पाक अधिकृत कश्मीर के भिंबर, कैल क्षेत्र स्थित कैंप में पहुंचे। हमले से पहले आतंकियों के कैंप की पूरी जानकारी हासिल कर ली गई थी। आतंकी किस समय सोते हैं और कब खाना खाते हैं, इसकी जानकारी भी ली गई थी।

 

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भारतीय सेना - फोटो : फाइल, अमर उजाला
इस सर्जिकल स्ट्राइक के समय 125 जवानों में से केवल 35 कमांडो ही कैंप के अंदर गए थे। बाकी कैंप के बाहर थे, जो ऑपरेशन को कवर कर रहे थे, ताकि बाहरी हमले से बचा जा सके। इस दौरान पाकिस्तानी सेना का ध्यान बंटाने के लिए पुंछ व उड़ी सेक्टर पर एलओसी पर फायरिंग भी की गई।

 

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भारतीय सेना - फोटो : फाइल, अमर उजाला
इस फायरिंग के दौरान ही जवानों ने सीमा पार की और आतंकियों पर हमला करके उन्हें ढेर करके वापिस आए। से ध्यान बंटाने के दौरान ही सीमा पार कर कर ली गई। आतंकी कैंप एलओसी से 12-15 किलोमीटर दूर थे। पांच टीमों ने अलग-अलग तरीके से आतंकी कैंपों पर हमला किया।

 

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भारतीय सेना - फोटो : फाइल, अमर उजाला
सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान कमांडो के साथ एक गाइड भी था, जो एक साल से आतंकी ट्रेनिंग कैंप में मौजूद था। खास बात ये कि सर्जिकल स्ट्राइक के लिए चुने गए कमांडो के फोन भी बंद कर दिए गए थे। वह घर से भी एक महीने से दूर थे और घर में भी बात करने की इजाजत नहीं थी। पूरा ऑपरेशन उत्तरी कमान के नेतृत्व में हुआ।

 

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उरी हमला - फोटो : फाइल, अमर उजाला
उरी हमला बना वजह
18 सितंबर 2016 की सुबह करीब पांच बजे जम्मू और कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के पास स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे। यह भारतीय सेना पर किया गया, लगभग 20 सालों में सबसे बड़ा हमला था। इसके बाद ही सर्जिकल स्ट्राइक करने का फैसला लिया गया था।
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