राम मंदिर
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शोधकर्ता शिव कुमार पाधा बताते हैं कि सुमवां राम मंदिर की दीवारों पर की गई पेंटिंग दुर्लभ श्रेणी की हैं। रंगों की चमक और चित्रकला की शैली इसे कई मायने में खास बनाती है। यह विश्व प्रसिद्ध बसोहली चित्रकला सहित विभिन्न कलाओं का मिश्रण है। इसमें बसोहली के अलावा कांगड़ा, गुलेर, चंबा और राजस्थानी चित्रकला की झलक साफ दिखाई देती है। इसे दुर्लभ फ्यूजन कहा जा सकता है। वॉल पेंटिंग श्रेणी की बात करें, तो यह म्यूरल पेटिंग है, जिसे भीतरी दीवारों पर किया जाता है।