स्वदेश में निर्मित उन्नत और हल्के किस्म के लड़ाकू विमान 'तेजस' को आज पूरे धूमधाम के साथ भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया। इस दौरान बेंगलुरु के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के एयरपोर्ट पर वायुसेना के तमाम बड़े अधिकारी शामिल रहे। बता दें कि भारत ने स्वदेश निर्मित इस विमान को रूस की सहायता से बनाया है जो पुराने मिग 21 की जगह लेगा।
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खास बात रही कि तेजस को भारतीय बेडे में शामिल करने से पूर्व चारों धर्मों के धर्मगुरु मौजूद रहे जिन्होंने मंत्रोच्चार और अन्य धार्मिक विधि विधान के साथ इस खास विमान को वायुसेना के बेड़े में शामिल कराया।
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बता दें कि तेजस की तुलना पाकिस्तान के जेएफ-17 लड़ाकू विमानों से की जा रही है जिसे चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से तैयार किया है। इस विमान ने पुराने जे-7 मानों को जगह ली थी।
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तेजस सिंगल इंजन वाला विमान है जो मल्टी रोल परफार्मेंस देने में सक्षम है। यह ध्वनि से भी तेज रफ्तार से दुश्मनों पर हमला कर सकता है। इसकी टॉप स्पीड 1920 किमी प्रति घंटा तक है।
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भारतीय वायु सेना तेजस में कई बड़े बदलाव करके इसे पांचवी पीढ़ी के उन्नत लड़ाकू विमान के तौर पर विकसित करने जा रही है। जिसके लिए इसमें करीब 43 बड़े बदलाव किए गए हैं।
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तेजस का विंग डेल्टा आकार का है जो इसे सुपरसोनिक गति से उड़ने के दौरान जरूरी बल देता है और इसकी क्षमता को कहीं ज्यादा बढ़ा देता है। तेजस का एयरो डाइनमिक्स पाकिस्तान के जे-17 से कहीं ज्यादा उन्नत और बढ़िया है।
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तेजस में जिस इंजन का इस्तेमाल किया गया है वह काफी उन्नत किस्म का है जो इस विमान को बेहतरीन ताकत और क्षमता प्रदान करती है। तेजस इलेक्ट्रानिक वारफेयर से लैस विमान है जो दुश्मन के रडार और मिसाइल को जाम करने में सक्षम है।
तेजस को भारतीय बेड़े में शामिल करने से पूर्व एयर चीफ मार्शल अरूप राहा भी मार्च में इसकी सवारी कर चुके हैं। उन्होंने बेंगलुरु के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड(एचएएल) के एयरपोर्ट से उड़ान भरी और 30 मिनट तक तेजस को उड़ाया था।