आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के हाथों सेक्स गुलाम रह चुकीं नादिया मुराद को यूनाइटेड नेशन्स गुडविल एम्बेसडर चुना गया है। 16 सितंबर को चुनी गईं नादिया के लिए यूएन ने घोषणा की है कि नादिया तस्करी के अनगिनत पीड़ितों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता फैलाएंगी और एक सकारात्मक संदेश भी देंगी।
अपने साथ गुजरे खौफनाक मंजर का खुलासा नादिया ने यूएन सिक्योरिटी काउंसिल 2015 में किया था। उसने बताया कि आईएस सेक्स गुलाम बना कर जो अत्याचार करता है, उसे सोच कर भी रौंगटे खड़े हो जाते हैं। पीड़ित लड़कियों को इस कदर पीटा और रेप किया जाता था कि वह रोज रहम की भीख मांगती हैं।
विज्ञापन
2 of 6
Nadia Murad
19 साल की थी जब आईएस ने बनाया सैक्स गुलाम
2014 में आईएस ने नादिया को अपने चंगुल में फंसाया था और वह उस समय वह 19 साल की थी। नादिया ने बताया कि गैर-मुस्लिम यहूदी समुदाय की होने की वजह से उसे हद से ज्यादा प्रताड़ित किया जाता था।
विज्ञापन
3 of 6
Nadia Murad
- फोटो : DNA
मां-बाप का कत्ल नादिया के सामने ही किया
नादिया के सााथ साथ उसके पूरे परिवार को आईएस ने गुलाम बनाया था। नादिया अपने और परिवार के ऊपर किए गए जुल्मों का जिक्र भी करते हुए डर जाती है। लेकिन उसने एक दर्दनाक खुलासा किया है। एनडीटीवी के अनुसार नादिया ने बताया कि उसकी आंखों के सामने आईएस ने उसके मां-बाप का कत्ल किया।
4 of 6
Nadia Murad
- फोटो : Youtube
एक बार एक साथ छह लोगों ने किया रेप
गुलामी में नादिया का कई बार रेप किया गया, साथ ही बेरहमी से पीटा भी गया। इस बीच अपने आप को आईएस के चंगुल से बचाने की नादिया ने कोशिश की। लेकिन, उसे यह भारी पढ़ गया क्योंकि जब उसने भाग निकलने की कोशिश की तो छह लोगों ने उसे पकड़कर उसका गैंगरेप किया।
विज्ञापन
5 of 6
Nadia Murad
- फोटो : independent
निजी वेबसाईट से लोगों को करती है जागरूक
फिलहाल नादिया जर्मनी में हैं, जहां उसका इलाज किया गया। आईएस के हाथों मौत को करीब से देख चुकी नादिया लोगों को जागरूक करने की मुहिम चलाई है। खास बात है कि वह इतना सब होने के बाद भी कमजोर नहीं पड़ी हैं और लोगों को अच्छा संदेश दे रही हैं। इसके लिए वह अपनी निजी वेबसाइट की मदद ले रही हैं।
नादिया की निजी वेबसाइट के अनुसार, वह " जन अत्याचार, मानव तस्करी और नरसंहार से पीड़ित महिलाओं और बच्चों की मदद के लिए समर्पित ठीक है। साथ ही "संयुक्त राष्ट्र के साथ और उसकी नई स्थिति से जीवन और समुदायों को फिर से निर्माण मिशन में मदद मिलेगी।"
एक यहूदी महिला इराक के रिफ्यूजी कैंप में दो हफ्तों रही थी लेकिन उसे इस बात का डर रहा कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के लड़ाके उसे फिर से अपनी गिरफ्त में न ले ले। आईएस के लड़ाकों से खुद को बचाने के लिए यहूदी महिला ने जो कदम उठाया है वह चौंका देने वाला है। पीड़िता दोबारा आईएस के हाथों में न आ जाए, इस डर के साथ उसने अपने शरीर को जला डाला है ताकि वह बदसूरत दिखे और फिर से उसका बलात्कार न हो सके।