गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए चौंकाने वाले नतीजों के बाद पार्टी आगामी चुनावों में पूरी तैयारी के साथ उतरने की बात कहती रही है। राजस्थान में होने जा रहे तीन महत्सपूर्ण उपचुनाव को लेकर भी पार्टी का प्रत्येक नेता कमर कसने की बात कर रहा है। बुधवार को उपचुनावों के नामांकन का आखिरी दिन था लेकिन मुख्यमंत्री राजे भाजपा के किसी भी प्रत्याशी के नमांकन में नहीं पहुंची।
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अंतिम समय जारी हुई थी लिस्ट
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फाइल फोटो।
राजनीतिक जानकार इन चुनावों को भाजपा की कड़ी परीक्षा के तौर पर देख रहे है। मुख्यमंत्री का किसी भी प्रत्याशी का नामांकन में नहीं पहुंचना भाजपा की अंदरुनी सियासत की झलक दिखला रहा है। गौरतलब है कि उपचुनाव के लिए पार्टी ने आधिकारिक टिकिट की भी घोषणा नामांकन के अंतिम दिन से दो दिन पूर्व ही की है।
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यहां उपस्थित रहे दिग्गज
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फाइल फोटो।
अलवर, अजमेर लोकसभा व मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशियों ने बुधवार को ही नामांकन दाखिल किया है। वहीं दूसरी और तीनों ही उपचुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशियों ने अलग—अलग दिन नामांकन दाखिल किए। इस दौरान राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट सहित कांग्रेस के तमाम दिग्गज तीनों नामांकन के दौरान उपस्थित रहे।
नहीं दिखी गुटबाजी
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फाइल फोटो।
गौरतलब है कि राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी की खबरें सामने आती रही है लेकिन नामांकन के दौरान ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। वहीं दूसरी और भाजपा प्रत्याशियों के साथ राज्य सरकार के कई मंत्री तो नजर आए लेकिन मुख्यमंत्री का नजर नहीं आना आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय रहा। वहीं अजमेर में मुख्यमंत्री के पहुंचने के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन वे नहीं पहुंची।
राजस्थान में 29 जनवरी को अलवर, अजमेर लोकसभा व मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान होना है। इन उपचुनाव के लिए बुधवार को नामांकन का अंतिम दिन था। जानकारी के अनुसार कुल 54 उम्मीदवार मैदान में है। हालांकि 15 जनवरी तक नाम वापस लिए जा सकते है। उसके बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सबसे ज्यादा उम्मीदवार अजमेर लोकसभा सीट में है। यहां कुल 30 उम्मीदवारों ने 38 नामांकन दाखिल किए है। जबकि अलवर से कुल 15 उम्मीदवारों ने 19 नामांकन दाखिल किए है। वहीं माडंगलगढ़ विधानसभा उपचुनाव के लिए 17 उम्मीदवार ने 21 फॉर्म जमा कराए।