सादगी पसंद प्रियंका गांधी वाड्रा की राजनीति में एंट्री की घोषणा बड़ी ही सादगी से हुई। उनके शुभचिंतक और समर्थक उनमें इंदिरा गांधी की छवि देख रहे हैं। यही वजह है कि नेहरू भवन में उसी कमरे में प्रियंका का दफ्तर बनाने का काम शुरू हो चुका है। वह उसी कमरे में बैठेंगी जहां इंदिरा गांधी बैठा करती थीं। प्रियंका, नेहरू-गांधी परिवार की 12वीं सदस्य हैं जिन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा है।
एक नजर नेहरू गांधी परिवार के पॉलिटिकल फैमिली ट्री पर-
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प्रियंका गांधी
- फोटो : PTI
प्रियंका गांधी वाड्रा
भले ही 47 साल की उम्र में प्रियंका को पार्टी का महसचिव और पूर्वी उत्तरप्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। मगर इससे पहले भी वह पर्दे के पीछे से पार्टी के लिए काम करती रही हैं। अक्टूबर 1999 में रायबरेली में अरुण गांधी के खिलाफ किया गया उनका प्रचार हो या 2004 के लोकसभा चुनाव में अपनी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के लिए रायबरेली और अमेठी में चुनाव प्रचार की कमान संभालना उन्होंने हर मोर्चे पर खुद को साबित किया है। कहा जाता है कि हाल ही में तीन राज्यों में मुख्यमंत्री के चयन में भी प्रियंका ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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varun gandhi
वरुण गांधी
वरुण गांधी संजय और मेनका गांधी के बेटे हैं। वह 2004 में भाजपा में शामिल हुए। वर्तमान में सुल्तानपुर से भाजपा के सांसद हैं। 2009 में वह पहली बार पीलीभीत से जीतकर संसद पहुंचे थे। 2013 में पार्टी ने उन्हें 33 साल की उम्र में महासचिव बनाया था।
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rahul gandhi
राहुल गांधी
राहुल राजीव और सोनिया गांधी के बेटे हैं। वह पहली बार 2004 में अमेठी से जीतकर सांसद बने थे। वह 37 की उम्र में 2007 कांग्रेस के महासचिव और 2013 में उपाध्यक्ष बनाए गए। 2017 में राष्ट्रीय अधिवेशन में उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पार्टी की कमान सौंपी गई थी। हाल ही में कांग्रेस ने इनके नेतृत्व में राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में जीत हासिल करके सत्ता में वापसी की।
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सोनिया गांधी
- फोटो : SOCIAL MEDIA
सोनिया गांधी
1997 में नरसिम्हा राव की हार के बाद सोनिया गांधी की पार्टी में आधिकारिक एंट्री हुई। उस वक्त लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के 140 सदस्य थें। 1998 में कलकत्ता में उन्हें पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया और 1999 में उन्होंने चुनाव जीता। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने शाइनिंग इंडिया कैंपेन को फीका करते हुए 2004 और 2009 में लगातार दो बार सरकार बनाई। वह 2017 तक यानी 19 साल तक कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं।
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मेनका गांधी
- फोटो : PTI
मेनका गांधी
23 सितंबर 1974 को मेनका और संजय गांधी की शादी हुई। 1988 में उन्हें जनता दल का महासचिव बनाया गया। 1989 में पहली बार पीलीभीत से जीतकर संसद बनी। वह सात बार के रूप में निर्वाचित हो चुकी हैं। वह जानवरों के अधिकार के लिए लड़ती रही हैं। वर्तमान में वह केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री है।
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राजीव गांधी
राजीव गांधी
राजीव गांधी इंदिरा गांधी के बड़े पुत्र थे। वह 1985 ने सबसे कम उम्र के कांग्रेस अध्यक्ष बने। 1968 में उनकी शादी इटली की एन्टोनिया माइनो (सोनिया गांधी) से हुई थी। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके पुत्र राजीव गांधी भारी बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बने थे। उसके बाद 1989 के आम चुनावों में कांग्रेस की हार हुई। 1991 के आम चुनाव में प्रचार के दौरान तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक भयंकर बम विस्फोट में राजीव गांधी की मौत हो गई थी।
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Sanjay gandhi
संजय गांधी
इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी 1980 में अमेठी से सांसद चुने गए थे। भारत में आपातकाल के समय उनकी भूमिका बहुत विवादास्पद बताई जाती है। चुनाव जीतने के पांच महीने बाद ही एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी।
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फिरोज गांधी- इंदिरा गांधी
फिरोज गांधी
फिरोज गांधी एक राजनेता और पत्रकार थे। वह 1952 में यूपी की प्रतापगढ़ सीट और 1957 में रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। 1942 में उनकी शादी इंदिरा गांधी से हुई थी।
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indira gandhi
इंदिरा गांधी
1930 में इंदिरा गांधी की पॉलिटिक्स में एंट्री हुई और वह इंडियन लीग की सदस्य बनीं। 1951 में पिता नेहरू और पति फिरोज के लिए प्रचार किया। 1959 में 42 साल की उम्र में वह कांग्रेस की अध्यक्ष बनी। वह तीन बार कांग्रेस की राष्टीय अध्यक्ष रहीं। 1966 में वह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उस वक्त कांग्रेस की 283 सीटें थीं। इंदिरा गांधी 1966 से 1977 और 1980 से 1984 तक देश की प्रधानमंत्री रहीं।
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VIjaya Laxmi Pandit
विजयलक्ष्मी
जवाहरलाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित 1946 में यूनाइटेड प्रोविंस से विधानसभा पहुंचींं। वह दो बार फूलपुर से सांसद बनीं। इसके अलावा वह महाराष्ट्र की राज्यपाल भी बनीं।
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जवाहर लाल नेहरू
जवाहरलाल नेहरू
जवाहरलाल नेहरू पांच बार कांग्रेस के अध्यक्ष बने। 1936 में वह 47 साल की उम्र में पहली बार अध्यक्ष बने। आजादी की लड़ाई के दौरान ही उन्होंने दो बार कांग्रेस की कमान संभाली। वह 17 साल तक देश के प्रधानमंत्री रहे।
मोतीलाल नेहरू 1919 में 58 साल की उम्र में अमृतसर में पहली बार कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे। दूसरी बार 1928 में कलकत्ता में अध्यक्ष चुने गए। 1928 में कांग्रेस की बनाई भारतीय संविधान आयोग के भी वे अध्यक्ष बने। इसी आयोग ने नेहरू रिपोर्ट पेश की थी।