सीरिया में एक बार फिर बड़े नरसंहार की घटना सामने आई है। इस बार कैमिकल गैस के हमले में करीब 100 लोगों की जान जाने की खबर सामने आई है। इस हमले ने सीरिया में मारे जाने वाले मासूम और बेगुनाहों के हालात एक बार फिर दुनिया के सामने लाकर रख दिए हैं।
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मीडिया की खबरों के मुताबिक इस हमले में ज्यादातर बच्चों की मौत हुई है और 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। इस हमले को करीब से महसूस किए लोगों ने दिल को दहला देने वाली सच्चाई बयां की।
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बीबीसी की खबर के मुताबिक एक चैरिटी के एंबुलेंस प्रभारी मोहम्मद रसूल ने हमले के बाद हालातों को बयां किया। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 6.45 बजे हवाई हमले की आवाज आई और जब वहां 20 मिनट बाद पहुंचे तो देखा कि लोग सड़कों पर पड़े हुए हैं और ज्यादातर के मुंह से झाग निकल रहा था।
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मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक लोगों ने बताया कि यहां सड़कों पर पड़े लोगों का दम घुट रहा था। रसूल के मुताबिक हालात बहुत खराब थे और ज्यादातर पीड़ित मासूम बच्चे थे।
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एक पत्रकार का कहना है कि जब वे वहां रिपोर्टिंग करने पहुंचे तो उन्होंने एक लड़की, महिला और दो बुजुर्गों के शव को अस्पताल में देखा, जिनके मुंह से झाग निकलता दिखाई दे रहा था।
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ये हमला सीरिया के इदलीब प्रांत में हुआ है, जहां सेना और विद्रोहियों की ओर से लगातार जानलेवा हमले होते रहते हैं। बताया जाता है कि इस प्रांत पर अल-कायदा के जिहादियों का आतंक फैला हुआ है।सीरीयाई सरकार लगातार रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल से इनकार कर रही है।
इस हमले के बाद सीरियाई सरकार सवालों के घेरे में आ गई है। जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यहां के राष्ट्रपति बसद-अल-असद और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को जिम्मेदार ठहाराया है। वहीं फ्रांस ने सयुंक्त राष्ट्र संघ से सीरियाई सरकार के खिलाफ गंभीर कदम उठाने की मांग की है।