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US Think Tank on Operation Sindoor: भारत की जीत ने चौंकाया, उसने दुनिया की परवाह नहीं की, इसका चार तरह से असर

Thu, 15 May 2025 10:05 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Operation Sindoor: पूरी दुनिया अब भारत की ताकत का लोहा मान चुकी है। 'ऑपरेशन सिंदूर' की हर तरफ तारीफ हो रही है। एक दिन पहले ऑस्ट्रेलियाई एविएशन एनालिस्ट टॉम कूपर ने भारत के शौर्य की तारीफ की थी। अब अमेरिका के जानेमाने युद्ध विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने भारत के नई नीति को सराहा है।
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Operation Sindoor - फोटो : Amar Ujala
ऑपरेशन सिंदूर आधुनिक युद्ध के मौजूदा दौर में भारत की निर्णायक जीत है, लेकिन मेरी नजरों में ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह थमा नहीं है। यह एक सोचा-समझा रणनीतिक विराम है, जिसे कुछ लोग संघर्ष विराम कह सकते हैं, लेकिन भारतीय सेना ने इस शब्द से जानबूझकर दूरी बनाई। मेरे लिए, यह कोई मामूली ठहराव नहीं, बल्कि एक ऐसी सैन्य जीत के बाद का दमदार कदम है, जो इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।

ऑपरेशन सिंदूर के तहत अब तक चार दिन की सटीक और शक्तिशाली कार्रवाई में, मैंने भारत को एक ऐसी जीत हासिल करते देखा, जिसने दुनिया को चौंका दिया। ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकी ठिकानों को तबाह करने, भारत की सैन्य श्रेष्ठता को साबित करने, निवारक शक्ति को दूसरा जन्म देने और एक नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को दुनिया के सामने लाने के अपने लक्ष्यों को न सिर्फ हासिल किया, बल्कि उन्हें कई गुना बढ़ा दिया। यह सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की ताकत का शंखनाद था।
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Operation Sindoor - फोटो : Amar Ujala
22 अप्रैल, 2025 को, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 पर्यटक एक बर्बर आतंकी हमले का शिकार बने। पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा की शाखा, द रेसिस्टेंस फ्रंट ने इसकी जिम्मेदारी ली। मैंने देखा कि इस बार भारत ने न तो समय गंवाया, न ही दुनिया की परवाह की। 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ। मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गूंजता बयान सुना- आतंक और बातचीत साथ नहीं चल सकते। पानी और खून एक साथ नहीं वह सकते।
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Operation Sindoor - फोटो : Amar Ujala
एक के बाद एक चरणबद्ध कार्रवाई
  • 7 मई को पाकिस्तान व पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ सटीक हमले किए गए। भारतीय वायुसेना ने बहावलपुर, मुरीदके व मुजफ्फराबाद में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर के नौ आतंकी अड्डों को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद कर दिया।
  • 8 मई को पाकिस्तान ने भारत के पश्चिमी राज्यों में बड़े पैमाने पर ड्रोन से जवाबी कार्रवाई की। भारत के बहुस्तरीय वायु रक्षा नेटवर्क, घरेलू आकाश मिसाइल और इस्त्राइली व रूसी रक्षा प्रणालियों ने पाकिस्तान के ड्रोन हमलों। को नाकाम किया।
  • 9 मई को भारत ने छह पाकिस्तानी सैन्य एयरबेस व यूएबी समन्वय केंद्रों पर अतिरिक्त हमले किए। 10 मई को गोलीबारी में अस्थायी रोक लगाई गई। भारत ने इसे युद्धविराम नहीं बल्कि फायरिंग का विराम बताया। यह सिर्फ सामरिक सफलता नहीं थी। यह प्रत्यक्ष गोलीबारी के तहत सैद्धांतिक क्रियान्वयन था।

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Operation Sindoor - फोटो : Amar Ujala
ये चार गहरे सामरिक प्रभाव दिखे
  1. एक नई लकीर खींची गई और उसे लागू किया गया। यह स्पष्ट कर दिया गया कि पाकिस्तानी धरती से होने वाले आतंकी हमलों का अब सैन्य बल से जवाब दिया जाएगा। यह कोई धमकी नहीं, यह एक मिसाल है।
  2. भारत ने पाकिस्तान में किसी भी लक्ष्य पर हमले की क्षमता दिखाई। इसमें आतंकी स्थल, ड्रोन समन्वय केंद्र, यहां तक कि एयरवेस भी हैं। इस बीच, पाकिस्तान भारत में एक भी सुरक्षित क्षेत्र में घुसने में असमर्थ था। यह बराबरी नहीं, बहुत बड़ी श्रेष्ठता है।
  3. भारत ने जोरदार तरीके से जवाबी कार्रवाई की, लेकिन पूर्ण युद्ध से पहले गया। नियंत्रित वृद्धि ने एक स्पष्ट निवारक संकेत दिया कि भारत जवाब देगा, और यह गति को नियंत्रित भी करता है।
  4. भारत ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की मांग किए बिना इस संकट को संभाला। इसने संप्रभु  साधनों का उपयोग करते हुए संप्रभु शर्तों पर सिद्धांत लागू किया। भारत ने बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अपनी संप्रभुता का परचम लहराया।
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Operation Sindoor - फोटो : Amar Ujala
प्रतिशोध नहीं प्रतिरोध की थी लड़ाई...
ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य कहीं कब्जा करना या शासन बदलना नहीं था। यह सीमित युद्ध था जिसे खास उद्देश्यों के लिए अंजाम दिया गया। जो आलोचक तर्क देते हैं कि भारत को और आगे जाना चाहिए था, वे इस मुद्दे को समझने में गलती कर रहे हैं। भारत प्रतिशोध नहीं प्रतिरोध के लिए लड़ रहा था और यह काम कर गया। भारत का संयम कमजोरी नहीं है-यह परिपक्वता है। भारत ने सिर्फ हमले का जवाब नहीं दिया। इसने रणनीतिक समीकरण को बदल दिया। ऐसे युग में जहां कई युद्ध खुलेआम कब्जों या राजनीतिक उलझन में बदल जाते हैं, ऑपरेशन सिंदूर अलग है। यह अनुशासित सैन्य रणनीति का प्रदर्शन था। भारत ने एक झटके को झेला, अपना उद्देश्य परिभाषित किया और उसे पाया। यह सब एक सीमित समय सीमा के भीतर। ऑपरेशन सिंदूर में बल का जबरदस्त मगर नियंत्रित इस्तेमाल हुआ, सटीक, निर्णायक व बिना हिचकिचाहट के। आधुनिक युद्ध में इस तरह की स्पष्टता दुर्लभ है।
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