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Year Ender 2019: लोकसभा चुनावों में चला मोदी मैजिक, लेकिन विधानसभा में लगे झटके

Fri, 13 Dec 2019 09:16 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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साल 2019 इतिहास के पन्नों में दर्ज होने की ओर बढ़ रहा है। अब महज कुछ ही दिन बचे हैं जब नए साल का आगाज हो जाएगा और साल 2019 इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह जाएगा। साल 2019 भाजपा के लिए एक यादगार साल रहेगा। इस साल हुए लोकसभा चुनाव में एक बार फिर मोदी मैजिक चला और पिछली बार से ज्यादा सीटें जीतकर भाजपा फिर सत्ता पर काबिज हुई। 2018 में तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मिली हार के बाद पीएम मोदी का मनोबल गिरा नहीं और उन्होंने पूरे जोश और उत्साह के साथ लोकसभा चुनाव में धमाकेदार अंदाज में वापसी कर इतिहास रच दिया।

हलांकि इसी साल दो राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित नतीजे नहीं मिले। देश के दो राज्यों महाराष्ट्र और हरियाणा में इस साल चुनाव हुए। यहां एक बार फिर पिछले साल की तरह मोदी मैजिक को झटका लगा। देश के बड़े राज्यों में से एक महाराष्ट्र में तो भाजपा को सत्ता भी गंवानी पड़ी। वहीं हरियाणा में खट्टर सरकार की वापसी तो हुई लेकिन पूरे दमखम के साथ नहीं। हम आपको बता रहे हैं 2019 में हुए चुनावों में भाजपा को मिली उपलब्धियों और झटकों के बारे में...
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2019 में नरेंद्र मोदी का जादू फिर मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला। आम चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल कर सियासी पंडितों को भी चौंका दिया। भाजपा को इस साल 303 सीटों पर जीत मिली जबकि 2014 में उसने 282 सीटें जीती थीं। इसी के साथ नरेंद्र मोदी, जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद तीसरे व पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बन गए जिन्होंने सत्ता में रहते हुए पूर्ण बहुमत की दोबारा सरकार बनाई। पीएम मोदी ने एक बार फिर वाराणसी से चुनाव लड़ा और चार लाख 79 हजार 505 वोटों से जीते। 
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इस चुनाव में खास बात ये भी रही कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा और प्रचंड जीत हासिल की। वह गुजरात में गांधीनगर लोकसभा सीट पर साढ़े पांच लाख वोटों से विजयी रहे। इसी सीट से भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी लगातार छह बार से चुनाव जीतते आ रहे थे। अमित शाह यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे और फिर गृह मंत्रालय भी संभाला।  

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10 राज्यों में लहराया भगवा

पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की अगुवाई में भाजपा गठबंधन ने गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और हरियाणा के साथ-साथ चंडीगढ़ और दमन और दीव में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया। इससे पहले 2014 में भाजपा ने पांच राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों में क्लीन स्वीप किया था। 
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अब बात करते हैं 2019 में हुए विधानसभा चुनावों की। इस साल दो राज्यों हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनाव के बाद 24 अक्तूबर को जो परिणाम आए वह भाजपा के लिए चौंकाने वाले थे। दोनों राज्यों में पहले भाजपा सरकार थी, इसलिए सियासी पंडितों को इस बार भी इन दोनों राज्यों में मोदी मैजिक के दम पर सत्ता में वापसी की उम्मीद थी। लेकिन यहां पीएम मोदी और भाजपा को झटका लगा...
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हरियाणा की बात करे तो... 2014 में भाजपा ने पहली बार मोदी मैजिक के दम पर बहुमत हासिल कर सत्ता में आई थी। 2014 में भाजपा को 47 सीटे मिली थी और आरएसएस से राजनीति में आए मनोहर लाल खट्टर की ताजपोशी हुई थी। मनोहर लाल खट्टर ने करनाल से जीत दर्ज की थी। लेकिन 2019 में भाजपा बहुमत के आंकड़ों से छह कदम दूर रह गई। जिससे एक बार फिर मोदी मैजिक पर सवाल उठे। हरियाणा में बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 46 है, लेकिन भाजपा 40 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी। वहीं कांग्रेस गठबंधन को 31, जजपा को 10, इनेलो को एक और अन्य को आठ सीटें मिलीं।
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हरियाणा में सरकार बनाने के लिए लेना पड़ा दुष्यंत का सहारा

भाजपा ने 40 सीटें जीतीं। उन्हें सरकार बनाने के लिए छह विधायकों की जरूरत थी, इसी बीच गोपाल कांडा एक बार फिर सक्रिय होकर निर्दलीय विधायकों को एकजुट करने में लग गए और पांच विधायकों को लेकर दिल्ली पहुंच गए थे। निर्दलीय जीतकर आए छह उम्मीदवारों का समर्थन मिल भी गया, लेकिन इसके बाद भी भाजपा ने 10 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली जजपा का समर्थन लिया। जजपा के समर्थन से हरियाणा में सरकार बनी। मनोहर लाल खट्टर दोबारा मुख्यमंत्री बने और दुष्यंत चौटाला को उप मुख्यमंत्री बनाया गया।

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देवेंद्र फड़णवीस - फोटो : Twitter
अब बात महाराष्ट्र की... महाराष्ट्र में सियासी जोड़तोड़ के बाद भी भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ी। साथ ही महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों ने यह तय कर दिया कि यहां मोदी मैजिक नहीं चल पाया। 2014 में जहां भाजपा ने 122 सीटों पर जीत दर्ज की थी वहीं 2019 में उसे 105 सीटों से संतोष करना पड़ा। हालांकि, भाजपा ने चुनाव पूर्व शिवसेना के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, शिवसेना को भी 2014 की तुलना में सात सीटें कम मिलीं। शिवसेना ने 2014 में 63 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि इस साल उसे 56 सीटें मिलीं। अगर शिवसेना चुनाव पूर्व गठबंधन के मुताबिक भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाती तो फडणवीस सरकार की सत्ता में वापसी तय थी। लेकिन शिवसेना मुख्यमंत्री पद को मुद्दा बनाकर गठबंधन से पीछे हट गई और फडणवीस सरकार की सत्ता वापसी का सपना चकनाचूर हो गया।
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महाराष्ट्र में शिवसेना ने ऐसे बनाई सरकार

महाराष्ट्र में विधानसभा में सदस्यों की संख्या 288 है। यहां बहुमत का जादुई आंकडा 145 है। यहां शिवसेना ने राकांपा और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई। महाराष्ट्र में शिवसेना को 56 सीटें, राकांपा को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली है। इन तीनों को मिलाकर 154 सीटें होती हैं जो बहुमत के आंकड़े से ज्यादा है। लेकिन जब 30 नवंबर को जब उद्धव ठाकरे ने बहुमत साबित किया तो जादुई आंकड़ा पार करते हुए उन्हें 24 ज्यादा विधायकों का साथ मिला और 169 सीटों के साथ पहली बार शिवसेना परिवार के सदस्य से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले उद्धव ठाकरे ने दिखा दिया कि महाराष्ट्र भाजपा के हाथ से पूरी तरह फिसल चुका है।
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