फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Saturday Special: कुणाल खेमू ने बताया कैसे मिला पहला ब्रेक, ओटीटी पर हिट और फ्लॉप पर उठाया बड़ा सवाल

Sat, 25 Jul 2020 02:03 PM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विज्ञापन
1 of 6
कुणाल खेमू - फोटो : सोशल मीडिया
बड़े परदे पर कुणाल खेमू पहली बार 27 साल पहले दिखे बाल कलाकार के रूप में। फिर 15 साल पहले वह फिल्म ‘कलयुग’ से हीरो बने। इस साल के शुरू में रिलीज हुई फिल्म ‘मलंग’ को उनकी कमबैक फिल्म माना गया और अब फिल्म ‘लूटकेस’ इस सीजन की फेवरिट कॉमेडी फिल्म मानी जा रही है। कुणाल खेमू से अमर उजाला की एक खास मुलाकात।

आप अभिनय बहुत छोटी उम्र से कर रहे हैं, आपके माता पिता का क्या रोल रहा आपको अभिनेता बनाने में?
आप यकीन नहीं मानेंगे लेकिन अभिनय मैंने खुद चुना। उस वक्त हम श्रीनगर में थे और दूरदर्शन के शो 'गुल गुलशन गुलफाम'  में मेरे माता-पिता (ज्योति और रवि खेमू) दोनों अभिनय करते थे। हम मुंबई आए तो उसी शो के निर्देशक वेद राही एक और शो 'चित्र कथाएं' बना रहे थे। इसमें एक कहानी मां बेटे की थी। वहीं से मेरे अभिनय की शुरुआत हुई, मेरी मां भी उस धारावाहिक में मेरे साथ थी। जब 'हम हैं राही प्यार के' फिल्म बन रही थी तो मेरे पिता से किसी ने मेरे लिए बात की। मैं अपनी मौसी के घर दिल्ली में फिल्म ‘दिल’ देख रहा था। पापा ने फोन करके पूछा कि क्या मुझे एक्टर बनना है तो मैंने हां कर दी। यहीं से भट्ट साहब (महेश भट्ट) से भी मेरा रिश्ता पनप गया।
विज्ञापन

2 of 6
लूटकेस - फोटो : सोशल मीडिया
लेकिन, वह तो बचपन की बात रही, क्या वाकई बड़े होकर भी आप अभिनेता ही बनना चाहते थे?
एक बाल कलाकार के तौर पर मैंने कुछ ही फिल्में कीं क्योंकि तब वह मेरा पेशा नहीं था। शायद मेरे मां-बाप भी तब यही सोचते होंगे कि मैं बड़ा होकर डॉक्टर या इंजीनियर जैसा कुछ बनूंगा। मुझे भी नहीं पता था कि मैं क्या करने वाला हूं। लेकिन जब फिल्म 'जख्म' में मुझे काम मिला तो मुझे लगा कि एक अभिनेता के रूप में मुझे अपने आपको एक मौका देना चाहिए। इसके बाद फिल्मों में आने से पहले मैंने पांच साल तक थिएटर किया। और इसमें मेरे परिवार का मुझे पूरा सहयोग मिला।
विज्ञापन

3 of 6
कुणाल खेमू - फोटो : सोशल मीडिया
हम हैं राही प्यार के और राजा हिंदुस्तानी में आमिर खान के साथ काम करने की आपकी क्या यादें हैं?
मैं उस वक्त गंभीर किस्म का बच्चा हुआ करता था। लोग मुझे देखकर कहते थे कि मैं तो बहुत पेशेवर लगता हूं। मेरी जितनी भी शैतानियां हुआ करती थीं वह या तो फिल्म के सेट के बाहर होती थीं या फिर सिर्फ घर पर। सेट पर मैं फिल्म के काम को बहुत ध्यान से देखता था। मैं इस मामले में बहुत जिज्ञासु था कि आखिर फिल्म के डायरेक्टर, सेट डिजाइनर, कैमरामैन आखिर करते क्या हैं? फिल्म 'हम हैं राही प्यार के' में मेरे साथ दो बच्चे और भी थे इसलिए वहां मैं थोड़ा मस्तीखोर बच्चा था। आमिर खान मुझे बहुत प्यार करते थे। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि उस चीज को मैं कैसे बताऊं? 

4 of 6
कुणाल खेमू - फोटो : सोशल मीडिया
अच्छा तो नई बात करते हैं, आने वाली फिल्म 'लूटकेस' के किरदार के लिए कोई खास तैयारी की?
मैं जब भी कोई किरदार करता हूं तो उससे पहले उसके लेखक और निर्देशक से लंबी बातचीत करता हूं क्योंकि उन्होंने ही उस किरदार को बनाया है। मैं उनसे हर मुद्दे पर चर्चा करता हूं। और, मैं यह भी देखता हूं कि उस किरदार में मैं अपना कितना योगदान दे सकता हूं। कॉमेडी फिल्मों में क्या होता है कि जब आप अपने सह कलाकारों के साथ रिहर्सल करते हैं तो उस किरदार की कुछ और खूबियां निखर कर आती हैं। कॉमेडी के लिए थोड़ा ज्यादा काम करना पड़ता है क्योंकि कागज पर लिखी कॉमेडी को पर्दे पर दिखाना एक्शन के रिएक्शन पर निर्भर करता है।
विज्ञापन

5 of 6
कुणाल खेमू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आपके सह कलाकारों रसिका दुग्गल, विजय राज, गजराज राव और रणवीर शौरी के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?
अनुभव बहुत शानदार था। दरअसल, इस फिल्म को करने के मेरे लिए दो कारण रहे। एक तो इस फिल्म की कहानी और दूसरे इसके कलाकार। यह सब इतने अच्छे हैं कि इनके साथ काम करते हुए आपका ऊर्जा का स्तर खुद ब खुद ऊंचा हो जाता है। खासकर जब हम किसी कॉमेडी फिल्म का हिस्सा होते हैं तो ऐसे कलाकार आपकी कॉमेडी में चार चांद लगा देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
फिल्म लूटकेस - फोटो : ट्विटर
फिल्म लूटकेस की शूटिंग खत्म हुए ही दो साल होने को हैं, ऐसे में फिल्म के ओटीटी पर रिलीज होने से आप कितने खुश हैं और कितने नाखुश?
हर फिल्म के निर्देशक और कलाकार के लिए शुक्रवार बहुत मायने रखता है। वही शुक्रवार तय करता है कि आपका भविष्य क्या है? उस फिल्म के पहले दिन के व्यापार को लेकर थोड़ी व्याकुलता भी बनी रहती है। साथ ही यही चीज एक कलाकार को उसका काम ठीक से करने पर मजबूर भी करती है। लेकिन, ओटीटी पर वह व्याकुलता नहीं रहती। ओटीटी पर हिट और फ्लॉप का फैसला कैसे होता है, मैं नहीं जानता। हमारी ये फिल्म सिनेमाघरों के लिए बनाई गई थी। सिनेमाघरों में लूटकेस को देखकर सैकड़ों लोग एक साथ ठहाके लगाते तो उसका अनुभव कुछ अलग ही होता।


लूटकेस की रिलीज के एलान के समय हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में आपको नहीं बुलाया गया, इसपर आपने आपत्ति भी जताई। क्या इस बारे में बाद में निर्माताओं ने या फिर ओटीटी संचालकों  ने आपसे कोई बात की?
नहीं। न तो फिल्म के ओटीटी पर रिलीज की घोषणा होने से पहले और न ही बाद में, हमें कुछ नहीं बताया गया। हमारी किसी से कोई बात भी नहीं हुई। फिर पता चला कि इन फिल्मों में हमारी फिल्म ही पहले रिलीज हो रही है।

पढ़ें: शॉर्ट ड्रेस पहनकर मंदिर पहुंची ये बॉलीवुड अभिनेत्री, वीडियो देख ट्रोलर्स ने किए ऐसे- ऐसे कमेंट
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें