स्वीडन के एक प्रेमी युगल ने बृहस्पतिवार को काशी में हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। लावा परिछन भी हुआ और कन्यादान की भी रस्म निभाई गई।
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वर-कन्या ने सात फेरे लेने के बाद जन्म-जन्म का साथ निभाने का वचन लिया। लाल जोड़े में विदेशी युगल को सजाने से लेकर शादी कराने तक अस्सी मुहल्ले के लोग घराती-बराती की भूमिका में रहे।
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हिंदू रस्मो-रिवाज से प्रभावित इस जोड़े ने हिंदू रीति से शादी करने का फैसला किया था।
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पेशे से शिक्षक निकोलस और इंजीनियर तिल्ला के बीच पांच साल पहले काशी में ही प्यार शुरू हुआ और इसी प्राचीन नगरी में उनके हाथ भी पीले हुए। दिन के 12 बजे घोड़े पर चढ़कर दूल्हे की बारात निकली।
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बाराती बने अस्सी घाट के जान के पहचान लोग और होटल व्यवसाय से जुड़े निकोलस के परिचित। बैंडबाजे के साथ बारात निकली तो देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई।
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बारात दिन के करीब 12 बजे अस्सी घाट स्थित शिव मंदिर में पहुंची। वहां पुरोहित पं. बच्चा मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शादी कराई। उपेंद्र झा ने तिल्ला का कन्यादान किया तो गगन प्रजापति ने भाई के रूप में लावा परिछन की रस्म निभाई। इस दौरान उल्लास का माहौल था।
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तिल्ला ने बताया कि पांच वर्ष पहले वह वर्ल्ड लिटरेसी ऑफ कनाडा संस्था के साथ जुड़कर गंगा महल घाट पर काम कर रही थी। उसी दौरान एक कैफे में निकलोस से मुलाकात हो गई।
दोनों हम वतन थे और बातचीत का सिलसिला प्यार में तब्दील हो गया। वतन लौटने के बाद जब नजदीकियां और बढ़ीं तब हम लोगों ने फैसला किया कि जहां से प्यार शुरू हुआ था, वहीं शादी भी करेंगे। इसके बाद हिंदू रीति से हम एक-दूजे के हो गए।