लोग शिव मंदिर में कलश और लोटे में जल ले जाकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं, जबकि अन्य देवताओं को मिठाई आखिर क्यों? भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त जल और बेलपत्र से शिव जी का अभिषेक करते हैं। इसके पीछे एक बड़ा कारण है जिसका उल्लेख पुराणों में किया गया है।
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आखिर शिव को जल ही क्यों चढ़ाते हैं, मीठा क्यों नहीं?
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भगवान शिव
- फोटो : amar ujala
शिव पुराण में उल्लेख मिलता है कि सागर मंथन के समय जब हालाहल नाम का विष निकलने लग तब विष के प्रभाव से सभी देवता एवं जीव-जंतु व्याकुल होने लगे। ऐसे समय में भगवान शिव ने विष को अपनी अंजुली में लेकर पी लिया।
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भगवान शिव
- फोटो : amar ujala
विष के प्रभाव से स्वयं को बचाने के लिए शिव जी ने इसे अपनी कंठ में रख लिया इससे शिव जी का कंठ नीला पड़ गया और शिव जी नीलकंठ कहलाने लगे। लेकिन विष के प्रभाव से शिव जी का मस्तिष्क गर्म हो गया। ऐसे समय में देवताओं ने शिव जी के मस्तिष्क पर जल उड़लेना शुरू किया जिससे मस्तिष्क की गर्मी कम हुई।
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महाशिवरात्रि
- फोटो : amar ujala
बेल के पत्तों की तासीर भी ठंढ़ी होती है इसलिए शिव जी को बेलपत्र भी चढ़ाया गया। इसी समय से शिव जी की पूजा जल और बेलपत्र से शुरू हो गयी। बेलपत्र और जल से शिव जी का मस्तिष्क शीतल रहता और उन्हें शांति मिलती है। इसलिए बेलपत्र और जल से पूजा करने वाले पर शिव जी प्रसन्न होते हैं।