संसद हमले की 15वीं बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विभिन्न सांसदों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी शहीदों को याद किया। बरसी पर जानिए संसद हमले की 10 बड़ी बातें।
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13 दिसंबर 2001 इतिहास के गर्भ में मौजूद वो काला दिन है जिसने लोकतंत्र के सीने को छलनी कर दिया। 45 मिनट तक गोलियां संसद परिसर में गूंजती रही।
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इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों का मुकाबला करते हुए दिल्ली पुलिस के पांच जवान, सीआरपीएफ की एक महिला कांस्टेबल और संसद के दो गार्ड शहीद हुए।
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उस दिन सदन की कार्रवाई के बाद दोनों सदन स्थगित हुए थे। 11 बजकर 25 मिनट पर संसद परिसर के भीतर एक सफेद एंबेसडर कार घुसी। जिसमें एके-47 और हैंडग्रेनेड से लैस 5 आतंकियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी।
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संसद परिसर में गोलियों की गूंज और वातावरण में धुंए का गुबार शामिल हो गया। अचानक हुए इस हमले के बाद संसद परिसर के भीतर अफरातफरी मच गई। जब हमला हुआ तो उस वक्त परिसर में केंद्रीय मंत्री, सांसद सभी मौजूद थे।
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45 मिनट तक सुरक्षाकर्मियों ने आतंकियों का डटकर मुकाबला किया और परिसर के भीतर पांचों आतंकियों को मार गिराया। इस मुठभेड़ में 16 जवान भी घायल हुए थे।
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आतंकी भारत के दिल दिल्ली में संसद पर हमला करके लोगों के अंदर खौफ पैदा करना चाहते थे। इस हमले के बाद संसद परिसर की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए।
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4 अगस्त 2005 को संसद पर आतंकी हमले की साजिश रचने का दोषी मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जैश-ए-मुहम्मद के सरगना अफजल गुरू को फांसी की सजा सुनाई।
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कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 20 अक्टूबर 2006 को इस घिनौनी हरकत को अंजाम देने वाले आतंकी को फांसी के तख्ते पर लटका दिया जाए।
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parliament attack
3 अक्टूबर को अफजल की पत्नी ने राष्ट्रपति के सम्मुख दया याचिका दाखिल की।