गुजरात के बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को जामनगर कोर्ट ने 30 साल पहले हिरासत में हुई एक मौत के मामले में दोषी करार दिया है। कोर्ट इस मामले में संजीव भट्ट को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में एक और पुलिस अधिकारी प्रवीण सिंह झाला को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
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संजीव भट्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
अभियोजन पक्ष के अनुसार, जामनगर में हुए दंगों में भट्ट ने लगभग 100 लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें से एक की मौत अस्पताल में उस समय हो गई जब उसे कैद से छोड़ा गया था। इस आरोप में उन्हें साल 2011 में निलंबित कर दिया गया था। जिसके बाद वह बिना बताए अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित रहे थे। इस दौरान उन्होंने सरकारी गाड़ी का दुरुपयोग किया था।
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संजीव भट्ट (फाइल फोटो)
संजीव भट्ट गुजरात काडर के आईपीएस अधिकारी थे। संजीव राजेंद्र भट्ट सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करने के बाद सुर्खियों में आ गए थे। इस हलफनामे में उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए थे।
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संजीव भट्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
भट्ट ने कहा था कि गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) में उन्हें भरोसा नहीं है। 2015 में गुजरात सरकार ने निलंबित आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को बर्खास्त कर दिया था।
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संजीव भट्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
आईआईटी मुंबई से पोस्ट ग्रेजुएट संजीव भट्ट वर्ष 1988 में भारतीय पुलिस सेवा में आए और उन्हें गुजरात काडर मिला। पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने राज्य के कई जिलों, पुलिस आयुक्त के कार्यालय और अन्य पुलिस इकाइयों में काम किया है।
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संजीव भट्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
दिसंबर 1999 से सितंबर 2002 तक वे राज्य खुफिया ब्यूरो में उपायुक्त के रूप में कार्यरत थे। तब गुजरात के आंतरिक सुरक्षा से जुड़े सभी मामले उनके अधीन थे। इनमें सीमा सुरक्षा और तटीय सुरक्षा के अलावा अति विशिष्ट जनों की सुरक्षा भी शामिल थे। इस दायरे में मुख्यमंत्री की सुरक्षा भी आती थी।
संजीव भट्ट नोडल ऑफिसर भी थे, जो कई केंद्रीय एजेंसियों और सेना के साथ खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान भी करते थे। जब वर्ष 2002 में गुजरात में दंगे हुए थे, उस समय भी संजीव भट्ट इसी पद पर तैनात थे।