लोकसभा में बुधवार को पेश किए गए वक्फ संशोधन विधेयक प्रावधानों में कई अहम परिवर्तन के कारण नए स्वरूप में होगा। विधेयक के कानून बन जाने के बाद वक्फ संपत्ति विवाद सुलझाने में अब राज्य सरकारों को पहले से अधिक शक्तियां हासिल होंगी। इसके अतिरिक्त प्रस्तावित कानून का असर पुरानी मस्जिदों, दरगाहों या मुसलमानों के धार्मिक संस्थानों पर नहीं पड़ेगा।
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देशभर के वक्फ बोर्डों में जवाबदेही व पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वक्फ संशोधन विधेयक आज 12 बजे लोकसभा में पेश किया गया। इसके जरिए मौजूदा वक्फ कानून में बदलाव किया जाना है। विधेयक पर कार्यमंत्रणा समिति (बीएसी) ने चर्चा के लिए आठ घंटे का समय तय किया है। पूरे विपक्ष समेत कई मुस्लिम संगठन विधेयक के विरोध में हैं, मगर सत्ताधारी भाजपा ने राजग सहयोगियों की मदद से इसे पारित कराने की तैयारी कर ली है। तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी) और जनता दल-यू विधेयक पर सरकार के साथ हैं।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'सरकार का इरादा इसी सत्र में विधेयक को दोनों सदनों में पारित कराने का है। भाजपा व कांग्रेस सहित कई दलों ने अपने-अपने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए व्हिप जारी कर दिया है। भाजपा ने लोकसभा के सांसदों को बुधवार को, जबकि राज्यसभा सांसदों को गुरुवार को सदन में पूरे दिन मौजूद रहने का निर्देश दिया है।' आइए आसान सवाल-जवाब से वक्फ से जुड़े इस मामले को समझने की कोशिश करते हैं...
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Waqf Board
- फोटो : अमर उजाला
वक्फ प्रबंधन के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक निकाय कौन से हैं और उनकी भूमिकाएं क्या हैं?
वक्फ संपत्तियों का प्रशासन वर्तमान में वक्फ अधिनियम-1995 द्वारा किया जाता है। यह केंद्र सरकार द्वारा अधिनियमित और विनियमित है। वक्फ प्रबंधन में शामिल प्रमुख प्रशासनिक निकाय हैं...
केंद्रीय वक्फ परिषद (सीडब्ल्यूसी): यह सरकार और राज्य वक्फ बोर्डों को नीति पर सलाह देती है, लेकिन वक्फ संपत्तियों को सीधे नियंत्रित नहीं करती है।
राज्य वक्फ बोर्ड (एसडब्ल्यूबी) : यह हर राज्य में वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन और सुरक्षा करते हैं।
वक्फ न्यायाधिकरण : विशेष न्यायिक निकाय, जो वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों की सुनवाई करते हैं।
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वक्फ की संपत्ति
- फोटो : amarujala.com
वक्फ बोर्ड से संबंधित मुद्दे क्या हैं?
वक्फ संपत्तियों की अपरिवर्तनीयता: एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ के सिद्धांत से विवाद। जैसे कि बेट द्वारका में द्वीपों पर किए गए दावे, जिन्हें अदालतों ने भी उलझन भरा माना है। कानूनी विवाद और कुप्रबंधन: वक्फ अधिनियम, 1995 और इसका 2013 का संशोधन प्रभावकारी नहीं रहा है। इसके कारण कई समस्याएं पैदा हुईं-
अवैध कब्जे
कुप्रबंधन व स्वामित्व विवाद
संपत्ति पंजीकरण और सर्वेक्षण में देरी
बड़े पैमाने पर मुकदमे और मंत्रालय को शिकायतें
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ईद के मौके पर मुस्लिम समुदाय के बीच जनसुराज मुखिया प्रशांत किशोर तथा अन्य
- फोटो : अमर उजाला
न्यायिक निगरानी नहीं : वक्फ न्यायाधिकरणों के फैसलों को उच्च न्यायालयों में चुनौती नहीं दी जा सकती।
वक्फ संपत्तियों का अधूरा सर्वेक्षण: सर्वेक्षण आयुक्त का काम खराब रहा है, जिससे देरी हुई है। गुजरात और उत्तराखंड में अभी तक सर्वेक्षण शुरू भी नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश में 2014 में आदेशित सर्वेक्षण अब भी लंबित है। विशेषज्ञता की कमी और राजस्व विभाग के साथ खराब समन्वय ने पंजीकरण प्रक्रिया को धीमा कर दिया है।
कानूनों का दुरुपयोग : कुछ राज्य वक्फ बोर्डों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया, जिससे सामुदायिक तनाव पैदा हुआ है। निजी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने के लिए अधिनियम की धारा 40 का व्यापक दुरुपयोग किया गया है, जिससे कानूनी लड़ाई और अशांति पैदा हुई। 8 राज्यों से मिली जानकारी के अनुसार, वहां धारा 40 के तहत 515 संपत्तियों को वक्फ घोषित किया गया है।
वक्फ अधिनियम की सांविधानिक वैधता : वक्फ अधिनियम केवल एक धर्म पर लागू है, जबकि अन्य के लिए कोई समान कानून मौजूद नहीं है। दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है, जिसमें सवाल उठाया गया है कि क्या वक्फ अधिनियम सांविधानिक है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
सितंबर 2024 तक के आंकड़ों से पता चलता है कि 5,973 सरकारी संपत्तियों को वक्फ घोषित किया गया है...
तमिलनाडु: थिरुचेंथुरई गांव का किसान वक्फ बोर्ड के पूरे गांव पर दावे के कारण अपनी जमीन नहीं बेच पाया।
गोविंदपुर, बिहार: अगस्त 2024 में, बिहार सुन्नी वक्फ बोर्ड के पूरे गांव पर दावे का मामला पटना उच्च न्यायालय में मामला चला। मामला विचाराधीन है।
केरल: सितंबर 2024 में, एर्नाकुलम जिले के 600 ईसाई परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन पर वक्फ बोर्ड के दावे का विरोध कर रहे हैं।
कर्नाटक: विजयपुरा में 15,000 एकड़ जमीन पर बोर्ड का दावा। किसानों ने विरोध किया। बेल्लारी, चित्रदुर्ग, यादगीर और धारवाड़ में भी विवाद।
उत्तर प्रदेश: वक्फ बोर्ड के भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन की शिकायतें।
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Waqf bill
- फोटो : अमर उजाला
संशोधन विधेयक के कुछ प्रमुख सुधार क्या हैं?
एकीकृत वक्फ प्रबंधन: इसके तहत वक्फ संपत्तियों को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों जैसे कि वक्फ संपत्तियों के अधूरे सर्वेक्षण, न्यायाधिकरण और और वक्फ बोर्डों में लंबित मुकदमों, मुतवल्लियों का अनुचित लेखा परीक्षा और निगरानी, सभी वक्फ संपत्तियों का म्यूटेशन ठीक से नहीं होना आदि में सुधार किया जाएगा।
केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों का सशक्तीकरण : प्रतिनिधित्व और दक्षता बढ़ाने के लिए निर्णय लेने में गैर-मुस्लिम, अन्य मुस्लिम समुदायों, मुस्लिम समुदायों के बीच अन्य पिछड़े वर्गों और महिलाओं आदि जैसे विविध समूहों को शामिल किया जाएगा।
राज्य बोर्डों की दक्षता: एक डिजिटल पोर्टल और डाटाबेस आधारित वक्फ पंजीकरण, सर्वेक्षण, म्यूटेशन, ऑडिट, लीजिंग और मुकदमेबाजी को स्वचालित करेगा, जिससे वैज्ञानिक, कुशल और पारदर्शी शासन सुनिश्चित होगा।
धारा 65 के तहत वक्फ बोर्ड को छह महीने के भीतर प्रबंधन और आय में सुधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है, ताकि समय पर कार्रवाई हो।
धारा 32(4) वक्फ बोर्ड को आवश्यकता पड़ने पर मुतवल्लियों से संपत्ति लेकर भूमि को शैक्षणिक संस्थानों, शॉपिंग सेंटरों, बाजारों या आवासों के रूप में विकसित करने की अनुमति देती है।
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जगदंबिका पाल और कल्याण बनर्जी
- फोटो : PTI
संयुक्त समिति की ओर से अनुशंसित प्रमुख सुधार?
वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 (जेसीडब्लयूएबी) पर संयुक्त समिति द्वारा अनुशंसित वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन, प्रगतिशील सुधारों को पेश करते हैं, जिनमें शामिल हैं:
ट्रस्टों का पृथक्करण: किसी भी कानून के तहत बनाए ट्रस्टों को वक्फ नहीं माना जाएगा, जिससे ट्रस्टों पर पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित होगा।
प्रौद्योगिकी व केंद्रीय पोर्टल: केंद्रीकृत पोर्टल वक्फ संपत्ति प्रबंधन को स्वचालित करेगा, जिसमें पंजीकरण, ऑडिट, योगदान और मुकदमेबाजी शामिल है, जिससे दक्षता व पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
वक्फ समर्पण के लिए पात्रता: केवल प्रैक्टिसिंग मुस्लिम (कम से कम पांच साल से) ही अपनी संपत्ति वक्फ को समर्पित कर सकते हैं, जो 2013 से पहले के प्रावधान को बहाल करता है।
संपत्तियों का संरक्षण: पहले से पंजीकृत संपत्तियां वक्फ ही रहती हैं, जब तक कि विवादित न हों या सरकारी भूमि के रूप में पहचानी न जाएं।
पारिवारिक वक्फ में महिलाओं के अधिकार: महिलाओं को वक्फ समर्पण से पहले अपनी सही विरासत मिलनी चाहिए, जिसमें विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथों के लिए विशेष प्रावधान हैं।
पारदर्शी प्रबंधन: जवाबदेही बढ़ाने के लिए मुतवल्लियों को छह महीने के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर संपत्ति का विवरण दर्ज करना होगा।
सरकारी भूमि पर विवाद: कलेक्टर से ऊपर का अधिकारी वक्फ में दावा की गई सरकारी संपत्तियों की जांच करेगा, जिससे अनुचित दावे रुकेंगे।
वक्फ न्यायाधिकरणों की मजबूती: संरचित चयन प्रक्रिया और निश्चित कार्यकाल विवाद समाधान में स्थिरता और दक्षता सुनिश्चित करता है।
गैर-मुस्लिम प्रतिनिधित्व: समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए वक्फ बोर्डों में दो गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल होंगे।
कम वार्षिक योगदान: वक्फ बोर्डों में वक्फ संस्थानों का अनिवार्य योगदान 7% से घटाकर 5% किया। इससे परोपकारी कार्यों के लिए अधिक धन उपलब्ध होगा।
परिसीमा अधिनियम का उपयोग: परिसीमा अधिनियम, 1963 अब वक्फ संपत्ति के दावों पर लागू होगा, जिससे लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी कम होगी।
लेखा परीक्षा : सालाना 1 लाख रुपये से अधिक कमाने वाली वक्फ संस्थाओं को राज्य सरकार द्वारा लेखा परीक्षा करानी होगी।
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जगदम्बिका पाल, अध्यक्ष, संसदीय समिति वक्फ (संशोधन) विधेयक
- फोटो : ANI
संशोधन विधेयक से गरीबों को किस तरह लाभ मिलने की उम्मीद है?
वक्फ धार्मिक, धर्मार्थ और सामाजिक कल्याण की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, कुप्रबंधन, अतिक्रमण और पारदर्शिता की कमी के कारण इसका प्रभाव अक्सर कम हो जाता है। गरीबों के लिए कुछ प्रमुख लाभ:
पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए डिजिटलीकरण : एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल वक्फ संपत्तियों को ट्रैक करेगा, जिससे बेहतर पहचान, निगरानी और प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
ऑडिटिंग और अकाउंटिंग उपायों से वित्तीय कुप्रबंधन रुकेगा। सुनिश्चित होगा कि फंड का इस्तेमाल केवल कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए हो।
राजस्व में वृद्धि : वक्फ भूमि के दुरुपयोग और अवैध कब्जे को रोकने से वक्फ बोर्डों के राजस्व में वृद्धि होगी, जिससे कल्याणकारी कार्यक्रमों का विस्तार करने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आवास और आजीविका सहायता के लिए धन आवंटित किया जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सीधे लाभ होगा।
नियमित लेखा परीक्षा और निरीक्षण से वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा और वक्फ प्रबंधन के प्रति जनता का विश्वास मजबूत होगा।
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वक्फ संसोधन विधेयक पर बनी संसद की संयुक्त संसदीय समिति
- फोटो : पीटीआई
वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने से वक्फ प्रबंधन में क्या योगदान होगा और निर्णय लेने में उनकी भूमिका क्या होगी?
गैर-मुस्लिम हितधारक: दाता, वादी, पट्टेदार और किरायेदार वक्फ प्रबंधन में शामिल होते हैं, इसलिए निष्पक्षता के लिए वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद (सीडब्ल्यूसी) में उनका प्रतिनिधित्व आवश्यक है।
धर्मनिरपेक्ष गतिविधियों का विनियमन: धारा 96 सरकार को वक्फ संस्थानों के शासन, सामाजिक, आर्थिक और कल्याणकारी पहलुओं को विनियमित करने का अधिकार देती है, जिसकी पुनः पुष्टि न्यायालय के फैसलों से होती है।
निगरानी : सीडब्ल्यूसी राज्य वक्फ बोर्डों की निगरानी करता है, वक्फ संपत्तियों पर सीधे नियंत्रण के बिना अनुपालन सुनिश्चित करता है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि वक्फ प्रबंधन धार्मिक पहलुओं से परे आर्थिक और वित्तीय विनियमन तक फैला हुआ है।
गैर-मुस्लिम प्रतिनिधित्व: राज्य वक्फ बोर्ड: 11 सदस्यों में से 2 (पदेन सदस्यों को छोड़कर) गैर-मुस्लिम हो सकते हैं।
केंद्रीय वक्फ परिषद: 22 सदस्यों में से 2 (पदेन सदस्यों को छोड़कर) गैर-मुस्लिम हो सकते हैं।
हालांकि निर्णय बहुमत से किए जाएंगे, लेकिन गैर-मुस्लिम सदस्य प्रशासनिक और तकनीकी विशेषज्ञता का योगदान दे सकते हैं, जिससे वक्फ संस्थानों की दक्षता और शासन में सुधार होगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
यह है मकसद
वर्तमान कानून की कमियों को दूर करना और कानून का नाम बदलने जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्डों की कार्यकुशलता को बेहतर करना।
वक्फ की परिभाषाओं को अद्यतन करना।
पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार। वक्फ रिकॉर्ड प्रबंधन में प्रौद्योगिकी की भूमिका बढ़ाना।
मनमाने ढंग से संपत्ति के दावे होंगे खत्म...
यह विधेयक धारा 40 को हटाता है, जिससे वक्फ बोर्ड मनमाने ढंग से संपत्तियों को वक्फ घोषित करने से बाज आएंगे तथा पूरे गांव को वक्फ घोषित करने जैसे दुरुपयोग से बचा जाएगा।