रानी पद्मिनी और अल्लाद्दीन खिलजी के इतिहास के विवादित दर्पण पर हमेशा के लिए पर्दा डाल देने की सरकार ने तैयारी कर ली है। फिल्म पद्मावत को लेकर सेंसर बोर्ड द्वारा चलाई गई कैंची के बाद अब इतिहास के पन्नों से भी वो सब कुछ हटा दिया गया है जिसके बारे में ना तो कोई तथ्य थे और ना ही कोई सच।
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किताबों से हटेगा ये विवादित अंश
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राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड स्कूलों के पाठ्यक्रम से रानी पद्मिनी और अल्लाउद्दीन खिलजी वाला विवादित अंश हटाने जा रहा है। जानकारी के अनुसार बोर्ड ने अल्लाउद्दीन खिलजी द्वारा रानी पद्मिनी को कांच में देखने वाले अंश को हटाने का निर्णय लिया है। इसके लिए बोर्ड ने अपने से संबधित सभी स्कूलों को कक्षा 10 की सामाजिक ज्ञान की किताब से इस अंश को हटाने के दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।
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चित्तौड़ में पहले ही डाल दिया गया है पर्दा
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पद्मिनी महल पर लिखा शिलालेख
- फोटो : अमर उजाला
चित्तौड़गढ़ जिले में तो जबसे फिल्म पद्मावत को लेकर विवाद गहराया तब से ही यहां पर्यटकों को यहां के इतिहास के बारे में बताने वाली पट्टिका पर भी कपड़ा डाल दिया गया है जो कि आज भी यथावत जारी है।
इतिहासकार भी नहीं मानते इन बातों को
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पद्मावती
- फोटो : SELF
हालांकि इससे पहले भी इस अंश को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं और देशभर के इतिहासकार इसे महज एक मनगढ़ंत किस्सा बताते आए हैं। वैसे भी रानी पद्मिनी और अल्लाउद्दीन खिलजी का जिक्र मलिक मोहम्मद जायसी की किताब 'पद्मावत' में ही किया गया है जो पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है।
गौरतलब है कि फिल्म को लेकर पहले से ही विवाद राजस्थान के साथ साथ अन्य 4 राज्यों में भी जारी है और इसी कारण फिल्म यहां रिलीज नहीं की जा सकी है। किताबों से भी अब विवादित अंश हटाए जाने के सरकार के इस फैसले खासतौर पर राजपूत समाज काफी खुश हो सकते हैं।