अज्ञात कीड़ों के हमले से संगमरमरी ताज का रंग बदल रहा है। यमुना नदी के किनारे से बड़ी संख्या में आ रहे इन कीड़ों के हमले से ताज के इस हिस्से का रंग हरा होने लगा है। कीड़े से निकलने वाले स्राव से संगमरमर पर हरे रंग के दाग कुछ यूं बन रहे हैं, मानो किसी ने स्प्रे कर दिया हो।
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ताजमहल
- फोटो : amar ujala bureau
एएसआई केमिकल ब्रांच में इन दागों से खलबली मची है। तीन दिन पहले शुरू हुए हमले के बाद एएसआई ने इसके सैंपल इकट्ठे किए। इन पर एएसआई ने नेशनल बॉटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर जांच शुरू की है। ये संस्थान पहली बार हुए इस तरह के हमले और कीड़ों के हरा रंग छोड़ने के कारणों का पता लगाएंगे।
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ताजमहल पर बुधवार से ये खास किस्म के कीड़े संगमरमरी दीवारों पर चिपक रहे हैं। कीड़ों ने ताज का यमुना किनारा और उसकी संगमरमरी दीवारों, पच्चीकारी, डिजायन और फूल-पत्तियों को हरा कर दिया तो एएसआई केमिकल ब्रांच में हड़कंप मचा।
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अधीक्षण पुरातत्वविद् केमिकल ब्रांच डॉ. एमके भटनागर ने अपनी टीम के साथ दो दिन तक इन कीड़ों और उनके स्राव के सैंपल अलग-अलग समय में भरे। उन्होंने अध्ययन में पाया कि हरी घास या पौधों से उठ रहे ये कीड़े रात में ताज पर अटैक कर रहे हैं। सूखने पर हरे से काले रंग में बदल रहा स्राव पानी डालने पर संगमरमर पर रंग छोड़ रहा है।
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ताज में पूर्व, पश्चिमी और दक्षिणी ओर कीड़ों का असर नहीं है। केवल यमुना किनारे उत्तर दिशा पर ही इनका प्रकोप है। ये कीड़े ठंडी जगहों पर ही बैठ रहे हैं। केमिकल ब्रांच ने सैंपल लेकर नेशनल बॉटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट और फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों को भेजे हैं, ताकि कीड़ों की प्रकृति, उनके स्राव और उसके तत्वों के बारे में पता लगाया जा सके। बता दें, बरसात बाद (अक्तूबर) ताज पर कीड़े तो आते रहे हैं लेकिन रंग नहीं छोड़ते। अप्रैल में उनके चिपकने और रंग छोड़ने का यह पहला मामला है।
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नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ताजमहल पर कृत्रिम रोशनी डालने के संबंध में दो बार अपनी रिपोर्ट में इनकार कर चुकी है। गत वर्ष अक्तूबर में ताज के यमुना किनारे की सुरक्षा लाइटों के चलते कुछ कीड़े मुख्य मकबरे पर पहुंचे थे, लेकिन तब इससे ताज का रंग नहीं बदला था। कीड़ों के स्राव से ताज को खतरा बताते हुए एएसआई केमिकल ब्रांच ने सीआईएसएफ से लाइटें बंद करने को कहा था। रोशनी से कीड़े ताज की ओर भी आकर्षित हो रहे थे।
एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. भुवन विक्रम ने कहा कि ऐसे कीड़े पहली बार आए हैं, जिनसे ताज की दीवारें हरे रंग की हुई हैं। इसलिए इनका सैंपल एकत्र कर जांच के लिए भेजा गया है। इस पर शोध होगा और उससे भविष्य में नियंत्रण के बारे में पता चल सकेगा