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Pics : 1971 में भारतीय जांबाजों ने लिखी थी नई शौर्यगाथा, सेना यूं कर रही वीर सपूतों को नमन

Wed, 16 Dec 2020 04:38 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विजय दिवस 2020 - फोटो : Twitter@adgpi
1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत के विजय के 50 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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विजय दिवस 2020 - फोटो : Twitter@adgpi
इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीडीएस बिपिन रावत के साथ अलावा तीनों सेनाओं के प्रमुख पीएम मोदी के साथ मौजूद रहे और सभी ने शहीद को नमन किया।
 
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पीएम मोदी मशाल प्रज्ज्वलित करते - फोटो : Twitter@adgpi
पीएम नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर 'स्वर्णिम विजय मशाल' को प्रज्ज्वलित किया। इस मौके पर चार विजय मशाल प्रज्ज्वलित किए गए। 

 
 

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1971 के युद्ध के दौरान भारतीय सेना - फोटो : Twitter@adgpi
16 दिसंबर 1971, आधुनिक हथियारों और सैन्य साजोसामान से लैस पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने भारतीय सेना के अदम्य साहस और वीरता के आगे घुटने टेक दिए थे और इसी के साथ ही दुनिया के मानचित्र में बांग्लादेश नाम से एक नए देश का उदय हुआ।
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1971 के युद्ध के दौरान भारतीय सेना - फोटो : Twitter@adgpi
भारत की ओर से पाकिस्तान की इतनी भारी-भरकम फौज का आत्मसमर्पण कराना आसान काम नहीं था। पाकिस्तानी फौज के कमांडर जनरल नियाजी को मनाने की तैयारी भारतीय सेना के पूर्वी कमान के स्टाफ ऑफिसर मेजर जनरल जेएफआर जैकब को दी गई थी।

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1971 के युद्ध के दौरान भारतीय सेना - फोटो : Twitter@adgpi
जैकब के नेतृत्व में भारतीय सेना ढाका की तरफ आगे बढ़ी। 13 दिसंबर को सेना प्रमुख जनरल मानेकशॉ के आदेश के बाद तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के सभी शहरों पर भारतीय सेना ने कब्जा कर लिया। जैकब भारतीय सेना के यहूदी योद्धा थे और उनकी सूझबूझ के कारण ही पाकिस्तानी फौज के कमांडर जनरल नियाजी को आत्मसमर्पण करना पड़ा था।
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राजनाथ सिंह - फोटो : Twitter@adgpi
इस महत्वपूर्ण अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'स्वर्णिम विजय वर्षा' के लिए लोगो का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के अदम्य साहस को राष्ट्र हमेशा याद रखेगा।
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विजय दिवस 2020 - फोटो : Twitter@adgpi
नेशनल वॉर मेमोरियल की अनंत ज्योति से प्रज्ज्वलित चार 'विजय मशाल' (ज्वाला) को 1971 युद्ध के वीर सपूत के सम्मान में उनके गांवों सहित देश के विभिन्न हिस्सों में ले जाई जाएगी।

 
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