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Vice President Election: विपक्ष और एनडीए उम्मीदवार को किन दलों का साथ मिला, आंकड़ों में कितने भारी हैं धनखड़?

Wed, 27 Jul 2022 05:32 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

छह अगस्त को चुनाव होने हैं। उसी दिन परिणाम भी आ जाएगा। मतलब छह अगस्त को ही मालूम चल जाएगा कि जगदीप धनखड़ अगले उपराष्ट्रपति होंगे या मार्गरेट अल्वा? 
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उपराष्ट्रपति चुनाव - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपति चुनाव के बाद अब सबकी निगाहें उपराष्ट्रपति चुनाव पर है। विपक्ष की तरफ से मार्गरेट अल्वा और भाजपा की अगुआई वाली एनडीए ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को उम्मीदवार बनाया गया है। छह अगस्त को चुनाव होने हैं। उसी दिन परिणाम भी आ जाएगा। मतलब छह अगस्त को ही मालूम चल जाएगा कि जगदीप धनखड़ अगले उपराष्ट्रपति होंगे या मार्गरेट अल्वा? 

आइए जानते हैं कि अब तक दोनों प्रत्याशियों को किन-किन दलों का साथ मिला? समीकरण क्या कहते हैं? किस उम्मीदवार के पक्ष में कितने दल हैं? आइए जानते हैं...
 
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उपराष्ट्रपति चुनाव - फोटो : अमर उजाला
जगदीप धनखड़ को किसने-किसने दिया समर्थन? 
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को भाजपा की अगुआई वाले एनडीए ने उम्मीदवार बनाया है। धनखड़ को अब तक भाजपा, जेडीयू, अपना दल (सोनेलाल), बीजेडी, एआईएडीएमके, वाईएसआर कांग्रेस, लोक जनशक्ति पार्टी, एनपीपी, एमएनएफ, एनडीपीपी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) जैसे दलों का समर्थन मिला है। 


 
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मार्गरेट अल्वा - फोटो : अमर उजाला
अल्वा के पक्ष में कितने दल? 
विपक्ष से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को अब तक कांग्रेस, एनसीपी, वामपंथ, नेशनल कॉन्फ्रेंस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आरजेडी का समर्थन मिला हुआ है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी समेत कुछ अन्य दलों का भी साथ मिल सकता है। शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट ने भी अल्वा का समर्थन किया है। शिवसेना सांसद संजय राउत अल्वा की नामांकन प्रक्रिया में भी शामिल हुए थे। हालांकि, शिवसेना के ज्यादातर सदस्य एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ के साथ हैं। 

 

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ममता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला
ममता ने विपक्ष को दिया बड़ा झटका
कांग्रेस की उम्मीदवार मारग्रेट अल्वा को राजद, राकांपा, शिवसेना, द्रमुक और माकपा जैसी पार्टियों ने समर्थन देने की बात कही है, लेकिन ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने सबसे बड़ा झटका दे दिया है। टीएमसी ने चुनाव में तटस्थ रहने का ऐलान किया है। कहा जा रहा है कि ममता विपक्ष में रहते हुए भले ही धनखड़ का साथ नहीं दे रहीं हैं, लेकिन वोटिंग से खुद को अलग रखकर जरूर वह उनको फायदा पहुंचा रहीं हैं।  
 
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उपराष्ट्रपति चुनाव - फोटो : अमर उजाला
आंकड़ों से जानिए कितने सदस्य वोट डालेंगे? 
उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्य वोट डालते हैं। इनमें मनोनीत सांसद भी शामिल होते हैं। अभी लोकसभा में सदस्यों की संख्या पूरी है। मतलब पूरे 543 सांसद हैं। वहीं, राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं। इनमें 12 नामित सांसद रहते हैं। मौजूदा समय में आठ सीटें खाली हैं। इनमें चार जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग होने के कारण जबकि एक सीट त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री बने माणिक साहा ने छोड़ी है। तीन अन्य नामित सदस्यों की सीट भी खाली है। सरकार उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले नामित सदस्यों के लिए खाली सीटें भर सकती है।  

इस लिहाज से उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए राज्यसभा वोटर्स के आंकड़े सामने आते हैं। पहला ये कि मौजूदा स्थिति में चुनाव में 237 राज्यसभा सांसद वोट करेंगे। दूसरा यह कि 240 सदस्य वोट कर सकते हैं। 240 सदस्य तब वोट करेंगे जब नामित सदस्यों के तीन खाली पदों को भर दिया जाए। 

अब ओवरऑल वोटर्स के आंकड़ों पर नजर डालते हैं। अगर राज्यसभा के 240 सदस्य वोट डालते हैं तो ओवरऑल वोटर्स की संख्या 783 हो जाएगी, लेकिन अगर राज्यसभा के 237 वोटर्स होंगे तो ये आंकड़ा घटकर 780 हो जाएगा। 
 
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उपराष्ट्रपति चुनाव - फोटो : अमर उजाला
जीतने के लिए कितने वोट चाहिए? 
अभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की संख्या के हिसाब से वोटर्स की दो संख्या निकलकर सामने आ रही है। पहली परिस्थिति में कुल 783 वोट पड़ सकते हैं। ऐसे में जीत के लिए उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के 393 वोट चाहिए होंगे। दूसरी परिस्थिति में अगर 780 वोट पड़ते हैं तो उम्मीदवार को जीत के लिए प्रथम वरीयता के 391 वोट चाहिए होंगे। 
 
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उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार। - फोटो : अमर उजाला
किसके जीतने की ज्यादा उम्मीद? 
मौजूदा समय में लोकसभा में भाजपा के 303 सदस्य हैं, जबकि राज्यसभा में 91 हैं। राज्यसभा में इन 91 के अलावा पांच नामित सदस्य भी भाजपा को वोट दे सकते हैं। इस तरह से भाजपा के पास मौजूदा समय 394 वोट आसानी से हो जाते हैं। इनमें पांच नामित सदस्यों के वोट जोड़ दें तो ये संख्या 399 हो जा रही है। मतलब साफ है भाजपा अपने उपराष्ट्रपति उम्मीदवार धनखड़ को अकेले दम पर आसानी से जीत दिला सकती है। 

अब सहयोगी दलों को भी इसमें शामिल कर लें तो भाजपा और मजबूत हो जाएगी। अभी लोकसभा में 31 और राज्यसभा में 16 सांसदों का समर्थन भाजपा को मिला हुआ है। इनमें जेडीयू, आरपीआई, लोक जन शक्ति पार्टी, अपना दल, एआईएडीएमके, एनपीपी जैसी पार्टियां शामिल हैं। इनके वोट जोड़कर भाजपा के पास 446 वोट हो जाते हैं। जेडीयू, अपना दल, जन शक्ति पार्टी ने पहले ही धनखड़ को समर्थन देने का एलान कर दिया है। 

थोड़ा आगे बढ़ें तो अब तक विपक्ष के कई दलों ने भी धनखड़ को समर्थन दे दिया है। इनमें बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस शामिल है। बीजेडी के पास अभी लोकसभा और राज्यसभा के कुल 21, वाईएसआर कांग्रेस के पास 31 इन सभी के मतों को अगर जोड़ लें तो भाजपा का आंकड़ा 498 पहुंच जाता है। इसके अलावा शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट के 12 लोकसभा सदस्य समेत कुछ और दल भी धनखड़ को वोट दे सकते हैं। इस तरह से चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को 500 से ज्यादा वोट मिल सकते हैं। मतलब जीत के लिए निर्धारित 393 या 391 मतों से कहीं ज्यादा वोट धनखड़ को मिल जाएंगे।
 

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मार्गरेट अल्वा - फोटो : पीटीआई
अल्वा के पक्ष में कितने वोट?
अभी तक के जो आंकड़े हैं, उसके अनुसार अल्वा को कांग्रेस के 84, डीएमके के 34, एनसीपी के नौ, आरजेडी के छह, समाजवादी पार्टी के छह सदस्य वोट दे सकते हैं। इस तरह से अल्वा के पक्ष में 140 वोट आसानी से मिल सकते हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के 10, तृणमूल कांग्रेस के 36 सदस्यों का भी साथ मिल सकता है। ये दल राष्ट्रपति चुनाव में भी विपक्ष के उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हैं। इस तरह से अल्वा के समर्थन में 176 वोट पड़ सकते हैं। 
 
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बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala
इन दलों ने अब तक नहीं खोले पत्ते
राष्ट्रपति चुनाव में आदिवासी के नाम पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), बसपा, शिरोमणि अकाली दल समेत कुछ अन्य पार्टियों ने एनडीए उम्मीदवार को समर्थन दिया था। अब देखना दिलचस्प होगा कि उपराष्ट्रपति चुनाव में ये किसे समर्थन देते हैं।
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