सेना के उड़ी बेस कैंप पर हमले से एक बार फिर पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों की करतूत सामने आई है। इस हमले के पीछे जैश ए मोहम्मद का हाथ बताया जा रहा है। पिछले एक साल के भीतर जैश ए मोहम्मद का यह भारतीय सेना पर दूसरा बड़ा हमला है। जनवरी में जैश ने पठानकोट में एयरफोर्स के बेस पर भी हमला किया था। एक समय मसूद अजहर भारत के कब्जे में था, लेकिन कंधार हाईजैक के बाद मिली रिहाई के बाद से उसका संगठन जैश ए मोहम्मद संसद पर हमले के अलावा पठानकोट और अब उड़ी सैन्य ठिकाने को निशाना बना चुका है। पढ़ें कैसे पाकिस्तान में आतंक का अड्डा बना रखा है जैश ए मोहम्मद ने...
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जैश ए मोहम्मद
जैश मोहम्मद का कमांडर अब अब्दुल रऊफ अजहर है जो कुख्यात मसूद अजहर का भाई है। पठानकोट हमले की पूरी साजिश मसूद ने ही रची थी। मसूद ने ही भारत की संसद पर 2001 में हमला कराया था। इंडियन एयरलाइंस के विमान को कंधार हाईजैक कर ले जाने पर मसूद को भारत को छोड़ना पड़ा था।
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जैश ए मोहम्मद
जैश ए मोहम्मद का मुख्यालय पाकिस्तान के बहावलपुर में है जो करीब 16 एकड़ में फैला है। यहां हर साल कई धार्मिक आयोजन के सहारे फंड जमा किया जाता है। पाकिस्तान की सरकार ने इसकी इजाजत दी हुई है।
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जैश ए मोहम्मद
भारतीय खुफिया एजेंसियों का दावा है कि जैश ए मोहम्मद के पास इस समय 500 से ज्यादा प्रशिक्षित आतंकी हैं। जो कि भारत के लिए बड़ा खतरा हैं।
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जैश ए मोहम्मद
वरिष्ठ खुफिया अधिकारी की मानें तो जैश ए मोहम्मद, भारत के लिए लश्कर ए तैयबा से भी बड़ा खतरा है। जैश के बारे में दुनिया को इतनी जानकारी नहीं है, इसका भी वह फायदा उठाता है।
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जैश ए मोहम्मद
‘इंडियन एक्सप्रेस’ अखबार की रिपोर्ट बताती है कि जैश ए मोहम्मद ने 2010 के बाद से पाकिस्तान ने खूब पैर पसारे हैं। संगठन ने इसी साल मौलाना गुलाम मुर्तजा को ‘अल रहमत’ ट्रस्ट को फिर से खड़ा करने की जिम्मेदारी सौंपी, जिसे एक समय मसूद अजहर का भाई अल्लाह बख्श चलाया करता था।
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जैश ए मोहम्मद
जैश ए मोहम्मद के ट्रस्ट ने काफी पैसा जुटाया है और इससे पाकिस्तान में करीब 313 मस्जिद और मदरसों का निर्माण कराया। 2010 में जैश ए मोहम्मद से जुड़ी एक मैगजीन ने लिखा था कि संगठन उन 850 आतंकियों के परिवारों को पेंशन दे रहा है, जो कि मारे जा चुके हैं या फिर भारतीय या अन्य देशों की जेलों में कैद हैं।
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जैश ए मोहम्मद
जैश ए मोहम्मद की एक साप्ताहिक पत्रिका 'अल-कलाम' है, यह डेली इस्लाम के साथ बेची जाती है। इसके अलावा जर्ब ए मोमिन नाम का वीकली भी जैश ए मोहम्मद चलाता है।
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जैश के गुर्गों ने साल 2003 में दो बार पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को मारने की कोशिश भी की थी। इसी के बाद से पाकिस्तान में इसका नेटवर्क सुस्त पड़ गया था।
2003 के बाद जैश ए मोहम्मद बिल्कुल खत्म होने की तरफ बढ़ रहा था। लेकिन 2010 में एक बार फिर इसने पैर जमाने शुरू किए और अब भारत के लिए एक बार बड़ी मुसीबत बन गया है।