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Tariff Row Explained: क्या क्वाड सम्मेलन के लिए भारत नहीं आएंगे ट्रंप; किस बात पर खीझकर लगाया मनमाना टैरिफ?

Sun, 31 Aug 2025 07:55 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वॉशिंगटन

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत पर कुल मिलाकर 50 फीसदी टैरिफ लगाया जा चुका है। भारतीय उत्पादों पर जहां 25 फीसदी आयात शुल्क अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने के लिए तो वहीं अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने के लिए जुर्माने के तौर पर लगाया गया है।
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टैरिफ वॉर - फोटो : Amar Ujala
अमेरिका का भारतीय सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ थोपना महज व्यापार घाटा या रूस से सस्ता तेल खरीदने से जुड़ा मसला नहीं है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम कराने के झूठ और वर्षों से पल रहे उनके नोबेल शांति पुरस्कार के सपने का समर्थन करने से साफ इन्कार कर दिया। पीएम मोदी के इस कदम से नाराज होकर ही ट्रंप ने भारत पर भारी भरकम टैरिफ लगाया। वाशिंगटन और नई दिल्ली के 12 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
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डोनाल्ड ट्रंप, पीएम मोदी - फोटो : Amar Ujala
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच संबंध कनाडा में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर 17 जून को 35 मिनट तक टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद बिगड़े। ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार पाने के लिए बार-बार भारत और पाकिस्तान के बीच मई में चार दिनों तक चले संघर्ष को रुकवाने का श्रेय ले रहे थे। उनका कहना है कि उन्होंने 75 साल से भी ज्यादा पुराने भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष का समाधान करा दिया। 17 जून की टेलीफोन पर वार्ता के दौरान ट्रंप ने पीएम मोदी से कहा कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने जा रहा है और उन्हें भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव खत्म करवाने पर गर्व है। ट्रंप ने पीएम से कहा कि भारत को भी उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करना चाहिए। हालांकि पीएम मोदी ने ऐसा करने से साफ इन्कार कर दिया।
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पीएम मोदी और ट्रंप - फोटो : एएनआई
इतना ही नहीं, पीएम ने उनसे दो-टूक कहा, हालिया संघर्ष को रुकवाने में भी अमेरिका या उनकी कोई भूमिका नहीं है। यह संघर्ष विराम पाकिस्तान के गुहार लगाने पर हुआ। पीएम मोदी का नोबल पुरस्कार के लिए नामित करने से इन्कार करना ट्रंप को काफी नागवार गुजरा। इसके बाद से ही दोनों नेताओं के बीच संबंधों में खटास आ गई जबकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच काफी घनिष्ठ संबंध थे। दोनों नेताओं के बीच 17 जून के बाद कोई बातचीत नहीं हुई। कई रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रंप ने चार बार पीएम मोदी को फोन लगाया लेकिन इसका कोई जवाब नहीं दिया गया।

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अमेरिका ने भारत पर लगाए हैं 50 फीसदी टैरिफ। - फोटो : अमर उजाला
क्वाड सम्मेलन में शिरकत पर भी असमंजस
अधिकारियों ने कहा, टेलीफोन पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मोदी से कहा था कि वह इस साल के अंत में क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए भारत की यात्रा करेंगे, लेकिन अब ट्रंप के क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने की कोई योजना नहीं है।
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ट्रंप के साथ पीएम मोदी - फोटो : एक्स/NARENDRA MODI
मोदी और मुनीर का हाथ मिलवाने की थी योजना
ट्रंप ने टेलीफोन पर बातचीत के दौरान मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया था। इसी दिन पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर भी व्हाइट हाउस में डिनर के लिए आमंत्रित थे। ट्रंप चाहते थे कि व्हाइट हाउस में मोदी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर के हाथ मिलाने का कार्यक्रम रखा जाए और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसे अमेरिका की जीत की तरह प्रचारित किया जाए, लेकिन पीएम मोदी के व्हाइट हाउस आने में असमर्थता जताने से ट्रंप की योजना परवान नहीं चढ़ सकी।
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डोनाल्ड ट्रंप, पीएम मोदी - फोटो : ANI
व्यापार वार्ता पटरी से उतरी...
17 जून को टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद ही भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता पटरी से उतर गई और आखिर में अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया। अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से ट्रंप अपने एक अहम रणनीतिक साझेदार के साथ संबंधों को कमजोर कर रहे हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI
ट्रंप अहंकारी, मोदी लोकलुभावन नेता
अधिकारियों का कहना है, ट्रंप की नजर जहां नोबेल शांति पुरस्कार हासिल करने पर है, वहीं पीएम मोदी पाकिस्तान से जंग के चलते अपने देश में ताकतवर बनकर उभरे हैं। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में विदेशी नेताओं ने तारीफों और उपहारों से उनके अहंकार को शह दी। यदि पीएम मोदी ट्रंप की बात मान लेते, तो इसकी दुनिया के साथ ही भारत में गलत असर जाता और कहा जाता कि उन्होंने अमेरिका के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
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डोनाल्ड ट्रंप, नरेंद्र मोदी - फोटो : एएनआई (फाइल)
भारतीय कूटनीतिक व्यवहार के भी खिलाफ
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की वरिष्ठ फेलो तन्वी मदान ने कहा कि मोदी अमेरिकी दबाव में युद्धविराम स्वीकार करेंगे या उन्होंने मध्यस्थता की मांग की थी, यह सिर्फ न उनके व्यक्तित्व के खिलाफ है, बल्कि यह भारतीय कूटनीतिक व्यवहार के भी खिलाफ है। मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपतियों के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और राजनीतिक रूप में पेश किया है। कई अधिकारी और पर्यवेक्षक भारत पर लगाए गए भारी जुर्माने को व्यापार घाटे को कम करने या रूस के साथ तेल खरीद से जोड़कर नहीं देखते हैं। उनका मानना है कि यह भारी टैरिफ ट्रंप की बात न मानने की सजा है।

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में भारत मामलों के अध्यक्ष रिचर्ड एम. रोसो ने कहा, अगर रूस को रोकने की कोशिश में नीति में कोई वास्तविक बदलाव होता तो ट्रंप उस कानून का समर्थन करते जो रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदने वाले देशों पर द्वितीयक प्रतिबंध लगाता। जबकि उन्होंने भारत को ही लक्षित किया है।
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