समंदर का सिकंदर भारतीय नौसेना का ताकतवर विमान वाहक पोत आईएनएस विराट आज रिटायर हो जाएगा। आईएनएस विराट उन्नत किस्म का दूसरा विमानवाहक पोत है, जो समुद्र में अपनी धाक जमाने में सक्षम था। दुनिया का सबसे पुराना विमान वाहक पोत भारतीय नौसेना में 30 साल तक सेवा देने से पहले ब्रिटिश रायल नेवी में भी 27 साल तक अपनी सेवा दे चुका है। मालूम हो कि आईएनएस विराट को 12 मई 1987 को भारतीय नौसेना के बेडे़ में शामिल किया गया। तब इसका घोष वाक्य था ‘जलमेव यस्य, बलमेव तस्य।’ आइए जानते हैं इस युद्धपोत से जुड़ी अन्य रोचक बातें।
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- फोटो : amar ujala network
1980 के दशक में भारतीय नौसेना ने इसे साढ़े छह करोड़ डॉलर में खरीदा था और 12 मई 1987 को सेवा में शामिल किया। आईएनएस विराट दूसरी बार रिटायर हुआ है। दूसरी बार इसलिए क्योंकि भारतीय नौसेना से पहले इस युद्धपोत का इस्तेमाल ब्रिटिश नौसेना करती थी। ब्रिटिश नौसेना में इसे 'हर्मिस' के नाम से जाना जाता था। ब्रिटेन की रॉयल नेवी में इसे 25 नवंबर 1959 में शामिल किया गया और 1984 में यह पहली बार रिटायर हुआ।रिटायर होने के बाद इसे भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया।
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12 मई 1987 में इसे भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया और एक नया नाम 'विराट' दिया गया। 24 हजार टन वजनी विराट 743 फुट लंबा और 160 फुट चौड़ा है।विराट ने अपनी सेवा के दौरान करीब 2,252 दिन और करीब 10,94,215 किलोमीटर का सफर समुद्र में तय किया है। अनुमान के मुताबिक इतने समय में करीब 27 बार आप दुनिया का चक्कर लगा सकते हैं।
क्षमता
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विराट एक ऐसा युद्धपोत है जो करीब 80 लाइटवेट टॉरपीडो ले जाने में सक्षम है। इसके अलावा कमांडो ऑपरेशन के दौरान यह 750 सैनिकों के ले जाने में भी सक्षम है।
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विराट में चार एलसीवीपी लैंडिंग क्रॉफ्ट भी आसानी से रखे जा सकते हैं जिसका इस्तेमाल जमीनी कार्रवाई के दौरान सैनिकों को ले जाने में किया जाता है।
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युद्ध जैसी स्थिति में विराट पर 26 लड़ाकू विमानों की तैनाती की जा सकती है। यह दो तरह से मिशन को अंजाम देने में सक्षम है जिसमें पहला एंफिबियस ऑपरेशन और दूसरा एंटी सबमरीन वारफेयर (एएसडब्ल्यू) शामिल है।
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विराट पर नैसेना के चार स्क्वाड्रनों की तैनाती की जाती है। इसमें पहले स्क्वाड्रन को 'व्हाइट टाइगर्स' के नाम से जाना जाता है। इस स्क्वाड्रन में सी हैरियर लड़ाकू विमानों की तैनाती की जाती है।
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दूसरा स्क्वाड्रन 'द ब्रेव्स' है और इसमें भी सी हैरियर विमान ही मोर्चा संभालते हैं। तीसरा स्क्वाड्रन 'एन्जेल्स' है जिसमें चेतक हेलीकॉप्टरों की तैनाती होती है। चौथा और अंतिम स्क्वाड्रन को 'हॉर्पून' के नाम से जाना जाता है।
आईएनएस विराट संसद में आतंकी हमले के बाद 13 दिसंबर 2001 को ऑपरेशन पराक्रम और श्रीलंका में शांति स्थापित करने के लिए 27 जुलाई 1989 को चलाए गए ऑपरेशन ज्युपिटर में भी अपनी भूमिका निभा चुका है। वैसे सबसे ज्यादा समय तक सेवा में रहने की वजह से इसका नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में पहले ही दर्ज हो चुका है।