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पद्मावती फिल्म और भंसाली के विरोध में राजपूतों का साथ दें मुसलमान- दरगाह दीवान

Thu, 16 Nov 2017 04:08 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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Padmavati
संजय लीला भंसाली की आने वाली फिल्म पद्मावती के विरोध में अब मुस्लिम धर्म गुरू भी सामने आए हैं। अजमेर दरगाह दीवान ने कहा है कि भंसाली ने इतिहास को तोड़ मरोड़कर पेश किया है। ऐसे में राजपूतों का साथ देने के लिए मुसलमानों को भी आगे आना चाहिए।


 
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ये कहा है बयान में

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दरगाह दीवान - फोटो : अमर उजाला
सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के वंशज एवं वंशानुगत सज्जादानशीन दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने एक बयान जारी किया है। बयान में उन्होंने संजय लीला भंसाली द्वारा निर्मित फिल्म पद्मावती के विरोध का समर्थन करते हुए संजय लीला भंसाली की तुलना  सलमान रश्दी, तस्लीमा नसरीन और तारिक फतेह से कर दी है।

 
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इनसे कर दी भंसाली की तुलना

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sanjay leela bhansali padmavati
उन्होंने कहा है कि पद्मावती फिल्म के निर्माता संजय लीला भंसाली का किरदार ठीक उसी तरह है जैसे विवादित लेखक सलमान रश्दी तस्लीमा, नसरीन और तारिक फतेह है, क्योंकि जिस तरह भंसाली ने इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पद्मावती फिल्म का निर्माण करके देश के राजपूत समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। उसी तरह अभिव्यक्ति की आजादी का सहारा लेकर सलमान रश्दी और तस्लीमा नसरीन ने इस्लाम धर्म के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करके मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की है।


 

शांति व्यवस्था पर हो सकता है असर

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पद्मावती - फोटो : amar ujala
उन्होंने कहा कि इसी तरह पद्मावती फिल्म में अलाउद्दीन खिलजी और पद्मावती के प्रस्तुत किए गए कथित चित्रण से राजपूत समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचना स्वाभाविक है। इसलिए भंसाली और पद्मावती फिल्म का विरोध जायज है और इस विरोध में देश के मुसलमानों को राजपूतों का समर्थन करना चाहिए। दरगाह दीवान ने कहा कि पद्मावती फिल्म की कथावस्तु एवं ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किए जाने को लेकर व्याप्त जनाक्रोश एवं इसके सार्वजनिक चित्रण से शान्ति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
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अपमान स्वीकार नहीं होगा

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पद्मावती
दीवान ने कहा कि इस फिल्म के कुछ दृश्यों से किसी समुदाय की भावना आहत हो रही है तो इस फिल्म के दृश्यों की समीक्षा की जानी चाहिए कोई फिल्म किसी समुदाय की भावना को आहत करने वाली नहीं होनी चाहिए क्योंकि फिल्म का मकसद किसी समुदाय की भावना को आहत करना नहीं होता। ऐसे में भारत सरकार को पद्मावती फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगानी चाहिए। रानी पद्मिनी महिलाओं के शौर्य और स्वाभिमान की प्रतीक हैं। उनका अपमान किसी को भी स्वीकार नहीं होगा।

 
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